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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   Drought had hit, not save seed

सूखे की पड़ी मार, बीज तक नहीं बचा

Thu, 07 Apr 2016 05:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Thu, 07 Apr 2016 05:57 PM IST
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बीते पांच महीने में सामान्य से 75 फीसदी कम बारिश होने से जिले में 33 से 50 फीसदी तक सूखा पड़ गया है। मौसम की इस बेरूखी से 679 गांवों में 6170.532 हेक्टेयर में भूमि में फसलें व्यापक रूप से प्रभावित हुई हैं। स्थिति इस कदर भयावह हो चुकी है कि काश्तकारों के सामने अगली फसल बोने के लिए भी बीज तक नहीं बचा है।
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बीते वर्ष नवंबर से जनवरी 2016 तक जिले में करीब 7 मिमी और फरवरी से मार्च तक करीब 5 मिमी बरिश ही हुई है। इससे गेहूं, जौ, लाई, सरसों और सब्जी की उपज सूखे की भेंट चढ़ गई है। अधिकांश स्थानों पर गेहूं और जौ की पौध 8 से 10 इंच तक ही बढ़ पाई। जनपद की चार तहसीलों में सूखे से 405.076 हेक्टेयर सिंचित और 5765.456 हेक्टेयर असिंचित भूमि पर बोई गई फसलों को नुकसान पहुंचा है। सबसे बुरी स्थिति रुद्रप्रयाग तहसील की है, जहां 3086.274 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई फसलों को 50 फीसदी से भी अधिक नुकसान हुआ है।
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कई गांवों में तो खेत पूरी तरह से सूख गए हैं। ऊखीमठ तहसील में 207.012 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर बोई गई फसलें पानी के अभाव में 40 फीसदी तक सूख गई हैं। स्थिति यह है सूखी फसल चारे के लायक भी नहीं है। यहीं नहीं, गांवों में साग-भाजी की फसलें भी सूख रही हैं। कृषि पंडित मुरली सिंह चौधरी ने बताया कि बीते वर्ष ओलावृष्टि से फसलों को क्षति पहुंची थी। इस बार सूखे ने काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। उनके स्वयं के 60 नाली से अधिक भूमि पर बोई गई फसल व्यापक प्रभावित हुई है। यही स्थिति जिले के अन्य काश्तकारों की भी है।
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स्रोतों पर घट रहा पानी
रुद्रप्रयाग। बारिश नहीं होने से सरकारी पेयजल योजनाएं भी दम तोड़ने लगी हैं। वहीं सिंचाई नहरों पर भी पानी कम होने लगा है। जिले में प्राकृतिक स्रोतों पर 40 से 55 फीसदी तक पानी कम हुआ है। पुनाड़ गदेरे से रुद्रप्रयाग नगर को पानी आपूर्ति करने वाले स्रोत पर 50 फीसदी कमी आई है। यही वजह है कि जलसंस्थान नगर में रोटेशन के तहत जलापूर्ति कर रहा है। दूसरी तरफ चोपता, तुंगनाथ और तल्ला नागपुर तल्ला क्षेत्र के चार बड़े पेयजल स्रोतों पर भी पानी कम हो गया है।


सामान्य से काफी कम बारिश के कारण फसलों के सूखने के साथ ही पेयजल स्रोतों पर पानी कम हो रहा है। सूखे की स्थिति का सर्वे कराकर रिपोर्ट को  शासन को भेज दी गई है।
- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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