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गौंडार में विधायक ने लगाई चौपाल
ब्यूरो/अमर उजाला,
Updated Fri, 22 Jan 2016 09:40 PM IST
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मेरी उम्र 70 वर्ष हो गई है। इस चढ़ाई को चढ़ते और उतरते वक्त न जाने कितने दुख देख लिए हैं। लेकिन सड़क फिर भी नसीब नहीं हो पाई है।
हम आज भी आदिकाल में जी रहे हैं। ये शब्द गौंडार के पूर्व प्रधान आलम सिंह पंवार के हैं, उन्होंने विधायक की चौपाल में अपना दुखड़ा रोया तो विभागीय अधिकारियों को भी जनपद के विकास की वास्तविकता नजर आई।
गांव के कमल सिंह पंवार का कहना था बुखार की दवा के लिए भी 28 किमी दूर ऊखीमठ जाना होता है।
आज भी ग्रामीणों घरेलू इलाज पर निर्भर हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों के टीककरण और गर्भवती महिलाओं के उपचार की होती है।
ग्रामीण अपने गर्भवती महिलाओं को इलाज के अलाव में प्रसव के लिए मायके भेज देते हैं। बुर्जुग शारदी देवी का कहना था कि लोगों के गांव में सुबह-शाम मोबाइल की घंटियां बज रही है।
लोग अपनों की कुशलक्षेम पूछते हैं। ले किन हमारे नसीब में ऐसा नहीं है। चौपाल में ग्रामीणों के इस दर्द को गांव के विनोद सिंह ने एक गीत के जरिये इस तरह बयां किया....उत्तराखंड देव भूमि आखिरी मेरू गौं कन भलु लगदे दीदी मेरू गौं पर आज तक रोड़ नी पौंछी दीदी मेरा गौं।
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ग्रामीणों ने गांव में जूनियर हाईस्कूल का उच्चीकरण कर इंटर तक खोलने की मांग भी की।
इस मौके पर विधायक शैलारानी रावत ने कहा कि सेंचुरी एरिया के कारण सड़क निर्माण में जो दिक्कत आ रही थी, उसे सुलझाया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 2016 को गौंडार के विकास का वर्ष बताया।
इस मौके पर डीएम डा. राघव लंगर ने वन अधिकारी 2006 के बारे में ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि सबकुछ ठीक रहा तो इस वर्ष के अंत तक गौंडार सड़क से जुड़ जाएगा।
उन्होंने गांव को संचार सेवा से जोड़ने के लिए मोबाइल टावर लगाने और स्वास्थ्य सुविधा के तहत शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था करने का भरोसा भी दिया। इस मौके पर उप जिलाधिकारी उत्तम सिंह चौहान सहित कई विभागों के विभागाध्यक्ष भी मौजूद थे।
विदित हो कि ौंडार गांव जनपद रुद्रप्रयाग जनपद का अंतिम गांव है, जो सड़क, स्वास्थ्य, संचार सहित कई जरूरी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
मिलन केंद्र में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने एक स्वर में गांव को सड़क से जोड़ने की मांग की। कहना था कि गांव से रांसी तक छह किमी पैदल सफर तय कर उन्हें घरों के लिए जरूरी सामान लाना होता है।
विभागों को कई बार समस्या से अवगत कराने के बाद भी किसी ने आज तक सुध नहीं ली।
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हम आज भी आदिकाल में जी रहे हैं। ये शब्द गौंडार के पूर्व प्रधान आलम सिंह पंवार के हैं, उन्होंने विधायक की चौपाल में अपना दुखड़ा रोया तो विभागीय अधिकारियों को भी जनपद के विकास की वास्तविकता नजर आई।
गांव के कमल सिंह पंवार का कहना था बुखार की दवा के लिए भी 28 किमी दूर ऊखीमठ जाना होता है।
आज भी ग्रामीणों घरेलू इलाज पर निर्भर हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों के टीककरण और गर्भवती महिलाओं के उपचार की होती है।
ग्रामीण अपने गर्भवती महिलाओं को इलाज के अलाव में प्रसव के लिए मायके भेज देते हैं। बुर्जुग शारदी देवी का कहना था कि लोगों के गांव में सुबह-शाम मोबाइल की घंटियां बज रही है।
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लोग अपनों की कुशलक्षेम पूछते हैं। ले किन हमारे नसीब में ऐसा नहीं है। चौपाल में ग्रामीणों के इस दर्द को गांव के विनोद सिंह ने एक गीत के जरिये इस तरह बयां किया....उत्तराखंड देव भूमि आखिरी मेरू गौं कन भलु लगदे दीदी मेरू गौं पर आज तक रोड़ नी पौंछी दीदी मेरा गौं।
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ग्रामीणों ने गांव में जूनियर हाईस्कूल का उच्चीकरण कर इंटर तक खोलने की मांग भी की।
इस मौके पर विधायक शैलारानी रावत ने कहा कि सेंचुरी एरिया के कारण सड़क निर्माण में जो दिक्कत आ रही थी, उसे सुलझाया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 2016 को गौंडार के विकास का वर्ष बताया।
इस मौके पर डीएम डा. राघव लंगर ने वन अधिकारी 2006 के बारे में ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि सबकुछ ठीक रहा तो इस वर्ष के अंत तक गौंडार सड़क से जुड़ जाएगा।
उन्होंने गांव को संचार सेवा से जोड़ने के लिए मोबाइल टावर लगाने और स्वास्थ्य सुविधा के तहत शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था करने का भरोसा भी दिया। इस मौके पर उप जिलाधिकारी उत्तम सिंह चौहान सहित कई विभागों के विभागाध्यक्ष भी मौजूद थे।
विदित हो कि ौंडार गांव जनपद रुद्रप्रयाग जनपद का अंतिम गांव है, जो सड़क, स्वास्थ्य, संचार सहित कई जरूरी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
मिलन केंद्र में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों ने एक स्वर में गांव को सड़क से जोड़ने की मांग की। कहना था कि गांव से रांसी तक छह किमी पैदल सफर तय कर उन्हें घरों के लिए जरूरी सामान लाना होता है।
विभागों को कई बार समस्या से अवगत कराने के बाद भी किसी ने आज तक सुध नहीं ली।