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हेली कंपनियां ही नहीं, टैक्सी चालक भी लूट पर आमादा

ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Tue, 23 May 2017 10:29 PM IST
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no convence - फोटो : amar ujala bureau

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केस एक -
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हैदराबाद के माधव रेड्डी 25 सदस्यीय दल के साथ 20 मई को गुप्तकाशी पहुंच गए थे। 21 मई को ग्लोबल वेक्टा हेली कंपनी के हेलीकॉप्टर से केदारनाथ जाना था, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने पर भी नंबर नहीं आया। ऐसे में कुछ लोग पैदल ही निकल गए। माधव रेड्डी ने 22 मई को हेली कंपनी को केदारनाथ जाने के 15 हजार रुपये दिए, जिसके बाद उन्हें धाम पहुंचाकर वापस लाया गया।
केस दो -
हैदराबाद से बाबा केदार के दर्शन को आई रमा देवी 22 मई को गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग से घोड़े से गई। इस दौरान उन्हें 4 हजार रुपये देने पड़े। वापसी भी घोड़े से करनी पड़ी, जिस कारण उन्हें 2 हजार रुपये और देने पड़े। यानी दोतरफा उन्हें 6 हजार रुपये देने पड़े जबकि गौरीकुंड से केदारनाथ घोड़ा-खच्चर का जाना-आना उसी दिन 31 सौ रुपये है।


केस तीन -
23 मई को गुप्तकाशी बस स्टैंड पर ऊखीमठ जाने के लिए सविता और अनीता दो बहनों को करीब तीन घंटे तक धूप में वाहनों का इंतजार करना पड़ा। दोपहर 12 बजे बमुश्किल से एक मैक्स मिली, जिसने 50-50 रुपये किराया लिया। गुप्तकाशी से ऊखीमठ की दूरी 15 किमी है और आम तौर पर टैक्सी का किराया 30 रुपये है। इसी तरह से श्याम सिंह को गौरीकुंड से गुप्तकाशी पहुंचने के लिए 100 रुपया देना पड़ा। अन्य दिनों में यह किराया मात्र 60 रुपये होता है।

बाबा केदार की यात्रा में अव्यवस्थाएं पसरी पड़ी हैं। हेली कंपनियों और घोड़ा-खच्चर संचालकों के साथ अब टैक्सी-मैक्सी संचालक भी यात्रियों के साथ स्थानीय की जेब पर डाका डालने लगे हैं। बावजूद प्रशासन और पुलिस आंखों के सामने सब कुछ देखने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रही है।

3 मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। यात्रियों से कौन कितनी मोटी रकम लूट सकता है, इसे लेकर होड़ सी मची हुई है। बाबा केदार के दर्शन को पहुंच रहे श्रद्धालुओं से जहां हेली कंपनियां मनमर्जी का किराया वसूल रही हैं, वहीं घोड़ा-खच्चर संचालकों का दुर्व्यवहार  और मनमानी अपने चरम पर है। हालात इस कदर हैं कि प्रशासन के निर्देश भी उनके सामने बौने साबित हो रहे हैं।

इधर, पिछले तीन-चार दिन से टैक्सी संचालक भी लूट में शामिल हो गए हैं। वाहनों के इंतजार में बाजारों में घंटों यात्रियों व स्थानीय लोगों की मजबूरी का टैक्सी संचालक भी जमकर फायदा उठा रहे हैं। यात्री हो या स्थानीय सबकी जेब ढीली की जा रही है। स्थानीय दिनेश सिंह ने बताया कि यात्रा के नाम पर छोटे वाहन संचालकों द्वारा सवारियों को जमकर लूटा जा रहा है। बाजारों से बड़े वाहन गायब है।

ऐसे में टैक्सी संचालक 5 से 10 किमी की बुकिंग भी एक हजार से 15 सौ से नीचे नहीं हो रही है। मजबूरी में लोग इतने रुपये देने को मजबूर हैं। गौरीकुंड से गुप्तकाशी पहुंचे यूपी के कार्तिक कुमार, श्याम सिंह और हरप्रीत ने बताया कि वे जैसे-तैसे शटल (टैक्सी) से सोनप्रयाग पहुंचे। यहां पर चार घंटे बाद बमुश्किल से एक टैक्सी मिली, जिसमें 100-100 रुपये किराया देना पड़ा।

बसों की यात्रा में बुकिंग होने से स्थानीय यातायात में दिक्कत हो रही है। सभी टैक्सी व जीप यूनियन को यात्रियों व सवारियों से निर्धारित दरों से किराया वसूलने को कहा गया है। अगर, अधिक किराया लिया जा रहा है, तो संबंधित टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे व्यवस्था बनाए।  देवानंद शर्मा, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ

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