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तराई के जलाशयों में 35 प्रजाति के प्रवासी पक्षी रिकार्ड
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बौर जलाशय में परिंदों की गणना करते वनकर्मी।
- फोटो : RUDRAPUR
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जलाशय प्रवासी मेहमान पक्षियों के लिए पहली पसंद बन रहे हैं। कॉर्बेट फाउंडेशन और वन विभाग की संयुक्त गणना में इस बार 35 प्रजाति के प्रवासी पक्षी रिकार्ड किए गए हैं।
इसमें कॉमन कूट, रेड क्रस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, गेड वॉल और टफटेड पोचार्ड समेत कई प्रजाति के पक्षी शामिल हैं। इससे वन विभाग के साथ ही पक्षी प्रेमी भी उत्साहित हैं।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हरिपुरा, बौर, तुमडिया डैम में हर साल अक्तूबर में हजारों की तादात में प्रवासी पक्षी आते हैं। सीमित भौगोलिक क्षेत्र में पक्षियों की विविधता के दृष्टिगत यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए खासा लोकप्रिय माना जाता है। देश और दुनिया के सैकड़ों लोग पक्षी अवलोकन के लिए जलाशयों में आते हैं।
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पक्षी की सुरक्षा के लिए पहली बार वन विभाग ने ड्रोन से गश्त की है। इसके साथ ही पक्षियों की प्रजातियों का पता लगाने के लिए 23 और 24 जनवरी को कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ मिलकर गणना की गई। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि गणना के दौरान 35 प्रजातियों के पक्षी पाए गए हैं। इन प्रजातियों को वन विभाग के रिकार्ड में रजिस्टर्ड किया गया है।
उन्होंने बताया हर साल यहां नए पक्षी प्रवास पर आते हैं। बताया कि पक्षियों की गणना के लिए 19 कर्मचारियों को लगाया गया था। विश्व स्तर पर कम संख्या वाले एशियन वुलिनेक, लेसर एजुटेंट, सरस क्रेन, ओरियंटल डाटर, पेंटेड स्ट्राक, ब्लैक नेक्ड स्ट्राक की भी जलाशयों में दिखे हैं।
तीन जलाशयों में नहीं मिले घड़ियाल और मगरमच्छ
रुद्रपुर। तराई के जलाशयों में पहली बार घड़ियाल और मगरमच्छ की गणना की गई। खटीमा और सितारगंज को छोड़कर बौर, हरीपुरा, तुमड़िया डैम में इनकी मौजूदगी नहीं मिली। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया हरिपुरा, बौर व तुमड़िया जलाशय में यह गणना की गई थी। लेकिन तीनों जलाशयों में इनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।
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इसमें कॉमन कूट, रेड क्रस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, गेड वॉल और टफटेड पोचार्ड समेत कई प्रजाति के पक्षी शामिल हैं। इससे वन विभाग के साथ ही पक्षी प्रेमी भी उत्साहित हैं।
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग के हरिपुरा, बौर, तुमडिया डैम में हर साल अक्तूबर में हजारों की तादात में प्रवासी पक्षी आते हैं। सीमित भौगोलिक क्षेत्र में पक्षियों की विविधता के दृष्टिगत यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए खासा लोकप्रिय माना जाता है। देश और दुनिया के सैकड़ों लोग पक्षी अवलोकन के लिए जलाशयों में आते हैं।
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पक्षी की सुरक्षा के लिए पहली बार वन विभाग ने ड्रोन से गश्त की है। इसके साथ ही पक्षियों की प्रजातियों का पता लगाने के लिए 23 और 24 जनवरी को कॉर्बेट फाउंडेशन के साथ मिलकर गणना की गई। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया कि गणना के दौरान 35 प्रजातियों के पक्षी पाए गए हैं। इन प्रजातियों को वन विभाग के रिकार्ड में रजिस्टर्ड किया गया है।
उन्होंने बताया हर साल यहां नए पक्षी प्रवास पर आते हैं। बताया कि पक्षियों की गणना के लिए 19 कर्मचारियों को लगाया गया था। विश्व स्तर पर कम संख्या वाले एशियन वुलिनेक, लेसर एजुटेंट, सरस क्रेन, ओरियंटल डाटर, पेंटेड स्ट्राक, ब्लैक नेक्ड स्ट्राक की भी जलाशयों में दिखे हैं।
तीन जलाशयों में नहीं मिले घड़ियाल और मगरमच्छ
रुद्रपुर। तराई के जलाशयों में पहली बार घड़ियाल और मगरमच्छ की गणना की गई। खटीमा और सितारगंज को छोड़कर बौर, हरीपुरा, तुमड़िया डैम में इनकी मौजूदगी नहीं मिली। एसडीओ यूसी तिवारी ने बताया हरिपुरा, बौर व तुमड़िया जलाशय में यह गणना की गई थी। लेकिन तीनों जलाशयों में इनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।