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पहाड़ी मंडुआ व मादिरा की गहाई आसान करेगा मिलेट थ्रेशर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 12:57 AM IST
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Agriculture
पंतनगर मेले में मडुवा व मादिरा की गहाई को इजाद किया गया थ्रेशर। - फोटो : RUDRAPUR
पंतनगर विवि परिसर में लगने वाले किसान मेले वीआईपी हस्तियों से उद्घाटन करवाने की परंपरा अब पीछे हो गई है और किसानों से मेले का शुभारंभ कराकर नई परंपरा मजबूत हो रही है। मंगलवार से शुरू हुए 107वें किसान मेले का उद्घाटन अल्मोड़ा के प्रगतिशील किसान हीरा सिंह बिष्ट से करवाकर प्रतीत होता है, कि किसान मेला अपने मूल उद्देश्य पर लौट रहा है।
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मौजूदा कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने अपने कार्यकाल के पहले मेले से ही किसानों से मेले का शुभारंभ कराने की पहल की थी। उन्होंने सबसे पहले 105वें किसान मेले का उद्घाटन एवं समापन प्रगतिशील किसान पद्मश्री भारत भूषण त्यागी एवं पद्मश्री कंवल सिंह चौहान से करवाने के बाद 106वें किसान मेले का उद्घाटन प्रगतिशील महिला कृषक रेखा भंडारी एवं समापन कृषक नरेंद्र सिंह मेहरा से कराया था।
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मंगलवार को कुलपति ने किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा भी की, कि अब पंतनगर में आयोजित होने वाले किसान मेलों का उद्घाटन एवं समापन किसान ही करेंगे। चूंकि मेला किसानों के लिए होता है, तो मुख्य अतिथि भी किसी किसान को ही होना चाहिए। संवाद
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मडुआ और मादिरा की गहाई आसान करेगा मिलेट थ्रेशर
पंतनगर। किसान मेले के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के स्टाल पर प्रदर्शित विवेक मिलेट थ्रेशर और पर्लर के लिए पर्वतीय किसानों का हुजूम उमड़ रहा है। इसके उपयोग से पारंपरिक गहाई की तुलना में समय व श्रम की लागत काफी कम हो गई है।
उत्तराखंड में मडुआ की खेती लगभग सवा लाख हेक्टेयर, वहीं मादिरा लगभग 65 हजार हेक्टेयर में की जाती है। एक ओर पोषक तत्वों से भरपूर यह फसलें हर तरह की जलवायु में आसानी से उगाई जाती हैं, वहीं दूसरी ओर इनके दाने, छिलकों में बहुत दबे होने के कारण दोनों की गहाई में श्रम व समय अधिक लगता है। किसानों की इस परेशानी को देखते हुए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा की ओर से खास तरह का थ्रेशर विकसित किया गया है।
इस थ्रेशर की लंबाई एक हजार मिमी और चैड़ाई 590 मिमी है। इसका वजन 45 किग्रा है। इसकी प्रति घंटा थ्रेशिंग क्षमता मडुवे के लिए 40-60 किग्रा और मादिरा में 60-80 किग्रा है, जबकि पर्लिग क्षमता 60-80 किग्रा है। इसकी अनुमानित कीमत इंजन सहित 31 हजार रुपये है।
इस थ्रेशर में ऊर्जा की खपत अन्य थ्रेशर के मुकाबले आधी पाई गई है जबकि इसमें थ्रेशिंग अधिक तेजी से होती है। यह मजदूरों की आवश्यकता को भी कम करता है। इस मशीन को नमी से बचाने की जरूरत होती है। साथ ही मशीन में लगी रबर की पंखुड़ियों को प्रत्येक 500 कार्य घंटों के बाद बदलने की जरूरत पड़ती है।
जलवायु आधारित स्मार्ट खेती से बहुरेंगे किसानों के दिन
पंतनगर। विवि के विद्यार्थियों ने खेती का कायाकल्प करने के लिए स्मार्ट खेती के रूप में नया संदेश दिया है। गांधी मैदान में लगे किसान मेले में कृषि महाविद्यालय के स्टॉल पर स्मार्ट खेती, नई तकनीकों का समावेश और मोटे अनाज के उत्पादों की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक सुझाते हुए खेती की लागत कम करने एवं आय बढ़ाने के मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं।
किसान इन मॉडल के माध्यम से जानकारी लेने में काफी रुचि दिखा रहे हैं। तकनीकों की जानकारी देते हुए एमएससी प्रथम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों गगनदीप, रूपल अधिकारी, थिपेश, स्वप्निल आदि ने बताया कि खाद, पानी और अन्य संसाधनों का वांछित उपयोग करने एवं नई तकनीकों के उपयोग से लागत कम करने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है।
वहीं, किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। इस माडल के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्रों में चीड़, देवदार आदि के पेड़ लगाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। इससे निचले इलाके में मोटे अनाज जैसे मडुआ, रागी, मादिरा, लेमन आदि उत्पादित कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
इस मॉडल में अगले दो दिन के मौसम की सटीक जानकारी, ड्रिप इरीगेशन से फल-फूल व सब्जियों की खेती सहित पशु, मुर्गी-बत्तख व मत्स्य पालन के साथ सोलर ऊर्जा उत्पादन आदि इंटीग्रेटेड फार्मिंग का विकल्प सुझाया गया है। विद्यार्थियों ने कहा कि स्मार्ट खेती एक नया विषय है, जिसके माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय खेती को ज्यादा फायदे वाली बनाया जा सकता है। संवाद
छात्र ने बनाई इलेक्ट्रिक साइकिल
पंतनगर। हुनर संसाधनों का मोहताज नहीं होता, इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है, सिक्स सिग्मा रुद्रपुर के छात्र गगनदीप ने। गगन ने पुरानी साइकिल को मोडिफाई कर इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जिसकी लागत मात्र 17 हजार रुपये आई है। मेलार्थियों के आकर्षण का केंद्र बनी गगन की इलेक्ट्रिक साइकिल का ट्रायल लेने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही।

गगन ने कहा कि बाइक की तरह चाबी से खुलने वाली इस साइकिल में स्पीडोमीटर एवं एक्सीलरेटर का प्रयोग किया गया है, जिससे इसकी गति का बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें 24 वोल्ट, 250 वाट ब्रेसलेस पीसी मोटर सहित बीएमएस के साथ 24 वोल्ट लीथियम आयन बैटरी का प्रयोग किया गया है। इसका चार्जिंग टाइम तीन घंटे व इसकी अधिकतम स्पीड 30 किमी प्रति घंटा है। फुल चार्ज होने के बाद यह साइकिल समतल सड़क पर 35 किमी तक का सफर तय करती है। संवाद
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