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रास्ते टूटे तो दिनचर्या भी हुई प्रभावित
Rudraprayag
Updated Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
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रुद्रप्रयाग। मुख्यालय से सटा माई की मड़ी गांव जो 15 जून तक पूरी तरह केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ था। आज अलग-थलग पड़ा हुआ है। इसका कारण आपदा के बाद मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ के कारण गांव को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया है। जिससे ग्रामीणाें को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लगभग साढ़े तीन किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। पुल बहने के कारण ग्रामीणाें की दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है। शुक्रवार को मैं माई की मड़ी गांव में रुद्रप्रयाग - जवाड़ी बाईपास मार्ग से होते हुए वन विभाग कार्यालय पहुंचा। यहां से मुझे पहाड़ी से नीचे उतरना था। इस दौरान मेरी मुलाकात इसी रास्ते से ऊपर आ रहे सोहन सिंह, मुकेश व महेंद्र से हुई। उन्हाेंने मुझे बताया कि पैदल रास्ता कई जगहों पर खराब हो गया है। रास्ते टूटने से फिसलने का खतरा बना हुआ है, इसलिए झाड़ियाें को पकड़कर आवाजाही हो रही है। हिम्मत करके मैने नीचे उतरने का फैसला किया। थोड़ी दूरी तय करने के बाद मुझे एक जगह में कुछ महिलाएं मिली। जो रुद्रप्रयाग नगर में दूध बेचकर वापस लौट रही हैं। पुल बहने के कारण उन्हें हर दिन लगभग छह किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। जिससे उनकी पूरी दिनचर्या प्रभावित हो गई है। इसके बाद आगे बढ़ने पर मुझे मेरा परिचित रविंद्र कप्रवाण मिला। रविंद्र के चेहरे पर चिंता देख मैने कारण पूछा तो उसने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है। गुरुवार को प्रसव पीड़ा होने उसे टूटे रास्तों से बमुश्किल अस्पताल पहुंचाया गया। उसने बताया कि पुल बहने से गांव बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है। गांव में राशन और पेयजल का संकट होने लगा है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगाें को अस्पताल तक पहुंचाने में हो रही है।
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रुद्रप्रयाग। मुख्यालय से सटा माई की मड़ी गांव जो 15 जून तक पूरी तरह केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ था। आज अलग-थलग पड़ा हुआ है। इसका कारण आपदा के बाद मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ के कारण गांव को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया है। जिससे ग्रामीणाें को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लगभग साढ़े तीन किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। पुल बहने के कारण ग्रामीणाें की दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है। शुक्रवार को मैं माई की मड़ी गांव में रुद्रप्रयाग - जवाड़ी बाईपास मार्ग से होते हुए वन विभाग कार्यालय पहुंचा। यहां से मुझे पहाड़ी से नीचे उतरना था। इस दौरान मेरी मुलाकात इसी रास्ते से ऊपर आ रहे सोहन सिंह, मुकेश व महेंद्र से हुई। उन्हाेंने मुझे बताया कि पैदल रास्ता कई जगहों पर खराब हो गया है। रास्ते टूटने से फिसलने का खतरा बना हुआ है, इसलिए झाड़ियाें को पकड़कर आवाजाही हो रही है। हिम्मत करके मैने नीचे उतरने का फैसला किया। थोड़ी दूरी तय करने के बाद मुझे एक जगह में कुछ महिलाएं मिली। जो रुद्रप्रयाग नगर में दूध बेचकर वापस लौट रही हैं। पुल बहने के कारण उन्हें हर दिन लगभग छह किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। जिससे उनकी पूरी दिनचर्या प्रभावित हो गई है। इसके बाद आगे बढ़ने पर मुझे मेरा परिचित रविंद्र कप्रवाण मिला। रविंद्र के चेहरे पर चिंता देख मैने कारण पूछा तो उसने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है। गुरुवार को प्रसव पीड़ा होने उसे टूटे रास्तों से बमुश्किल अस्पताल पहुंचाया गया। उसने बताया कि पुल बहने से गांव बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है। गांव में राशन और पेयजल का संकट होने लगा है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगाें को अस्पताल तक पहुंचाने में हो रही है।