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अच्छी पैदावार के लिए गेहूं में करें उचित प्रबंधन
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पंतनगर। वैज्ञानिक विधि से खेती कर कम समय, कम मेहनत और कम लागत से गेहूं की ज्यादा उपज मिल सकती है।
पंतनगर विवि में सस्य विज्ञान विभाग के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि यह बारिश गेहूं की फसल के लिए उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि जरूरत होने पर सिंचाई करें। अगर मौसम तेज हवाओं वाला हो तो सिंचाई को कुछ दिन रोक लेना चाहिए अन्यथा फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
जलभराव ना हो इसलिए खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। सस्य विज्ञान के सह प्राध्यापक डॉ. अमित केसरवानी ने बताया कि दिसंबर की बुवाई वाले गेहूं के खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ, जंगली पालक, हिरनखुरी, प्याजी, चटरी और मटरी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
गेहूं को इनसे बचाने के कारफेन्ट्राजोन दवा का छिड़काव करें। गुल्ली डंडा खरपतवार को खत्म करने के लिए फिनोक्साप्रोप का इस्तेमाल करें। यह रसायन बुवाई के 30-35 दिन बाद दिए जाते हैं।
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पंतनगर विवि में सस्य विज्ञान विभाग के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि यह बारिश गेहूं की फसल के लिए उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि जरूरत होने पर सिंचाई करें। अगर मौसम तेज हवाओं वाला हो तो सिंचाई को कुछ दिन रोक लेना चाहिए अन्यथा फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
जलभराव ना हो इसलिए खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। सस्य विज्ञान के सह प्राध्यापक डॉ. अमित केसरवानी ने बताया कि दिसंबर की बुवाई वाले गेहूं के खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ, जंगली पालक, हिरनखुरी, प्याजी, चटरी और मटरी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
गेहूं को इनसे बचाने के कारफेन्ट्राजोन दवा का छिड़काव करें। गुल्ली डंडा खरपतवार को खत्म करने के लिए फिनोक्साप्रोप का इस्तेमाल करें। यह रसायन बुवाई के 30-35 दिन बाद दिए जाते हैं।
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