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छोटा केदार काशी-विश्वनाथ मंदिर झेल रहा अनदेशी का दंश
Updated Sun, 11 Nov 2018 09:41 PM IST
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गुप्तकाशी। केदारनाथ यात्रा, काशी-विश्वनाथ मंदिर के बिना अधूरी है। वाराणसी व उत्तरकाशी के बाद देश की तीसरी काशी गुप्तकाशी में भगवान शिव के दर्शन और गुप्त दान का विशेष महत्व है। यह स्थान बाबा केदार की यात्रा से प्राचीन काल से जुड़ा है। इसलिए इसे छोटा केदार भी कहा जाता है, लेकिन यह क्षेत्र अनदेशी का दंश झेल रहा है। मंदिर को तीर्थाटन और सुविधाओं से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर जिला मुख्यालय से 41 किमी दूरी पर स्थित गुप्तकाशी केदारघाटी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र हैं। यहां भगवान काशी-विश्वनाथ का प्राचीन मंदिर है। केदारनाथ धाम सामने बसा यह मंदिर अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। साथ ही यहां मर्णिकर्णिका जलकुंड है, जिसमें गंगा, यमुना की जलधाराएं वर्षभर बहती रहती हैं। बाबा केदार के दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालु इन जलधाराओं के पवित्र जल को अपने साथ जरूर ले जाते हैं। बीते वर्ष यहां मंदिर परिसर के निकट प्राचीन जलकुंड भी मिला है। बाबा केदार से इतना निकट संबंध होने के बावजूद शासन, प्रशासन और बीकेटीसी इस धार्मिक स्थल के प्रति उदासीन बने हुए हैं। बीते वर्षों में आए भूकंप से विश्वनाथ मंदिर में कई जगहों पर लगी शिलाएं अपना स्थान छोड़ चुकी हैं। मर्णिकर्णिका कुंड और मंदिर पहुंच मार्ग की हालत भी खराब है, लेकिन यहां की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वरिष्ठ नागरिक वचन सिंह पंवार, ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल आदि का कहना है कि 18 वर्ष में सरकारें गुप्तकाशी की सुध नहीं ले पाई हैं। जिस तरह से केदारनाथ धाम को संवारा जा रहा है। उसी की तर्ज पर यहां पर भी महत्वपूर्ण कार्य किए जाए, जिससे यहां अधिक से अधिक श्रद्धालु पहुंच सके।
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यह है मान्यता --
महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव की खोज में यहां पहुंचे थे, लेकिन भगवान, पांडवों को देखते ही यहां पर छुप गए थे। यहां पर भगवान शिव के दर्शन और गुप्त दान का विशेष महत्व है। बताया जाता है कि चार सौ वर्ष पूर्व जब, केदारनाथ धाम बर्फ में ढका था, तब, गुप्तकाशी में ही बाबा के दर्शन होते थे।
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गुप्तकाशी में स्थित काशी-विश्वनाथ मंदिर और पुराने कोठा के संरक्षण सहित यहां पर श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुख-सुविधाओं को लेकर योजना तैयार की गई है। जल्द ही इसके आधार पर कार्य शुरू किए जाएंगे।
- बीडी सिंह, सीईओ श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति
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सेमवाल/विनय
जारी --
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रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर जिला मुख्यालय से 41 किमी दूरी पर स्थित गुप्तकाशी केदारघाटी का प्रमुख व्यापारिक केंद्र हैं। यहां भगवान काशी-विश्वनाथ का प्राचीन मंदिर है। केदारनाथ धाम सामने बसा यह मंदिर अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। साथ ही यहां मर्णिकर्णिका जलकुंड है, जिसमें गंगा, यमुना की जलधाराएं वर्षभर बहती रहती हैं। बाबा केदार के दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालु इन जलधाराओं के पवित्र जल को अपने साथ जरूर ले जाते हैं। बीते वर्ष यहां मंदिर परिसर के निकट प्राचीन जलकुंड भी मिला है। बाबा केदार से इतना निकट संबंध होने के बावजूद शासन, प्रशासन और बीकेटीसी इस धार्मिक स्थल के प्रति उदासीन बने हुए हैं। बीते वर्षों में आए भूकंप से विश्वनाथ मंदिर में कई जगहों पर लगी शिलाएं अपना स्थान छोड़ चुकी हैं। मर्णिकर्णिका कुंड और मंदिर पहुंच मार्ग की हालत भी खराब है, लेकिन यहां की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वरिष्ठ नागरिक वचन सिंह पंवार, ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल आदि का कहना है कि 18 वर्ष में सरकारें गुप्तकाशी की सुध नहीं ले पाई हैं। जिस तरह से केदारनाथ धाम को संवारा जा रहा है। उसी की तर्ज पर यहां पर भी महत्वपूर्ण कार्य किए जाए, जिससे यहां अधिक से अधिक श्रद्धालु पहुंच सके।
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यह है मान्यता --
महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव की खोज में यहां पहुंचे थे, लेकिन भगवान, पांडवों को देखते ही यहां पर छुप गए थे। यहां पर भगवान शिव के दर्शन और गुप्त दान का विशेष महत्व है। बताया जाता है कि चार सौ वर्ष पूर्व जब, केदारनाथ धाम बर्फ में ढका था, तब, गुप्तकाशी में ही बाबा के दर्शन होते थे।
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गुप्तकाशी में स्थित काशी-विश्वनाथ मंदिर और पुराने कोठा के संरक्षण सहित यहां पर श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुख-सुविधाओं को लेकर योजना तैयार की गई है। जल्द ही इसके आधार पर कार्य शुरू किए जाएंगे।
- बीडी सिंह, सीईओ श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति
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सेमवाल/विनय
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