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ऑलवेदर रोड परियोजना का मलबा ग्रामीणों के लिए बना मुसीबत
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रुद्रप्रयाग। गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर नारायणकोटी में बनाया गया डंपिंग जोन ग्रामीणों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है। मलबे से पानी का प्राकृतिक स्रोत भी दब चुका है। साथ ही गोशाला भी क्षतिग्रस्त हुई है। बरसात में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों ने डीएम व एनएच के अधिशासी अभियंता से मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत निर्माणाधीन हाईवे के मलबे को डंप करने के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा नारायणकोटी के समीप दो डंपिंग जोन बनाए गए हैं, लेकिन डंपिंग यार्ड में सुरक्षा दीवार नहीं होने से मलबा काश्तकारों के खेतों में जा रहा है। मलबे से पानी का प्राकृतिक स्रोत भी दब चुका है। साथ ही गोशाला को क्षति पहुंची है। पानी के स्टोर के लिए बना हौज भी मलबे से पटा पड़ा है। कालीमठ पैदल मार्ग भी जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में स्थानीय लोग जानहाथ पर रखकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। पूर्व ग्राम प्रधान शिवराज सिंह राणा का कहना है, कि डंपिंग जोन के मलबे से ग्रामीणों की खेती व जमीन दब गई है। बताया कि बीते फरवरी माह में फाटा में आयोजित जनता दरबार में जिलाधिकारी व विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक न तो मुआवजा मिला और न अन्य कार्रवाई हुई है। काश्तकार सूरज पुजारी, शशि गोस्वामी, गजपाल राणाने कहा कि समस्या का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया तो बरसात में जानमाल के नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता है। इधर, एनएच के ईई जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। एई व जेई को मौके का निरीक्षण करने को कहा गया है। खेतों को मलबे से नुकसान नहीं हो, इसका पूरा प्रबंध किया जाएगा। साथ ही प्रभावितों के मुआवजे की कार्रवाई भी होगी।
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ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत निर्माणाधीन हाईवे के मलबे को डंप करने के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा नारायणकोटी के समीप दो डंपिंग जोन बनाए गए हैं, लेकिन डंपिंग यार्ड में सुरक्षा दीवार नहीं होने से मलबा काश्तकारों के खेतों में जा रहा है। मलबे से पानी का प्राकृतिक स्रोत भी दब चुका है। साथ ही गोशाला को क्षति पहुंची है। पानी के स्टोर के लिए बना हौज भी मलबे से पटा पड़ा है। कालीमठ पैदल मार्ग भी जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में स्थानीय लोग जानहाथ पर रखकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। पूर्व ग्राम प्रधान शिवराज सिंह राणा का कहना है, कि डंपिंग जोन के मलबे से ग्रामीणों की खेती व जमीन दब गई है। बताया कि बीते फरवरी माह में फाटा में आयोजित जनता दरबार में जिलाधिकारी व विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक न तो मुआवजा मिला और न अन्य कार्रवाई हुई है। काश्तकार सूरज पुजारी, शशि गोस्वामी, गजपाल राणाने कहा कि समस्या का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया तो बरसात में जानमाल के नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता है। इधर, एनएच के ईई जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। एई व जेई को मौके का निरीक्षण करने को कहा गया है। खेतों को मलबे से नुकसान नहीं हो, इसका पूरा प्रबंध किया जाएगा। साथ ही प्रभावितों के मुआवजे की कार्रवाई भी होगी।
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