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बीमार को कुर्सी में बिठाकर चार किमी पैदल चले परिजन
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रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि ब्लाक के दूरस्थ धांधड़ गांव में एक महिला की अचानक तबियत खराब हो गई। गांव में सड़क न होने पर बीमार को इलाज के लिए कुर्सी पर बिठाकर चार किमी पैदल चलकर रतूड़ा गांव पहुंचाया गया और यहां वाहन से जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया। अब उसकी हालत में सुधार है।
बृहस्पतिवार को धांधड गांव की जानकी देवी को बुखार और बदन दर्द होने लगा। परिजनों ने घरेलू उपचार भी किया गया, लेकिन तबियत ठीक नहीं हुई। ऐसे में महिला को अस्पताल ले जाने लगे तो बूंदाबांदी होने लगी। गांव तक सड़क न होने पर परिजनों ने महिला को कुर्सी पर बिठाकर दुर्गम रास्ते से चार किमी पैदल चलकर रतूड़ा में ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे तक पहुंचाया गया। यहां से उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया। ग्राम प्रधान मंजू देवी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी उनकी ग्राम पंचायत तक सड़क से नहीं जुड़ पाई है। गांव को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए रतूड़ा-पोखरी-भुनका और लाटू देवता-भुनका मोटर मार्ग वर्षों पूर्व स्वीकृत हैं, लेकिन आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया है। इस कारण ग्रामीणों को 4 से 5 किमी पैदल नापना पड़ रहा है। इस समस्या के चलते कुछ वर्षों पूर्व एक गर्भवती महिला व वृद्ध को उपचार के लिए अस्पताल लाते समय रास्ते में ही मौत हो गई थी।
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बृहस्पतिवार को धांधड गांव की जानकी देवी को बुखार और बदन दर्द होने लगा। परिजनों ने घरेलू उपचार भी किया गया, लेकिन तबियत ठीक नहीं हुई। ऐसे में महिला को अस्पताल ले जाने लगे तो बूंदाबांदी होने लगी। गांव तक सड़क न होने पर परिजनों ने महिला को कुर्सी पर बिठाकर दुर्गम रास्ते से चार किमी पैदल चलकर रतूड़ा में ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे तक पहुंचाया गया। यहां से उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया। ग्राम प्रधान मंजू देवी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी उनकी ग्राम पंचायत तक सड़क से नहीं जुड़ पाई है। गांव को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए रतूड़ा-पोखरी-भुनका और लाटू देवता-भुनका मोटर मार्ग वर्षों पूर्व स्वीकृत हैं, लेकिन आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया है। इस कारण ग्रामीणों को 4 से 5 किमी पैदल नापना पड़ रहा है। इस समस्या के चलते कुछ वर्षों पूर्व एक गर्भवती महिला व वृद्ध को उपचार के लिए अस्पताल लाते समय रास्ते में ही मौत हो गई थी।
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