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सैनिक स्कूल स्वीकृति पर दिखी होड, निर्माण करना भूली सरकारें
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विनय बहुगुणा
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड देशभर का एकलौता राज्य है, जहां दो सैनिक स्कूल हैं। एक घोड़ाखाल में तो दूसरा, रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली में स्वीकृत है। पांच वर्ष बाद भी यहां कैंपस का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके बावजूद विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा नहीं बन पाया है।
वर्ष 2014 में जनपद में सैनिक स्कूल की स्वीकृति मिली थी। तब, कांग्रेस और भाजपा में इसका श्रेय लेने की होड़ मची थी। पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूल के निर्माण को लेकर सरकारें गंभीर नहीं दिखी। तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने जखोली ब्लॉक के थाती-बड़मा में भूमि चिह्नित की थी। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपनी सैकड़ों नाली कृषि भूमि बिना शर्त स्कूल के लिए दान दे दी। शासन स्तर पर 11 करोड़ रुपये स्वीकृत कर निर्माण की जिम्मेदारी यूपी निर्माण निगम को सौंपी गई। कार्यदायी संस्था ने अक्तूबर 2015 में कार्य शुरू करते हुए लगभग एक वर्ष में कार्यस्थल तक उबड़-खाबड़ एप्रोच मार्ग, कैंपस निर्माण के लिए भूमि का समतलीकरण, एक तरफा चार दीवारी कर धनराशि खर्च कर दी। उसके बाद 10 करोड़ का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेज दिया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। बल्कि पूर्व में स्वीकृत राशि से हुए कार्य की जांच कराई गई, जिसमें निर्माण कार्य मानकों के तहत नहीं पाए गए। इसके बाद भी सैनिक स्कूल निर्माण को लेकर प्रदेश सरकारें ठोस निर्णय नहीं ले पाई। बड़मा विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण रावत का कहना है कि थाती-बड़मा में सैनिक स्कूल निर्माण के नाम पर प्रदेश सरकारें जनता से छलावा करती आ रही हैं। जिससे लोगों में संशय बना है।
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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड देशभर का एकलौता राज्य है, जहां दो सैनिक स्कूल हैं। एक घोड़ाखाल में तो दूसरा, रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली में स्वीकृत है। पांच वर्ष बाद भी यहां कैंपस का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके बावजूद विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा नहीं बन पाया है।
वर्ष 2014 में जनपद में सैनिक स्कूल की स्वीकृति मिली थी। तब, कांग्रेस और भाजपा में इसका श्रेय लेने की होड़ मची थी। पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूल के निर्माण को लेकर सरकारें गंभीर नहीं दिखी। तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने जखोली ब्लॉक के थाती-बड़मा में भूमि चिह्नित की थी। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी अपनी सैकड़ों नाली कृषि भूमि बिना शर्त स्कूल के लिए दान दे दी। शासन स्तर पर 11 करोड़ रुपये स्वीकृत कर निर्माण की जिम्मेदारी यूपी निर्माण निगम को सौंपी गई। कार्यदायी संस्था ने अक्तूबर 2015 में कार्य शुरू करते हुए लगभग एक वर्ष में कार्यस्थल तक उबड़-खाबड़ एप्रोच मार्ग, कैंपस निर्माण के लिए भूमि का समतलीकरण, एक तरफा चार दीवारी कर धनराशि खर्च कर दी। उसके बाद 10 करोड़ का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेज दिया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। बल्कि पूर्व में स्वीकृत राशि से हुए कार्य की जांच कराई गई, जिसमें निर्माण कार्य मानकों के तहत नहीं पाए गए। इसके बाद भी सैनिक स्कूल निर्माण को लेकर प्रदेश सरकारें ठोस निर्णय नहीं ले पाई। बड़मा विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण रावत का कहना है कि थाती-बड़मा में सैनिक स्कूल निर्माण के नाम पर प्रदेश सरकारें जनता से छलावा करती आ रही हैं। जिससे लोगों में संशय बना है।
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