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बर्फबारी से जीवन अस्त-व्यस्त, 25 वर्षो का रिकार्ड टूटा
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रुद्रप्रयाग। लगातार बर्फबारी से प्रभावित गांवों में जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हो गया है। जिले में मंगलवार सुबह से शुरू हुई बर्फबारी ने वर्षों पुराने रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बुजुर्गों का कहना है कि वर्ष 1993 के बाद गांवों में इस तरह की बर्फबारी हुई है। मौसम की मार से पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बसे गांव भी बर्फ की चपेट में आ गए हैं।
ऊखीमठ, जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लाक के ऊंचाई वाले गांवों में मंगलवार सुबह छह बजे से शुरू हुई बर्फबारी बुधवार को भी रुक-रुककर जारी रही। इस दौरान अधिकांश गांवों में तीन से चार फीट तक बर्फ जम चुकी है, जिससे जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हो चुका है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। दिलमी गांव के सुरेशानंद सेमवाल, सारी गांव के ग्राम प्रधान घनश्याम लाल, उषाड़ा के महिपाल बजवाल और मक्कू के सतीश मैठाणी ने बताया कि ऊखीमठ ब्लाक के पेंज, करोखी, सारी, दिलमी, उषाड़ा, हुड्डू, सेमार, कांडा, मक्कूमठ, पाब-जगपुड़ा गांव में वर्ष 1993 के बाद इस वर्ष इतनी अधिक बर्फबारी हुई है। उधर, मद्महेश्वर घाटी के गौंडार और रांसी गांव में भी भारी बर्फ के कारण जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है। कालीमठ घाटी की सभी 10 ग्राम पंचायतें बर्फ की चपेट में आ चुकी हैं। इधर, अगस्त्यमुनि ब्लाक के भणज, बाड़व, किंनज्याणी, केड़ा, खाल्यू, चंद्रनगर, कोंथा आदि गांवों में डेढ़ से ढाई फीट तक बर्फबारी हो चुकी है। बच्छणस्यूं पट्टी के बणगांव, झुंडोली, धनपुर के पीड़ा, पाबौ, ग्वेफड और रानीगढ़ के कोदिमा, जसोली सहित अन्य गांवों में जमकर बर्फबारी हुई है। स्थानीय निवासी सुधीर राणा ने बताया कि पांच वर्ष के बाद क्यूंजा घाटी के गांवों में भारी बर्फबारी हो रही है। घिमतोली, चोपता, कनकचौरी, खड़पतिया में भी दो फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। दूसरी तरफ जखोली ब्लाक के पालाकुराली, धनकुराली, बजीरा, गोर्ती, जखोली, त्यूंखर, चिरबटिया सहित बांगर, लस्या, सिलगढ़ के ऊप्री गांवों में बर्फ गिर चुकी है। स्थानीय निवासी रामरतन पंवार, डॉ. गुलाब सिंह राणा, ललिता प्रसाद भट्ट, उमेद सिंह नेगी ने बताया कि बर्फबारी से गांवों में लोगों के दैनिक जीवनचर्या पर असर पड़ा है। मवेशियों के लिए चारा जुटाना सबसे मुश्किल हो रहा है। सरकारी पेयजल योजनाओं के पाइप बर्फ के कारण जम चुके हैं। प्राकृतिक स्रोतों के ऊपर भी बर्फ के ढेर लगे हैं। इन हालात में बर्फ को पिघलाकर पानी बनाकर उपयोग हो रहा है।
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ऊखीमठ, जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लाक के ऊंचाई वाले गांवों में मंगलवार सुबह छह बजे से शुरू हुई बर्फबारी बुधवार को भी रुक-रुककर जारी रही। इस दौरान अधिकांश गांवों में तीन से चार फीट तक बर्फ जम चुकी है, जिससे जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हो चुका है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। दिलमी गांव के सुरेशानंद सेमवाल, सारी गांव के ग्राम प्रधान घनश्याम लाल, उषाड़ा के महिपाल बजवाल और मक्कू के सतीश मैठाणी ने बताया कि ऊखीमठ ब्लाक के पेंज, करोखी, सारी, दिलमी, उषाड़ा, हुड्डू, सेमार, कांडा, मक्कूमठ, पाब-जगपुड़ा गांव में वर्ष 1993 के बाद इस वर्ष इतनी अधिक बर्फबारी हुई है। उधर, मद्महेश्वर घाटी के गौंडार और रांसी गांव में भी भारी बर्फ के कारण जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है। कालीमठ घाटी की सभी 10 ग्राम पंचायतें बर्फ की चपेट में आ चुकी हैं। इधर, अगस्त्यमुनि ब्लाक के भणज, बाड़व, किंनज्याणी, केड़ा, खाल्यू, चंद्रनगर, कोंथा आदि गांवों में डेढ़ से ढाई फीट तक बर्फबारी हो चुकी है। बच्छणस्यूं पट्टी के बणगांव, झुंडोली, धनपुर के पीड़ा, पाबौ, ग्वेफड और रानीगढ़ के कोदिमा, जसोली सहित अन्य गांवों में जमकर बर्फबारी हुई है। स्थानीय निवासी सुधीर राणा ने बताया कि पांच वर्ष के बाद क्यूंजा घाटी के गांवों में भारी बर्फबारी हो रही है। घिमतोली, चोपता, कनकचौरी, खड़पतिया में भी दो फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। दूसरी तरफ जखोली ब्लाक के पालाकुराली, धनकुराली, बजीरा, गोर्ती, जखोली, त्यूंखर, चिरबटिया सहित बांगर, लस्या, सिलगढ़ के ऊप्री गांवों में बर्फ गिर चुकी है। स्थानीय निवासी रामरतन पंवार, डॉ. गुलाब सिंह राणा, ललिता प्रसाद भट्ट, उमेद सिंह नेगी ने बताया कि बर्फबारी से गांवों में लोगों के दैनिक जीवनचर्या पर असर पड़ा है। मवेशियों के लिए चारा जुटाना सबसे मुश्किल हो रहा है। सरकारी पेयजल योजनाओं के पाइप बर्फ के कारण जम चुके हैं। प्राकृतिक स्रोतों के ऊपर भी बर्फ के ढेर लगे हैं। इन हालात में बर्फ को पिघलाकर पानी बनाकर उपयोग हो रहा है।
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