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मछली मोहल्ले से शुरू हुआ था रोडवेज का सफर
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जिस रोडवेज डिपो को हरिद्वार डिपो में विलय किया गया है कभी उसकी शुरुआत नगर के मछली मोहल्ले से हुई थी। वहां केवल एक बस स्टापेज हुआ करता था। इसके बाद बसें रुड़की नगर निगम पुल के पास रुकने लगी। 1960 में वर्तमान जगह पर सब स्टेशन बनाया गया। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और रुड़की के होते विस्तार को देखते हुए 1988 में इसे रोडवेज डिपो बनाकर यहां एआरएम कार्यालय स्थापित किया गया।
1960 से पहले रुड़की आबादी के हिसाब से बहुत छोटा शहर था। यहां सहारनपुर से मुख्य बाजार होते हुए हरिद्वार जाने के लिए नहर किनारे वाले रास्ते का इस्तेमाल होता था। तब मछली मोहल्ले में बस स्टापेज हुआ करता था। जबकि जहां वर्तमान में रोडवेज है, वहां विरान जंगल था। इसके बाद नगर निगम पुल के पास बस रुकने लगी। धीरे-धीरे शहर की आबादी बढ़ी और हरिद्वार जाने के लिए बाईपास बना तो वर्तमान जगह पर करीब 1960 में सब स्टेशन बनाया गया। तब सब स्टेशन में केवल 20 बसें हुआ करती थीं। तभी यहां पर रोडवेज का भवन भी बना दिया गया। 1988 में यात्रियों और बसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे रोडवेज डिपो का दर्जा दिया गया। तभी से यहां एआरएम कार्यालय भी स्थापित कर दिया गया। इसके बाद यहां पर बसों की संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई। वर्तमान में डिपो में 30 सरकारी और 14 अनुबंधित बसें चल रही हैं।
पीपीपी मोड पर होना था रोडवेज का विकास
रुड़की बस अड्डे का पीपीपी मोड पर विकास करने की योजना भी धरी रह गई। वर्ष 2020 में कुंभ मेलाधिकारी ने इसका प्रस्ताव तैयार कर रोडवेज को भेजा था। प्रस्ताव में पीपीपी मोड पर तैयार होने वाले बहुमंजिला बस अड्डे में शॉपिंग कांप्लेक्स भी खोला जाना था। इसके अलावा यहां ग्राउंड फ्लोर पर बसें खड़े करने, यात्रियों को ठहरने और शौचालय आदि की सुविधाएं देनी थीं। तब ये प्रस्ताव इसलिए दिया गया था कि रुड़की देवभूमि का प्रवेश द्वार है। कुंभ मेले और अन्य स्नान में आने वाले यात्री सबसे पहले रुड़की बस अड्डे पर ठहरते हैं। उनकी सुविधा के लिए रोडवेज बस अड्डे को पीपीपी मोड पर आईएसबीटी की तर्ज पर तैयार करना था। अब ये योजना भी धरी की धरी रह गई।
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रोडवेज को शिफ्ट करने की भी थी योजना
वर्तमान में जहां पर रोडवेज है यहां जगह कम होने के चलते अन्य डिपो की बसें अंदर आने में दिक्कत करती थीं। इसके अलावा हाईवे पर भी बसों के चलते भीड़ और जाम लगा रहता था। इसको देखते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम ने डिपो के पास जहां अब एसडीएम और तहसील आवास है वहां पर रोडवेज का विस्तार करने की योजना बनाई। इसके बाद इस रोडवेज को यहां से हटाकर किसी अन्य जगह शिफ्ट करने की योजना अमल में लाई गई। मुख्यालय से कई बार अधिकारियों ने रुड़की पहुंचकर मंगलौर के पास और सालियर के पास जमीन की तलाश की। कहीं पर जमीन फाइनल हो पाती इससे पहले ही रोडवेज का विलय करने का फैसला ले लिया गया।
...तो डिपो में नहीं आएगी वॉल्वो और एसी बसें
रुड़की में बड़ी संख्या में शैक्षिक संस्थान के साथ ही आईआईटी और सीबीआरआई जैसे संस्थान भी हैं। इस लिहाज से यहां स्थानीय लोग लगातार वाल्वो और एसी बस शुरू करने की मांग करते रहे। यात्रियों की मांग को देखते हुए अधिकारियों ने मुख्यालय में इसका प्रस्ताव भी बनाकर भेजा। हालांकि इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
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1960 से पहले रुड़की आबादी के हिसाब से बहुत छोटा शहर था। यहां सहारनपुर से मुख्य बाजार होते हुए हरिद्वार जाने के लिए नहर किनारे वाले रास्ते का इस्तेमाल होता था। तब मछली मोहल्ले में बस स्टापेज हुआ करता था। जबकि जहां वर्तमान में रोडवेज है, वहां विरान जंगल था। इसके बाद नगर निगम पुल के पास बस रुकने लगी। धीरे-धीरे शहर की आबादी बढ़ी और हरिद्वार जाने के लिए बाईपास बना तो वर्तमान जगह पर करीब 1960 में सब स्टेशन बनाया गया। तब सब स्टेशन में केवल 20 बसें हुआ करती थीं। तभी यहां पर रोडवेज का भवन भी बना दिया गया। 1988 में यात्रियों और बसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे रोडवेज डिपो का दर्जा दिया गया। तभी से यहां एआरएम कार्यालय भी स्थापित कर दिया गया। इसके बाद यहां पर बसों की संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई। वर्तमान में डिपो में 30 सरकारी और 14 अनुबंधित बसें चल रही हैं।
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पीपीपी मोड पर होना था रोडवेज का विकास
रुड़की बस अड्डे का पीपीपी मोड पर विकास करने की योजना भी धरी रह गई। वर्ष 2020 में कुंभ मेलाधिकारी ने इसका प्रस्ताव तैयार कर रोडवेज को भेजा था। प्रस्ताव में पीपीपी मोड पर तैयार होने वाले बहुमंजिला बस अड्डे में शॉपिंग कांप्लेक्स भी खोला जाना था। इसके अलावा यहां ग्राउंड फ्लोर पर बसें खड़े करने, यात्रियों को ठहरने और शौचालय आदि की सुविधाएं देनी थीं। तब ये प्रस्ताव इसलिए दिया गया था कि रुड़की देवभूमि का प्रवेश द्वार है। कुंभ मेले और अन्य स्नान में आने वाले यात्री सबसे पहले रुड़की बस अड्डे पर ठहरते हैं। उनकी सुविधा के लिए रोडवेज बस अड्डे को पीपीपी मोड पर आईएसबीटी की तर्ज पर तैयार करना था। अब ये योजना भी धरी की धरी रह गई।
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रोडवेज को शिफ्ट करने की भी थी योजना
वर्तमान में जहां पर रोडवेज है यहां जगह कम होने के चलते अन्य डिपो की बसें अंदर आने में दिक्कत करती थीं। इसके अलावा हाईवे पर भी बसों के चलते भीड़ और जाम लगा रहता था। इसको देखते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम ने डिपो के पास जहां अब एसडीएम और तहसील आवास है वहां पर रोडवेज का विस्तार करने की योजना बनाई। इसके बाद इस रोडवेज को यहां से हटाकर किसी अन्य जगह शिफ्ट करने की योजना अमल में लाई गई। मुख्यालय से कई बार अधिकारियों ने रुड़की पहुंचकर मंगलौर के पास और सालियर के पास जमीन की तलाश की। कहीं पर जमीन फाइनल हो पाती इससे पहले ही रोडवेज का विलय करने का फैसला ले लिया गया।
...तो डिपो में नहीं आएगी वॉल्वो और एसी बसें
रुड़की में बड़ी संख्या में शैक्षिक संस्थान के साथ ही आईआईटी और सीबीआरआई जैसे संस्थान भी हैं। इस लिहाज से यहां स्थानीय लोग लगातार वाल्वो और एसी बस शुरू करने की मांग करते रहे। यात्रियों की मांग को देखते हुए अधिकारियों ने मुख्यालय में इसका प्रस्ताव भी बनाकर भेजा। हालांकि इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया।