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पहले किया किनारा, अब दे रहे सहारा
अमर उजाला ब्यूरो भगवानपुर
Updated Mon, 23 Jan 2017 10:14 PM IST
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बसपा के चिह्न पर पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने मुनीर आलम ने सोमवार को पार्टी को अलविदा कह दिया। विधानसभा उपचुनाव में ममता से किनारा करने वाले मुनीर अब उन्हें ही सहारा देने के लिए फिर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। यह सपा से भी दो बार विधानसभा चुनाव लड़े चुके हैं।
खेलपुर निवासी मुनीर आलम राज्य गठन के बाद सपा से पहली बार इकबालपुर सीट से वर्ष 2002 में चुनाव लड़े थे। लेकिन, जीत नहीं पाए। उसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने फिर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। फिर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके अलावा वह जिला पंचायत सदस्य के चुनाव भी लड़े। लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी में उन्हें प्रदेश कमेटी का सदस्य बनाया। बसपा विधायक सुरेंद्र राकेश के निधन पर उनकी पत्नी ममता राकेश को उपचुनाव का टिकट देने से नाराज हुए मुनीर ने कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। उसके बाद वह भाजपा के राजपाल को उपचुनाव जिताने में जुटे। परंतु राजपाल भी हार गए। वर्ष 2016 में हुए जिला पंचायत सदस्य चुनाव में उन्हें पहली बार सिरचंदी सीट से बसपा के टिकट पर जीत मिली।
सोमवार को मुनीर आलम उसी परिवार की ममता राकेश को मजबूत करने के लिए कांग्रेस में शामिल हो गए जिनका उन्होंने उपचुनाव में खूब विरोध किया था। इस बाबत मुनीर आलम ने बताया कि राकेश परिवार से उनके मतभेद थे। लेकिन, ममता राकेश उस खून की नहीं है। इसलिए वह ममता के साथ आए हैं। उनके साथ बीते पंचायत चुनाव में बालेकी युसुफपुर से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े सुलेमान त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हुए।
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खेलपुर निवासी मुनीर आलम राज्य गठन के बाद सपा से पहली बार इकबालपुर सीट से वर्ष 2002 में चुनाव लड़े थे। लेकिन, जीत नहीं पाए। उसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने फिर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। फिर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके अलावा वह जिला पंचायत सदस्य के चुनाव भी लड़े। लेकिन सफल नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी में उन्हें प्रदेश कमेटी का सदस्य बनाया। बसपा विधायक सुरेंद्र राकेश के निधन पर उनकी पत्नी ममता राकेश को उपचुनाव का टिकट देने से नाराज हुए मुनीर ने कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। उसके बाद वह भाजपा के राजपाल को उपचुनाव जिताने में जुटे। परंतु राजपाल भी हार गए। वर्ष 2016 में हुए जिला पंचायत सदस्य चुनाव में उन्हें पहली बार सिरचंदी सीट से बसपा के टिकट पर जीत मिली।
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सोमवार को मुनीर आलम उसी परिवार की ममता राकेश को मजबूत करने के लिए कांग्रेस में शामिल हो गए जिनका उन्होंने उपचुनाव में खूब विरोध किया था। इस बाबत मुनीर आलम ने बताया कि राकेश परिवार से उनके मतभेद थे। लेकिन, ममता राकेश उस खून की नहीं है। इसलिए वह ममता के साथ आए हैं। उनके साथ बीते पंचायत चुनाव में बालेकी युसुफपुर से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े सुलेमान त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हुए।
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