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फर्जी नियुक्ति मामले में 19 कर्मचारियों पर लटकी तलवार
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रुड़की। जिला सहकारी बैंक में चार साल पहले हुई फर्जी नियुक्ति के मामले में शासन की ओर से कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद जहां 19 कर्मचारियों पर तलवार लटक गई है। वहीं, इस मामले में मंगलवार को जिला सहकारी बैंक के बोर्ड की अहम बैठक हुई। इस दौरान फर्जी नियुक्ति के बाबत उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर चर्चा की गई। इसमें सामने आया कि दो अधिकारियों की ओर से जांच रिपोर्ट में अलग-अलग तथ्य दिए गए हैं। ऐसे में बोर्ड ने प्रस्ताव पारित किया कि सहकारी समितियों के निबंधक को पत्र भेजकर निर्देश मांगा जाए कि इस जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि 2016 में जिला सहकारी बैंक रुड़की की ओर से वर्ग चार में 19 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। इसी दौरान नियुक्तियों की वैधता पर सवाल उठने लगे थे। कुछ माह पूर्व जिला सहकारी बैंक निदेशक सुनीता सिंह एवं मांगेराम सिरोही ने शासन में अलग-अलग शिकायत कर नियुक्तियों को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखंड एवं अपर निबंधक सहकारी समिति की ओर से दोनों शिकायती पत्रों पर अलग-अलग जांच की थी। मार्च में आई जांच रिपोर्ट में काफी अनियमितताएं सामने आई थीं। भर्ती प्रक्रिया में खेलकूद के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए थे। इस पर शासन की ओर से प्रबंध समिति को खेलकूद के फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन जिला सहकारी बैंक बोर्ड की ओर से कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अपर निबंधक सहकारी समितियां ईरा उप्रेती ने जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन व प्रबंध समिति को पत्र भेजकर संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी करने एवं उनकी सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए थे। बताया गया है कि प्रबंध समिति सभी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। इसे लेकर शासन ने जिला सहकारी बैंक के बोर्ड को भंग करने की चेतावनी तक दी थी। इसी मामले को लेकर मंगलवार को आनन फानन में जिला सहकारी बैंक रुड़की में प्रबंध समिति की बैठक हुई। चेयरमैन प्रदीप चौधरी ने बताया कि मामले में दो जांच हुई हैं। दोनों जांच रिपोर्ट अलग-अलग हैं। ऐसे में अब बोर्ड ने निर्णय लिया है कि निबंधक को पत्र भेजकर निर्देश मांगे जाएं कि किस जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाए। निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला सहकारी बैंक के वाइस चेयरमैन राजेंद्र सिंह, निदेशक सुशील राठी, सुरेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, सुशील कुमार, प्रह्लाद सिंह, देवेंद्र अग्रवाल, कपिल कांता एवं महाप्रबंधक सीके कमल आदि मौजूद रहे।
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गौरतलब है कि 2016 में जिला सहकारी बैंक रुड़की की ओर से वर्ग चार में 19 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। इसी दौरान नियुक्तियों की वैधता पर सवाल उठने लगे थे। कुछ माह पूर्व जिला सहकारी बैंक निदेशक सुनीता सिंह एवं मांगेराम सिरोही ने शासन में अलग-अलग शिकायत कर नियुक्तियों को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखंड एवं अपर निबंधक सहकारी समिति की ओर से दोनों शिकायती पत्रों पर अलग-अलग जांच की थी। मार्च में आई जांच रिपोर्ट में काफी अनियमितताएं सामने आई थीं। भर्ती प्रक्रिया में खेलकूद के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए थे। इस पर शासन की ओर से प्रबंध समिति को खेलकूद के फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन जिला सहकारी बैंक बोर्ड की ओर से कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अपर निबंधक सहकारी समितियां ईरा उप्रेती ने जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन व प्रबंध समिति को पत्र भेजकर संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी करने एवं उनकी सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए थे। बताया गया है कि प्रबंध समिति सभी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। इसे लेकर शासन ने जिला सहकारी बैंक के बोर्ड को भंग करने की चेतावनी तक दी थी। इसी मामले को लेकर मंगलवार को आनन फानन में जिला सहकारी बैंक रुड़की में प्रबंध समिति की बैठक हुई। चेयरमैन प्रदीप चौधरी ने बताया कि मामले में दो जांच हुई हैं। दोनों जांच रिपोर्ट अलग-अलग हैं। ऐसे में अब बोर्ड ने निर्णय लिया है कि निबंधक को पत्र भेजकर निर्देश मांगे जाएं कि किस जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाए। निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिला सहकारी बैंक के वाइस चेयरमैन राजेंद्र सिंह, निदेशक सुशील राठी, सुरेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, सुशील कुमार, प्रह्लाद सिंह, देवेंद्र अग्रवाल, कपिल कांता एवं महाप्रबंधक सीके कमल आदि मौजूद रहे।
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