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कोरोना काल में पढ़ाई तो रही याद, छात्र भूले व्यवहारिक ज्ञान
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लंबे समय तक ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद स्कूल पहुंचे छात्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शिक्षक अब भी बच्चों की बदली मनोदशा को समझने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बदलाव छात्रों के व्यवहार में देखने को मिला है। कोरोना महामारी के चलते बच्चे पढ़ाई भले ही करते रहे हों, लेकिन व्यवहारिक ज्ञान भूल चुके हैं। स्कूलों में शिक्षकों को पढ़ाई से पहले उनके अनुशासन पर ध्यान देना पड़ रहा है। इसके अलावा बच्चों की सुबह आठ से एक बजे तक स्कूल रुकने की आदत भी खत्म हो गई है।
कोरोना महामारी कमजोर पड़ने के बाद स्कूल खुले तो शुरू में बच्चों में स्कूल जाने को लेकर काफी उत्साह था। 15 से 20 दिन वे बेझिझक स्कूल पहुंचे। इसके बाद अब धीरे-धीरे बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। साथ ही बच्चों में बड़ा व्यवहारिक परिवर्तन आया है। करीब दो साल बाद स्कूल पहुंचे बच्चे अनुशासन भूल चुके थे। स्कूल लेट आना और स्कूल से जल्दी जाने की सोच से घिर चुके थे। शिक्षकों को भी यह महसूस हुआ कि बच्चों में एक्टिवनेस कम हो चुकी है। किसी भी काम को करने में वे ज्यादा समय ले रहे हैं। वहीं, स्कूल में ज्यादा समय तक रहना भी बरदाश्त नहीं हो रहा है। वे शिक्षकों से जल्दी छुट्टी करने की सिफारिशें करने लगे हैं। उनकी आपस में बातचीत की भाषा भी बदल गई है। ऐसे में स्कूल स्टाफ का सबसे पहला फोकस अनुशासन मेंटेन करना है। अब कुछ स्तर तक बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा है।
ऑनलाइन कक्षाओं के बाद ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने पर बच्चों में काफी बदलाव देखने को मिला है। बच्चे पढ़ाई पर पहले की तरह पूरा फोकस नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें चाहिए कि सभी विषय केवल एक से दो घंटे में खत्म हो जाएं। बच्चे स्कूल में अधिक समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत पड़ गई है जबकि स्कूल से अब फोन पर होमवर्क भेजना बंद कर दिया गया है। इसके बावजूद बच्चे चाहते हैं कि उनका अधिकतर काम ऑनलाइन भेजा जाए। वहीं, बच्चों को देर रात तक जागने की आदत पड़ गई है। इस वजह से हर दिन देर से स्कूल पहुंच रहे हैं। हालांकि, स्कूल स्टाफ को हिदायत दी गई है कि बच्चों की मनोदशा को समझते हुए ही उन्हें पढ़ाएं।
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-शान-ए-करीम सिद्दीकी, प्रधानाचार्य, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अकबरपुर ढाढेकी
बच्चे लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे हैं तो उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है। वे स्कूल का अनुशासन भूल चुके हैं। डेढ़ महीने में तीन से चार बार अभिभावक और स्कूल स्टाफ की बैठक हो चुकी है। इसमें अधिकतर अभिभावक शिकायत कर रहे हैं कि बच्चे उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। छोटी-छोटी बात पर अग्रेसिव हो रहे हैं। हर पांच से दस मिनट में फोन चेक करने की आदत हो गई है। साथ ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने की आदत भी हो गई है। ऐसे में स्कूल स्टाफ बच्चों को अनुशासन सिखा रहे हैं। अब धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार होने लगा है। मोबाइल की आदत अभिभावकों को ही छुड़ानी होगी। इसलिए स्कूल ने होमवर्क फोन पर भेजना बंद कर दिया है।
-सुकजिंदर कौर, शिक्षक, महावीर इंटरनेशनल स्कूल, सालियर
लंबी क्लास और सख्त नियमों से छात्र परेशान
विभिन्न स्कूलों के कक्षा आठ से 12वीं तक के बच्चों से बात की गई तो उनका मानना है कि व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है। वे खुश हैं कि ऑनलाइन कक्षाएं बंद हो गईं और अब ऑफलाइन पढ़ाई हो रही है। इससे वे परीक्षा की अच्छे से तैयारी कर पाएंगे। हालांकि, उनका मानना है कि स्कूल में कक्षाएं बहुत लंबी होने लगी हैं। यदि कम समय की कक्षाएं चलें तो बच्चे ज्यादा समझ सकते हैं। उनका ये भी मानना है कि स्कूलों में अब नियम ज्यादा सख्त बना दिए गए हैं जिससे परेशानी होती है। इसमें कक्षाओं में मास्क की बाध्यता के साथ ही मैदान में नहीं खेलना और एक-दूसरे से सटकर नहीं बैठना या बातें करने और सामान शेयर नहीं करने जैसी बाध्यता से उन्हें परेशानी है।
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कोरोना महामारी कमजोर पड़ने के बाद स्कूल खुले तो शुरू में बच्चों में स्कूल जाने को लेकर काफी उत्साह था। 15 से 20 दिन वे बेझिझक स्कूल पहुंचे। इसके बाद अब धीरे-धीरे बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। साथ ही बच्चों में बड़ा व्यवहारिक परिवर्तन आया है। करीब दो साल बाद स्कूल पहुंचे बच्चे अनुशासन भूल चुके थे। स्कूल लेट आना और स्कूल से जल्दी जाने की सोच से घिर चुके थे। शिक्षकों को भी यह महसूस हुआ कि बच्चों में एक्टिवनेस कम हो चुकी है। किसी भी काम को करने में वे ज्यादा समय ले रहे हैं। वहीं, स्कूल में ज्यादा समय तक रहना भी बरदाश्त नहीं हो रहा है। वे शिक्षकों से जल्दी छुट्टी करने की सिफारिशें करने लगे हैं। उनकी आपस में बातचीत की भाषा भी बदल गई है। ऐसे में स्कूल स्टाफ का सबसे पहला फोकस अनुशासन मेंटेन करना है। अब कुछ स्तर तक बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा है।
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ऑनलाइन कक्षाओं के बाद ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने पर बच्चों में काफी बदलाव देखने को मिला है। बच्चे पढ़ाई पर पहले की तरह पूरा फोकस नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें चाहिए कि सभी विषय केवल एक से दो घंटे में खत्म हो जाएं। बच्चे स्कूल में अधिक समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत पड़ गई है जबकि स्कूल से अब फोन पर होमवर्क भेजना बंद कर दिया गया है। इसके बावजूद बच्चे चाहते हैं कि उनका अधिकतर काम ऑनलाइन भेजा जाए। वहीं, बच्चों को देर रात तक जागने की आदत पड़ गई है। इस वजह से हर दिन देर से स्कूल पहुंच रहे हैं। हालांकि, स्कूल स्टाफ को हिदायत दी गई है कि बच्चों की मनोदशा को समझते हुए ही उन्हें पढ़ाएं।
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-शान-ए-करीम सिद्दीकी, प्रधानाचार्य, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अकबरपुर ढाढेकी
बच्चे लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे हैं तो उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है। वे स्कूल का अनुशासन भूल चुके हैं। डेढ़ महीने में तीन से चार बार अभिभावक और स्कूल स्टाफ की बैठक हो चुकी है। इसमें अधिकतर अभिभावक शिकायत कर रहे हैं कि बच्चे उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। छोटी-छोटी बात पर अग्रेसिव हो रहे हैं। हर पांच से दस मिनट में फोन चेक करने की आदत हो गई है। साथ ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने की आदत भी हो गई है। ऐसे में स्कूल स्टाफ बच्चों को अनुशासन सिखा रहे हैं। अब धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार होने लगा है। मोबाइल की आदत अभिभावकों को ही छुड़ानी होगी। इसलिए स्कूल ने होमवर्क फोन पर भेजना बंद कर दिया है।
-सुकजिंदर कौर, शिक्षक, महावीर इंटरनेशनल स्कूल, सालियर
लंबी क्लास और सख्त नियमों से छात्र परेशान
विभिन्न स्कूलों के कक्षा आठ से 12वीं तक के बच्चों से बात की गई तो उनका मानना है कि व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है। वे खुश हैं कि ऑनलाइन कक्षाएं बंद हो गईं और अब ऑफलाइन पढ़ाई हो रही है। इससे वे परीक्षा की अच्छे से तैयारी कर पाएंगे। हालांकि, उनका मानना है कि स्कूल में कक्षाएं बहुत लंबी होने लगी हैं। यदि कम समय की कक्षाएं चलें तो बच्चे ज्यादा समझ सकते हैं। उनका ये भी मानना है कि स्कूलों में अब नियम ज्यादा सख्त बना दिए गए हैं जिससे परेशानी होती है। इसमें कक्षाओं में मास्क की बाध्यता के साथ ही मैदान में नहीं खेलना और एक-दूसरे से सटकर नहीं बैठना या बातें करने और सामान शेयर नहीं करने जैसी बाध्यता से उन्हें परेशानी है।