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नई सरकार पहल करे तो रुड़की बन सकता है पर्यटन केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 12 Apr 2017 09:12 PM IST
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नई सरकार पहल करे तो राज्य के प्रवेश द्वार रुड़की को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है हरिद्वार में गंगा की धारा से निकली गंगनहर का शहर के बीचोबीच से होकर गुजरना। रुड़की से बहादराबाद तक करीब 13 किलोमीटर की दूरी में गंगनहर के दोनों ओर दर्शकदीर्घा और आने जाने के लिए लिए सड़क की सुविधाएं मौजूद हैं। साथ ही तैराकी और कैनोइंग-क्याकिंग की कई राष्ट्रीय स्तर की जल प्रतियोगिताएं भी कई बार इसकी अहमियत को साबित कर चुकी है।
करीब दो साल पहले पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार ने रुड़की के लिए अति महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। जिसके तहत रुड़की को टूरिस्ट सर्किट जोन बनाकर आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करना था। इसमें खास बात यह थी कि रुड़की की गंगनहर को पर्यटक स्थल एवं खेल प्रतियोगिताओं के रूप में स्थापित किया जाना था, लेकिन सीएम की घोषण के अनुरूप धरातल पर कोई काम नहीं हो सका।
2010 में भी रुड़की गंगनहर को पर्यटन एवं खेल गतिविधियों के लिए विकसित करने और इसके सौंदर्यीकरण की घोषणाएं की गई थी। तब तत्कालीन मंत्री मदन कौशिक की ओर से इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। लेकिन गंगनहर के सौंदर्यीकरण में यूपी की ओर से पेंच फंसने के कारण इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका। गंगनहर में कई राष्ट्रीय स्तर की जल प्रतियोगिताओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा चुका है। ऐसे में प्रदेश के प्रवेश द्वार पर स्थित रुड़की की गंगनहर और आसपास के इलाकों को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यहां बड़ा पर्यटन केंद्र स्थापित हो सकता है।
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ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने और संवारने की जरूरत
शहर के आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिन्हें सहेजकर, संजोकर और सौंदर्यीकरण कर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर झबरेड़ा क्षेत्र के कुंजा बहादुरपुर में राजा विजय सिंह का शहीद स्मारक है। यहां 1822 में राजा विजय सिंह के नेतृत्व में लोगों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। जिसमें 151 लोगों ने शहादत दी थी। यह स्थल देश ही नहंी बल्कि विदेश के इतिहासकारों को भी आकर्षित करता रहा है। बताया जाता है कि यहां एशिया में सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया था। राज्य सरकार ने इस गांव तीन साल पहले पर्यटन स्थल का दर्जा तो दे दिया है, लेकिन इसकी अहमियत के अनुरूप पहचान नहीं दिला पाया। इसके अलावा भगवानपुर क्षेत्र के सिकरोढ़ा गांव में 1880 में बना नवाव मोहम्मद अली खां का हूजरा (स्मृति स्थल) नक्काशी का बेजोड़ नमूना पेश करता है। लंढौरा में बालाजी मंदिर में विभिन्न प्रदेशों के श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंश कपूर इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित करने की घोषणा की थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके अलावा सुल्तानपुर क्षेत्र में पश्चिम बहणी गंगा एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां गंगा पश्चिम दिशा में बहती है। यह स्थल लोगों के लिए आस्था का केंद्र हैं।
गंगहनर को वाटर स्पोर्र्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही घाटों का सौंदर्यीकरण होगा और खासतौर से कांवड़ पटरी मार्ग के लिहाज से स्थाई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहले भी इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजे गए थे। अब नई सरकार में भी इसके लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही इन्हें स्वीकृति दिलाकर काम शुरू कराया जाएगा।
प्रदीप बत्रा, रुड़की विधायक
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करीब दो साल पहले पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार ने रुड़की के लिए अति महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। जिसके तहत रुड़की को टूरिस्ट सर्किट जोन बनाकर आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करना था। इसमें खास बात यह थी कि रुड़की की गंगनहर को पर्यटक स्थल एवं खेल प्रतियोगिताओं के रूप में स्थापित किया जाना था, लेकिन सीएम की घोषण के अनुरूप धरातल पर कोई काम नहीं हो सका।
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2010 में भी रुड़की गंगनहर को पर्यटन एवं खेल गतिविधियों के लिए विकसित करने और इसके सौंदर्यीकरण की घोषणाएं की गई थी। तब तत्कालीन मंत्री मदन कौशिक की ओर से इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। लेकिन गंगनहर के सौंदर्यीकरण में यूपी की ओर से पेंच फंसने के कारण इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका। गंगनहर में कई राष्ट्रीय स्तर की जल प्रतियोगिताओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा चुका है। ऐसे में प्रदेश के प्रवेश द्वार पर स्थित रुड़की की गंगनहर और आसपास के इलाकों को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यहां बड़ा पर्यटन केंद्र स्थापित हो सकता है।
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ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने और संवारने की जरूरत
शहर के आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिन्हें सहेजकर, संजोकर और सौंदर्यीकरण कर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर झबरेड़ा क्षेत्र के कुंजा बहादुरपुर में राजा विजय सिंह का शहीद स्मारक है। यहां 1822 में राजा विजय सिंह के नेतृत्व में लोगों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। जिसमें 151 लोगों ने शहादत दी थी। यह स्थल देश ही नहंी बल्कि विदेश के इतिहासकारों को भी आकर्षित करता रहा है। बताया जाता है कि यहां एशिया में सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया था। राज्य सरकार ने इस गांव तीन साल पहले पर्यटन स्थल का दर्जा तो दे दिया है, लेकिन इसकी अहमियत के अनुरूप पहचान नहीं दिला पाया। इसके अलावा भगवानपुर क्षेत्र के सिकरोढ़ा गांव में 1880 में बना नवाव मोहम्मद अली खां का हूजरा (स्मृति स्थल) नक्काशी का बेजोड़ नमूना पेश करता है। लंढौरा में बालाजी मंदिर में विभिन्न प्रदेशों के श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंश कपूर इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित करने की घोषणा की थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके अलावा सुल्तानपुर क्षेत्र में पश्चिम बहणी गंगा एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां गंगा पश्चिम दिशा में बहती है। यह स्थल लोगों के लिए आस्था का केंद्र हैं।
गंगहनर को वाटर स्पोर्र्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही घाटों का सौंदर्यीकरण होगा और खासतौर से कांवड़ पटरी मार्ग के लिहाज से स्थाई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहले भी इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजे गए थे। अब नई सरकार में भी इसके लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही इन्हें स्वीकृति दिलाकर काम शुरू कराया जाएगा।
प्रदीप बत्रा, रुड़की विधायक