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आखिरकार मिला पांच लाख, अब हो सकेगा कैंसर का इलाज
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रुड़की। किसान श्यामवीर अब अपने भाई का कैंसर का इलाज करा सकेंगे। चीनी मिल ने उन्हें पांच लाख का चेक सौंप दिया है। बकाया भुगतान मिलने पर किसान की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जो भुगतान पिछले दो साल से नहीं मिल पाया था, वह अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दो महीने के अंदर हो गया। अब वह कैंसर पीड़ित भाई का अच्छे से उपचार करा सकेंगे। उन्हें मकान भी नहीं बेचना पड़ेगा। इसके लिए उन्होंने अमर उजाला को कहा धन्यवाद कहा।
मंगलौर के तांशीपुर निवासी श्यामवीर के छोटे भाई राजबीर को करीब पांच महीने पहले कैंसर की पुष्टि हुई थी। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज शुरू हुआ। इलाज में लाखों का खर्च आ रहा था। ऐसे में वह इकबालपुर चीनी मिल पर बकाया करीब आठ लाख रुपये के भुगतान की गुहार लगा रहे थे। दो साल तक मिल से लेकर विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें गन्ने का बकाया भुगतान नहीं मिला। ऐसे में भाई के उपचार के लिए उन्होंने गांव में 28 बीघा कृषि भूमि और मकान बेचने का मन बना लिया था। मकान पर बिकाऊ होने का नोटिस भी लगा दिया था। इस बीच किसान की पीड़ा अमर उजाला तक पहुंची।
अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में ‘मिल दबाए बैठी आठ लाख, कैंसर का कैसे कराएं इलाज’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। साथ ही चीनी मिल अधिकारियों और सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह से वार्ता कर किसान की बात रखी थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द किसान का बकाया भुगतान कराया जाएगा। खबर प्रकाशित होने के बाद मिल अधिकारियों ने भुगतान की प्रक्रिया तेजी से शुरू की। हाल ही में चीनी मिल ने भुगतान का चेक इकबालपुर गन्ना समिति को दिया। समिति ने भी राजबीर को सवा चार लाख और 70 हजार रुपये के दो चेक सौंप दिए। इसे उन्होंने बैंक में लगा दिया है। बकाया भुगतान मिलने पर राजबीर के चेहरे मुस्कान आई तो उन्होंने फोन पर अमर उजाला का धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भुगतान होने से अब वह भाई का सही से इलाज करा सकेंगे और मकान व कृषि भूमि भी नहीं बेचनी पड़ेगी। दूसरी ओर, चीनी मिल प्रबंधन ने बाकी का भुगतान भी जल्द करने का आश्वासन दिया है।
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खबर प्रकाशित हुई तो किसान संगठनों ने उठाया मुद्दा
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद किसान संगठनों ने तांशीपुर पहुंचकर किसान राजबीर से मुलाकात की। साथ ही हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुशील राठी ने भी किसान की समस्या को लेकर चीनी मिल और समिति के अधिकारियों से वार्ता की थी। यही नहीं, किसान की समस्या का हल जल्द नहीं होने पर किसान संगठनों ने चीनी मिल के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी थी।
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मंगलौर के तांशीपुर निवासी श्यामवीर के छोटे भाई राजबीर को करीब पांच महीने पहले कैंसर की पुष्टि हुई थी। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज शुरू हुआ। इलाज में लाखों का खर्च आ रहा था। ऐसे में वह इकबालपुर चीनी मिल पर बकाया करीब आठ लाख रुपये के भुगतान की गुहार लगा रहे थे। दो साल तक मिल से लेकर विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें गन्ने का बकाया भुगतान नहीं मिला। ऐसे में भाई के उपचार के लिए उन्होंने गांव में 28 बीघा कृषि भूमि और मकान बेचने का मन बना लिया था। मकान पर बिकाऊ होने का नोटिस भी लगा दिया था। इस बीच किसान की पीड़ा अमर उजाला तक पहुंची।
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अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में ‘मिल दबाए बैठी आठ लाख, कैंसर का कैसे कराएं इलाज’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। साथ ही चीनी मिल अधिकारियों और सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह से वार्ता कर किसान की बात रखी थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द किसान का बकाया भुगतान कराया जाएगा। खबर प्रकाशित होने के बाद मिल अधिकारियों ने भुगतान की प्रक्रिया तेजी से शुरू की। हाल ही में चीनी मिल ने भुगतान का चेक इकबालपुर गन्ना समिति को दिया। समिति ने भी राजबीर को सवा चार लाख और 70 हजार रुपये के दो चेक सौंप दिए। इसे उन्होंने बैंक में लगा दिया है। बकाया भुगतान मिलने पर राजबीर के चेहरे मुस्कान आई तो उन्होंने फोन पर अमर उजाला का धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भुगतान होने से अब वह भाई का सही से इलाज करा सकेंगे और मकान व कृषि भूमि भी नहीं बेचनी पड़ेगी। दूसरी ओर, चीनी मिल प्रबंधन ने बाकी का भुगतान भी जल्द करने का आश्वासन दिया है।
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खबर प्रकाशित हुई तो किसान संगठनों ने उठाया मुद्दा
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद किसान संगठनों ने तांशीपुर पहुंचकर किसान राजबीर से मुलाकात की। साथ ही हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुशील राठी ने भी किसान की समस्या को लेकर चीनी मिल और समिति के अधिकारियों से वार्ता की थी। यही नहीं, किसान की समस्या का हल जल्द नहीं होने पर किसान संगठनों ने चीनी मिल के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी थी।