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अब अस्पताल में एटीएम कार्ड और पीटएम से होगा भुगतान
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सिविल अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को नकदी को लेकर आने वाली परेशानी अब दूर हो जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ओपीडी का पर्चा बनवाने और टेस्ट के भुगतान के लिए डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। बैंक अधिकारियों ने अस्पताल के अकाउंट को लिंक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रुड़की सिविल अस्पताल में रोजाना 500 मरीज आते हैं। इनमें से करीब 300 लोग रोजाना पर्चा बनवाने और टेस्ट शुल्क जमा कराने के लिए काउंटर पर लाइन में लगते हैं। कई बार गर्मी और लंबी लाइन के चलते लोग आपस में उलझने लगते हैं। वहीं कई बार लंच टाइम तक उनका नंबर नहीं आ पाता। उस समय लाइन में खड़े लोगों के सब्र का बांध टूटने लगता है लेकिन अब सिविल अस्पताल डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था करने जा रहा है। ऐसे में अब लोग अपने मोबाइल से भुगतान कर सकेंगे। डिजिटल पेमेंट से काउंटर से पर्चा लेने के काम में तेजी आएगी और भीड़ कम होगी। वहीं दूसरी ओर इस लाइन में टेस्ट के लिए शुल्क जमा कराने वाले भी नहीं होंगे, क्योंकि टेस्ट कराने वालों के लिए लैब में भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी जाएगी।
ब्लड लेने वालों को भी मिलेगी राहत
पहले बैंक से ब्लड लेने के लिए अस्पताल के काउंटर पर लाइन में लगकर शुल्क जमा कराना पड़ता था। ऐसे में खून की कमी से जूझ रहे गंभीर मरीजों के इलाज में देरी होती थी। अब ब्लड बैंक में ही डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिल जाएगी जिससे खून लेने पहुंचने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। ज्ञात हो कि सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रोजाना 70 से 80 यूनिट ब्लड लोगों को दिया जाता है।
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रोजाना की नोकझोंक पर भी लगेगा विराम
दरअसल, सिविल अस्पताल में ओपीडी का पर्चा बनवाने के लिए 28 रुपये जमा कराने होते हैं। मरीज के पास खुले पैसे नहीं होते हैं। काउंटर पर कर्मचारी कहते हैं कि वे इतने खुले पैसे कहां से लाए। इसके चलते रोजाना दो रुपये को लेकर नोकझोंक होती रहती है। यही नहीं कई बार तो दो रुपये के चक्कर में लाइन में खड़े मरीज को डांट डपटकर लाइन से बाहर भी कर दिया जाता है।
कैशलेस पेमेंट की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक-दो दिन में ही लोग पर्चा बनवाने और टेस्ट कराने के लिए डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इससे मरीज और तीमारदारों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही कर्मचारियों के समय की बचत होगी।
-डॉ. संजय कंसल, सीएमएस रुड़की
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रुड़की सिविल अस्पताल में रोजाना 500 मरीज आते हैं। इनमें से करीब 300 लोग रोजाना पर्चा बनवाने और टेस्ट शुल्क जमा कराने के लिए काउंटर पर लाइन में लगते हैं। कई बार गर्मी और लंबी लाइन के चलते लोग आपस में उलझने लगते हैं। वहीं कई बार लंच टाइम तक उनका नंबर नहीं आ पाता। उस समय लाइन में खड़े लोगों के सब्र का बांध टूटने लगता है लेकिन अब सिविल अस्पताल डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था करने जा रहा है। ऐसे में अब लोग अपने मोबाइल से भुगतान कर सकेंगे। डिजिटल पेमेंट से काउंटर से पर्चा लेने के काम में तेजी आएगी और भीड़ कम होगी। वहीं दूसरी ओर इस लाइन में टेस्ट के लिए शुल्क जमा कराने वाले भी नहीं होंगे, क्योंकि टेस्ट कराने वालों के लिए लैब में भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी जाएगी।
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ब्लड लेने वालों को भी मिलेगी राहत
पहले बैंक से ब्लड लेने के लिए अस्पताल के काउंटर पर लाइन में लगकर शुल्क जमा कराना पड़ता था। ऐसे में खून की कमी से जूझ रहे गंभीर मरीजों के इलाज में देरी होती थी। अब ब्लड बैंक में ही डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिल जाएगी जिससे खून लेने पहुंचने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। ज्ञात हो कि सिविल अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रोजाना 70 से 80 यूनिट ब्लड लोगों को दिया जाता है।
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रोजाना की नोकझोंक पर भी लगेगा विराम
दरअसल, सिविल अस्पताल में ओपीडी का पर्चा बनवाने के लिए 28 रुपये जमा कराने होते हैं। मरीज के पास खुले पैसे नहीं होते हैं। काउंटर पर कर्मचारी कहते हैं कि वे इतने खुले पैसे कहां से लाए। इसके चलते रोजाना दो रुपये को लेकर नोकझोंक होती रहती है। यही नहीं कई बार तो दो रुपये के चक्कर में लाइन में खड़े मरीज को डांट डपटकर लाइन से बाहर भी कर दिया जाता है।
कैशलेस पेमेंट की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक-दो दिन में ही लोग पर्चा बनवाने और टेस्ट कराने के लिए डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इससे मरीज और तीमारदारों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही कर्मचारियों के समय की बचत होगी।
-डॉ. संजय कंसल, सीएमएस रुड़की