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अब शासन के हाथ में है टोंगिया के ग्रामीणों की आजादी

Wed, 14 Jul 2021 10:42 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jul 2021 10:42 PM IST
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Now the 'freedom' of the villagers of Haripur Tongia in the hands of the government
वन विभाग ने बुग्गावाला क्षेत्र के वन ग्राम हरिपुर टोंगिया को राजस्व ग्राम बनाने की सिफारिश कर दी है। साथ ही शासन से मांगी गई जानकारी की रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। अब टोंगिया गांव की आजादी का फैसला शासन के हाथ में है। राजस्व ग्राम घोषित नहीं होने से आजादी के वर्षों बाद भी यहां के लोग मूल अधिकारों से वंचित हैं।
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दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत ने वर्ष 1930 में वन अधिकार अधिनियम लागू किया था। इसके बाद करीब 90 साल पहले टोंगिया पद्धति से वन क्षेत्रों में पेड़-पौधों की परवरिश करने के लिए आसपास के ग्रामीणों को वनों में बसाया गया था। उस दौरान इस जगह का नाम हरिपुर टोंगिया रख दिया गया। ग्रामीणों को दस-दस बीघा जमीनें भी दी गईं, जिस पर उन्हें तीन-तीन मीटर की दूरी पर पौधे उगाने थे, लेकिन आजादी के बाद जब यह देखा गया कि वनीकरण के नाम पर माफिया ने जमीनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है तो इस पद्धति को खत्म कर दिया गया। तभी से आज तक ये परिवार वन प्रशासन की ओर से दी गई जमीनों पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनों के सभी अधिकार वन विभाग के पास है। वर्तमान में हरिपुर टोंगिया की आबादी तकरीबन 1200 है। राजस्व ग्राम की सूची में नहीं होने के चलते यहां के लोगों को आज तक वोट डालने का अधिकार नहीं मिला है।
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गांव और खेती की जमीनें वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण यहां विधायक निधि, जिला पंचायत निधि या फिर किसी अन्य सरकारी योजना से सड़कें नहीं बनाई जा सकती हैं। यही कारण है कि सैकड़ों साल गुजरने के बाद गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं है। नवंबर, 2020 में शासन ने इस गांव को ग्राम पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू की तो ग्रामीणों में थोड़ी बहुत उम्मीद जगी थी। उस दौरान प्रशासन ने वन विभाग से गांव को राजस्व ग्राम में शामिल किए जाने को लेकर जानकारी मांगी थी। तब से लोग वन विभाग के अधिकारियों की ओर टकटकी लगाकर देख रहे थे। अब वन विभाग ने भी गांव को राजस्व ग्राम में शामिल करने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है। डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि उनके स्तर पर हरिपुर टोंगिया को राजस्व ग्राम बनाने के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर पर ही इसमें आगे फैसला लिया जाना है।
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