{"_id":"58629f254f1c1b741aeec149","slug":"now-move-to-a-cashless-industries-move","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब कैशलेस की ओर बढ़े उद्योगों के कदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब कैशलेस की ओर बढ़े उद्योगों के कदम
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की।
Updated Tue, 27 Dec 2016 10:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के बाद एक ओर जहां बैंक और आमजन आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वहीं लोग कैशलेस की ओर अग्रसर हो रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर और आसपास के क्षेत्र में स्थिति विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों के अब खाते खुलवाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें कैश भुगतान न करके बैंकों के माध्यम से वेतन दिया जा सके। आठ नवंबर के बाद से अब तक एसबीआई और पीएनबी सहित अन्य बैंकों में औद्योगिक कर्मियों के हजारों खाते खोले जा चुके हैं।
हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने के 48 दिन बाद भी नकदी का टोटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे जहां एक ओर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग अब कैशलेस की ओर रुख कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद से शहर के सैकड़ों प्रतिष्ठानों में स्वैप मशीन लग चुकी है, वहीं लोग भी मजबूरी में ही सही लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके तहत शहर की औद्योगिक इकाइयों ने भी अब कैशलेस की ओर रुख किया है। अब तक जिन इकाइयों में कर्मचारियों को कैश में वेतन दिया जाता था उनके खाते खुलवाए जा रहे हैं।
एसबीआई मुख्य शाखा रुड़की में नोटबंदी के बाद से लगभग पांच हजार खाते खोले जा चुके हैं। इसमें भगवानपुर स्थित टिबरेवाला इलेक्ट्रिकल कंपनी, केईआई इंड्रस्टी भगवानपुर, रुड़की स्थित इप्रो ग्लोबल कंपनी शामिल है। एसबीआई मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक जयशंकर के अनुसार नोटबंदी के बाद से विभिन्न औद्योगिक इकाइयों ने कर्मचारियों के खाते खोलने के लिए बैंक से संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग पांच हजार खाते खोले जा चुके हैं। दूसरी ओर शहर की पीएनबी मुख्य शाखा में मेडिग्लोब, शिवालिक रेमीडीज सहित अन्य कंपनियों के कर्मचारियों के खाते खुलवाए गए हैं। बैंक के मुख्य प्रबंधक खुर्शीद आलम के अनुसार सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों के खाते खोले गए हैं। इसके अलावा स्कालरशिप के लिए सुभारती आईआईटी के छात्रों के भी बैंक में खाते खोले गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने के 48 दिन बाद भी नकदी का टोटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे जहां एक ओर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग अब कैशलेस की ओर रुख कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद से शहर के सैकड़ों प्रतिष्ठानों में स्वैप मशीन लग चुकी है, वहीं लोग भी मजबूरी में ही सही लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके तहत शहर की औद्योगिक इकाइयों ने भी अब कैशलेस की ओर रुख किया है। अब तक जिन इकाइयों में कर्मचारियों को कैश में वेतन दिया जाता था उनके खाते खुलवाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
एसबीआई मुख्य शाखा रुड़की में नोटबंदी के बाद से लगभग पांच हजार खाते खोले जा चुके हैं। इसमें भगवानपुर स्थित टिबरेवाला इलेक्ट्रिकल कंपनी, केईआई इंड्रस्टी भगवानपुर, रुड़की स्थित इप्रो ग्लोबल कंपनी शामिल है। एसबीआई मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक जयशंकर के अनुसार नोटबंदी के बाद से विभिन्न औद्योगिक इकाइयों ने कर्मचारियों के खाते खोलने के लिए बैंक से संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग पांच हजार खाते खोले जा चुके हैं। दूसरी ओर शहर की पीएनबी मुख्य शाखा में मेडिग्लोब, शिवालिक रेमीडीज सहित अन्य कंपनियों के कर्मचारियों के खाते खुलवाए गए हैं। बैंक के मुख्य प्रबंधक खुर्शीद आलम के अनुसार सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों के खाते खोले गए हैं। इसके अलावा स्कालरशिप के लिए सुभारती आईआईटी के छात्रों के भी बैंक में खाते खोले गए हैं।
विज्ञापन