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Roorkee News: लिब्बरहेड़ी की बेटी कृतिस्ना आर्या बनीं कुश्ती रेफरी
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भरतपुर क्षेत्र के लिब्बरहेड़ी गांव की बेटी कृतिस्ना आर्या ने कुश्ती के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पूर्व रेसलर और भारतीय खेल प्राधिकरण की कुश्ती कोच कृतिस्ना आर्या को जापान में होने वाले 2026 एशियाई खेलों की कुश्ती प्रतियोगिताओं के रेफरी, ऑफिशियल पैनल में शामिल किया गया है। वह 24 सितंबर को जापान रवाना होंगी। उनकी इस उपलब्धि से उत्तराखंड समेत रुड़की क्षेत्र और लिब्बरहेड़ी गांव में खुशी का माहौल है।
कृतिस्ना ने करीब 2005 से कुश्ती खिलाड़ी के तौर पर अपने खेल सफर की शुरुआत की थी। कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास के बाद उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण में कुश्ती कोच के रूप में पहचान बनाई। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित खेल आयोजन में रेफरी, ऑफिशियल की जिम्मेदारी मिलने से उनके कॅरिअर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
कृतिस्ना आर्या रुड़की क्षेत्र के प्रसिद्ध पहलवान ओमवीर पहलवान की बेटी हैं। उनके पिता का कुश्ती जगत में मास्टर चंदगीराम की परंपरा और अखाड़े से जुड़ाव रहा है। ऐसे में कृतिस्ना को बचपन से ही कुश्ती का माहौल और मार्गदर्शन मिला जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से आगे बढ़ाया।
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कृतिस्ना की उपलब्धि खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखने वाली बेटियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी खेल के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं। उत्तराखंड कुश्ती संघ के अध्यक्ष डॉ. एसपी देशवाल समेत खेल प्रेमियों ने उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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कृतिस्ना ने करीब 2005 से कुश्ती खिलाड़ी के तौर पर अपने खेल सफर की शुरुआत की थी। कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास के बाद उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण में कुश्ती कोच के रूप में पहचान बनाई। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित खेल आयोजन में रेफरी, ऑफिशियल की जिम्मेदारी मिलने से उनके कॅरिअर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
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कृतिस्ना आर्या रुड़की क्षेत्र के प्रसिद्ध पहलवान ओमवीर पहलवान की बेटी हैं। उनके पिता का कुश्ती जगत में मास्टर चंदगीराम की परंपरा और अखाड़े से जुड़ाव रहा है। ऐसे में कृतिस्ना को बचपन से ही कुश्ती का माहौल और मार्गदर्शन मिला जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से आगे बढ़ाया।
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कृतिस्ना की उपलब्धि खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखने वाली बेटियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी खेल के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं। उत्तराखंड कुश्ती संघ के अध्यक्ष डॉ. एसपी देशवाल समेत खेल प्रेमियों ने उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।