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पुलिस को चकमा देकर यूपी गेट दिल्ली पहुंचे हरिद्वार के किसान
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रुड़की। दिन में दिल्ली जाने से रोके गए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से जुड़े करीब 30-35 किसान शनिवार रात पुलिस को चकमा देकर दिल्ली बॉर्डर पर यूपी गेट के पास चल रहे धरने में शामिल हो गए हैं। उनका कहना है कि वे आंदोलन को समर्थन देने यहां पहुंचे हैं। केंद्र सरकार अगर मांगों को पूरा नहीं करती है तो जिले के और किसान भी धरनास्थल पर पहुंचेंगे।
बता दें कि भाकियू (टिकैत) के कार्यकर्ताओं को दिल्ली कूच करते समय शनिवार दोपहर नारसन बॉर्डर पर रोक लिया गया था। इस दौरान किसान बैरिकेडिंग तोड़कर यूपी की सीमा में काफी आगे तक चले गए थे, लेकिन पुलिस ने किसानों को यूपी की सीमा में जाकर हिरासत में ले लिया था और आगे नहीं बढ़ने दिया था। इसके बाद पुलिस किसानों को नारसन चौकी ले आई थी। शाम करीब पांच बजे सभी किसानों को रिहा कर दिया गया, लेकिन किसान नेता अपने इरादे पर डटे रहे। रात में किसानों ने अलग-अलग गाड़ियों में बारी-बारी से पुलिस को चकमा देकर बॉर्डर पार कर लिया। देर रात क्षेत्र से करीब 30-35 किसान यूपी गेट, गाजियाबाद पहुंच गए। यूनियन के जिला अध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री ने बताया कि केंद्र सरकार का यह तानाशाही रवैया किसान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी, किसान आंदोलन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह किसान और मजदूर विरोधी सरकार है और आने वाले चुनाव में उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा। किसानों को उनकी फसलों का दाम नहीं मिल रहा और इनके मंत्री-विधायक अपनी तनख्वाह दोगुनी कर रहे हैं। सारी चीज प्राइवेट कंपनियों को दे रहे हैं। किसानों की केवल एक मांग है या तो कानून वापस लिया जाए या फिर किसानों को लिखित में दिया जाए की न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फसलों की खरीद नहीं होगी। उन्होंने बताया कि यूपी गेट पर धरने में जनपद हरिद्वार के कई किसान मौजूद हैं और खाने पीने की व्यवस्था खुद कर रहे हैं। मौके पर मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, प्रदेश सचिव रवि कुमार, विक्रम पाल सिंह, सुखराम पाल, सोनवीर सिंह, राममूर्ति, बालेंदर, मेजर राणा बबलू आदि मौजूद हैं।
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बता दें कि भाकियू (टिकैत) के कार्यकर्ताओं को दिल्ली कूच करते समय शनिवार दोपहर नारसन बॉर्डर पर रोक लिया गया था। इस दौरान किसान बैरिकेडिंग तोड़कर यूपी की सीमा में काफी आगे तक चले गए थे, लेकिन पुलिस ने किसानों को यूपी की सीमा में जाकर हिरासत में ले लिया था और आगे नहीं बढ़ने दिया था। इसके बाद पुलिस किसानों को नारसन चौकी ले आई थी। शाम करीब पांच बजे सभी किसानों को रिहा कर दिया गया, लेकिन किसान नेता अपने इरादे पर डटे रहे। रात में किसानों ने अलग-अलग गाड़ियों में बारी-बारी से पुलिस को चकमा देकर बॉर्डर पार कर लिया। देर रात क्षेत्र से करीब 30-35 किसान यूपी गेट, गाजियाबाद पहुंच गए। यूनियन के जिला अध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री ने बताया कि केंद्र सरकार का यह तानाशाही रवैया किसान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।
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जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी, किसान आंदोलन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह किसान और मजदूर विरोधी सरकार है और आने वाले चुनाव में उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा। किसानों को उनकी फसलों का दाम नहीं मिल रहा और इनके मंत्री-विधायक अपनी तनख्वाह दोगुनी कर रहे हैं। सारी चीज प्राइवेट कंपनियों को दे रहे हैं। किसानों की केवल एक मांग है या तो कानून वापस लिया जाए या फिर किसानों को लिखित में दिया जाए की न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फसलों की खरीद नहीं होगी। उन्होंने बताया कि यूपी गेट पर धरने में जनपद हरिद्वार के कई किसान मौजूद हैं और खाने पीने की व्यवस्था खुद कर रहे हैं। मौके पर मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, प्रदेश सचिव रवि कुमार, विक्रम पाल सिंह, सुखराम पाल, सोनवीर सिंह, राममूर्ति, बालेंदर, मेजर राणा बबलू आदि मौजूद हैं।
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