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पाकिस्तान की पांच बेटियों को नागरिकता की दरकार

Fri, 10 Jan 2020 11:30 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 11:30 PM IST
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five daughter of pakistan waiting in citizanship
दुल्हन बनकर पाकिस्तान से भारत आई पाकिस्तान की पांच बेटियों को अब भी नागरिकता की दरकार है। पाकिस्तान की यह पांचों बेटियां पिछले कई साल से रुड़की और आसपास इलाके में रहकर भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहीं है। नागरिकता के लिए यें बेटियां कई बार गृहमंत्रालय से गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अभी तक इन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिल पाई है। अब नागरिकता संशोधन कानून बनने से बेटियों को जल्द ही नागरिकता मिल जाने की नई उम्मीद जगी है। इस कानून को लेकर इन बेटियों में खासा उत्साह है।
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले प्रीतम सिंह परिवार के साथ वर्ष 2010 में भारत आ गए थे और देहरादून के सीमा द्वार में रहकर मेहनत मजदूरी करने लगे। परिवार में उनकी दो बेटी कविता शर्मा, काजल और बेटा जय कृष्ण हैं। प्रीतम सिंह ने अपनी बेटी कविता शर्मा का वर्ष 2014 में रुड़की के सालियर निवासी सौरभ शर्मा से विवाह कर दिया। इस दौरान कविता को दो साल का बेटा कृष्णा और एक साल की बेटी वैष्णवी है। लेकिन आठ साल भारत में रहने के बाद भी कविता और उनके परिवार को भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। भारतीय नागरिकता लेने के लिए अकेली कविता ही नहीं है, बल्कि रुड़की क्षेत्र में चार और पाकिस्तानी बेटियां हैं जो नागरिकता के लिए पिछले कई साल से इंतजार कर रही हैं। ऐसा नहीं है कि इनके प्रपत्र स्थानीय सूचना इकाई (एलआईयू) द्वारा सभी प्रक्रिया पूरी करके गृह मंत्रालय नहीं भेजे गए हैं। एलआईयू की ओर से इनके प्रपत्र गृह मंत्रालय भेजे जा चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक इन्हें नागरिकता की दरकार है। हालांकि अब नागरिकता संशोधन कानून बनने से इन बेटियाें में नागरिकता की नई उम्मीद जगी है। कविता शर्मा का कहना है कि अब नागरिकता संशोधन कानून बनने से नई उम्मीद जगी है। बताया कि वह नौ साल से नागरिकता के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें नागरिकता नहीं मिल पाई है। वहीं कविता शर्मा के पति सौरभ शर्मा को भी उम्मीद जगी है कि उनकी पत्नी को भारत की नागरिकता मिल सकेगी। वह अपनी पत्नी की भारत की नागरिकता के लिए नौ साल से चक्कर काट रहे हैं।
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