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Roorkee News: खूंखार कुत्तों ने तीन दिन में 200 से ज्यादा लोगों को काटा, एंटी रैबीज लगवाने पहुंचे मरीज
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रुड़की। शहर और आस-पास कुत्तों का आतंक हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सिर्फ तीन दिनों में ही 200 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काट लिया है। पीड़ितों में छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। सोमवार को सिविल अस्पताल में एंटी-रैबीज इंजेक्शन के लिए लाेगों की कतारें लगी रहीं। लोग दहशत में भी हैं।
पिछले दिनों भी रुड़की शहर, गंगनहर क्षेत्र, सिविल लाइंस, ढंढेरा, सुनहरा, सलेमपुर और कई कॉलोनियों से कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा पिरान कलियर में एक दिन में छह बच्चों को कुत्ते ने काटा था। इसी तरह लंढौरा में कई बच्चों पर कुत्तों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। वहीं, पाड़ली क्षेत्र में खेत पर गई एक वृद्ध महिला पर कुत्ते के हमले से उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा ढंढेरा में पालतू कुत्ते के हमले में भी एक महिला ने जान गंवाई। अभी भी कुत्तों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सिविल अस्पताल में उपचार के लिए रोजाना 50 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं, जबकि बीते तीन दिनों में करीब 200 लोगों को कुत्तों ने काट खाया है। सोमवार को एंटी रेबीज लगवाने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही। सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि कुत्ते काटने के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में एंटी रैबीज उपलब्ध है।
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आक्रामक हो रहे कुत्ते, कर रहे वार
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को 98 तो सोमवार को दोपहर 12 बजे तक 85 मरीज कुत्ते के काटने पर अस्पताल पहुंचे। शाम तक यह आंकड़ा 200 से ज्यादा रहा।
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वायरल मरीजों की उमड़ी भीड़, घंटों रुककर कराया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की। रुड़की के सिविल अस्पताल में सोमवार को भारी संख्या में वायरल मरीजों की भीड़ जमा रही। ओपीडी से लेकर पंजीकरण कक्ष के बाहर सैकड़ों मरीज लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल में करीब 300 मरीज वायरल बुखार संक्रमण के पहुंचे। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को व साथ में आए तीमारदारों को घंटों रुकना पड़ा।
सिविल अस्पताल के चिकित्साधिकारी नितिश कुमार ने बताया कि इस समय वायरल बुखार संक्रमण, टाइफाइड, डेंगू आदि लक्षण से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। तेज बुखार व सर्दी लगना जैसे मरीजों की डेंगू जांच कराई जा रही है। हालांकि अभी तक कोई डेंगू का पॉजिटिव मरीज नहीं पाया गया। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं और स्वयं इलाज करने से बचें।
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बचाव के उपाय
घरों के आसपास जलभराव न होने दें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें, हाथों की साफ-सफाई बनाए रखें, बासी और बाहर का खाना खाने से बचें, पूरे बांह के कपड़े पहने, मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी व ओडोमॉस लगाएं।
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पिछले दिनों भी रुड़की शहर, गंगनहर क्षेत्र, सिविल लाइंस, ढंढेरा, सुनहरा, सलेमपुर और कई कॉलोनियों से कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा पिरान कलियर में एक दिन में छह बच्चों को कुत्ते ने काटा था। इसी तरह लंढौरा में कई बच्चों पर कुत्तों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। वहीं, पाड़ली क्षेत्र में खेत पर गई एक वृद्ध महिला पर कुत्ते के हमले से उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा ढंढेरा में पालतू कुत्ते के हमले में भी एक महिला ने जान गंवाई। अभी भी कुत्तों के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सिविल अस्पताल में उपचार के लिए रोजाना 50 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं, जबकि बीते तीन दिनों में करीब 200 लोगों को कुत्तों ने काट खाया है। सोमवार को एंटी रेबीज लगवाने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही। सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि कुत्ते काटने के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल में एंटी रैबीज उपलब्ध है।
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आक्रामक हो रहे कुत्ते, कर रहे वार
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को 98 तो सोमवार को दोपहर 12 बजे तक 85 मरीज कुत्ते के काटने पर अस्पताल पहुंचे। शाम तक यह आंकड़ा 200 से ज्यादा रहा।
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वायरल मरीजों की उमड़ी भीड़, घंटों रुककर कराया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की। रुड़की के सिविल अस्पताल में सोमवार को भारी संख्या में वायरल मरीजों की भीड़ जमा रही। ओपीडी से लेकर पंजीकरण कक्ष के बाहर सैकड़ों मरीज लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल में करीब 300 मरीज वायरल बुखार संक्रमण के पहुंचे। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को व साथ में आए तीमारदारों को घंटों रुकना पड़ा।
सिविल अस्पताल के चिकित्साधिकारी नितिश कुमार ने बताया कि इस समय वायरल बुखार संक्रमण, टाइफाइड, डेंगू आदि लक्षण से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। तेज बुखार व सर्दी लगना जैसे मरीजों की डेंगू जांच कराई जा रही है। हालांकि अभी तक कोई डेंगू का पॉजिटिव मरीज नहीं पाया गया। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं और स्वयं इलाज करने से बचें।
बचाव के उपाय
घरों के आसपास जलभराव न होने दें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें, हाथों की साफ-सफाई बनाए रखें, बासी और बाहर का खाना खाने से बचें, पूरे बांह के कपड़े पहने, मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी व ओडोमॉस लगाएं।