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Roorkee News: महिला काव्य संध्या में गूंजी संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार
Sun, 24 May 2026 04:30 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Sun, 24 May 2026 04:30 PM IST
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महिला काव्य मंच की ओर से आयोजित काव्य संध्या में मौजूद कवयित्री। स्वयं
कवयित्रियों की रचनाओं ने प्रेम, संघर्ष, समाज और आत्ममंथन के भावों को किया जीवंत
रुड़की। महिला काव्य मंच की ओर से शनिवार शाम आयोजित महिला काव्य संध्या साहित्य, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों के नाम रही। कार्यक्रम की शुरुआत ईश वंदना से हुई। इसके बाद मंच की इकाई अध्यक्ष अर्चना त्यागी ने कार्यकारिणी के नियमों और आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए सदस्यों से सुझाव आमंत्रित किए।
कार्यक्रम का आयोजन अनुपमा गुप्ता के आवास पर किया गया। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ वीना सिंह की उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति पर आधारित दमदार प्रस्तुति से हुई। इसके बाद चित्रकार व कवयित्री मृणालिनी शर्मा ने अपनी कविता ‘दीप’ को प्रस्तुत कर आपसी प्रेम, सौहार्द और शांति का संदेश दिया। अलका घनशाला ने बोल देगी लड़की कविता से आधुनिक नारी की शक्ति और संभावनाओं का चित्रण किया। वहीं अर्चना त्यागी ने बदल गई हूं कविता में बदलते परिवेश और संघर्षों के बीच आत्मसंयम की भावनाओं को अभिव्यक्त किया। बुशरा तबस्सुम की रचना उस पार ने आत्मा और संवेदनाओं की गहराइयों तक श्रोताओं को पहुंचाया। मेजबान अनुपमा गुप्ता ने मन कुछ कहो न कविता के जरिये भ्रष्टाचार और सामाजिक चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया। कार्यक्रम में ममता चंद्रा ने आसमान मेरे भीतर और श्रीमती श्रद्धा हिंदू ने मन विषय पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। सभा में उपस्थित नहीं हो पाने पर कविता गोयल ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी रचना घोंसला प्रस्तुत की, जिसने बदलते पारिवारिक रिश्तों और भावनात्मक दूरी को मार्मिक ढंग से उजागर किया।
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रुड़की। महिला काव्य मंच की ओर से शनिवार शाम आयोजित महिला काव्य संध्या साहित्य, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों के नाम रही। कार्यक्रम की शुरुआत ईश वंदना से हुई। इसके बाद मंच की इकाई अध्यक्ष अर्चना त्यागी ने कार्यकारिणी के नियमों और आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए सदस्यों से सुझाव आमंत्रित किए।
कार्यक्रम का आयोजन अनुपमा गुप्ता के आवास पर किया गया। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ वीना सिंह की उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति पर आधारित दमदार प्रस्तुति से हुई। इसके बाद चित्रकार व कवयित्री मृणालिनी शर्मा ने अपनी कविता ‘दीप’ को प्रस्तुत कर आपसी प्रेम, सौहार्द और शांति का संदेश दिया। अलका घनशाला ने बोल देगी लड़की कविता से आधुनिक नारी की शक्ति और संभावनाओं का चित्रण किया। वहीं अर्चना त्यागी ने बदल गई हूं कविता में बदलते परिवेश और संघर्षों के बीच आत्मसंयम की भावनाओं को अभिव्यक्त किया। बुशरा तबस्सुम की रचना उस पार ने आत्मा और संवेदनाओं की गहराइयों तक श्रोताओं को पहुंचाया। मेजबान अनुपमा गुप्ता ने मन कुछ कहो न कविता के जरिये भ्रष्टाचार और सामाजिक चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया। कार्यक्रम में ममता चंद्रा ने आसमान मेरे भीतर और श्रीमती श्रद्धा हिंदू ने मन विषय पर अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। सभा में उपस्थित नहीं हो पाने पर कविता गोयल ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी रचना घोंसला प्रस्तुत की, जिसने बदलते पारिवारिक रिश्तों और भावनात्मक दूरी को मार्मिक ढंग से उजागर किया।
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