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सिल्ट हटाने को लेकर बिजनौर और हरिद्वार आए आमने-सामने

Tue, 12 Jun 2018 10:28 PM IST
Updated Tue, 12 Jun 2018 10:28 PM IST
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सिल्ट हटाने को लेकर बिजनौर और हरिद्वार आए आमने-सामने

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अमर उजाला ब्यूरो
खानपुर। गंगा में जमा सिल्ट को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मे रार हो गई है। हरिद्वार जिला प्रशासन ने हाल ही में गंगा नदी के बालावाली घाट के पास जमा सिल्ट हटाने के लिए टेंडर जारी किए थे, लेकिन बिजनौर जिला प्रशासन ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए सिल्ट हटाने का काम रुकवा दिया है। फिलहाल दोनों जिले के अधिकारी इस मामले को लेकर वार्ता कर रहे हैं।
क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा नदी को दोनों प्रदेशों ने सीमा माना था। पिछली बरसात में गंगा नदी कटाव करती हुई खानपुर क्षेत्र की ओर बढ़ गई थी। बाढ़ के खतरे को देखते हुए लगभग तीन माह पहले कलसिया गांव के ग्रामीण मुकेश कुमार की अगुवाई में ग्रामीणों ने एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा से गंगा नदी में जमी सिल्ट हटाने की मांग की थी। बाद में डीएम ने गंगा नदी के तट पर पहुंचकर निरीक्षण किया था। उन्होंने भी माना था कि गंगा नदी रुख खानपुर क्षेत्र की ओर हो गया है। इस पर हरिद्वार सिंचाई विभाग ने गंगा तट के आसपास बसे गांवों की बाढ़ से सुरक्षा के मद्देनजर बालावाली गांव के रकबे में गंगा से 15 लाख घनमीटर सिल्ट हटाने के आदेश दिए थे। इसी महीने चार निजी फर्मों को सिल्ट हटाने के टेंडर जारी किए थे। फर्मों ने दो दिन पहले ही काम शुरू किया था, लेकिन बिजनौर तहसील प्रशासन ने काम में अड़ंगा लगा दिया है। काम करा रही फर्मों ने बताया कि मंडावर पुलिस के साथ पहुंचे बिजनौर के तहसीलदार ने जमीन को यूपी की बताते हुए काम रोक दिया है। फिलहाल हरिद्वार व बिजनौर जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस विवाद के निपटारे के लिए वार्ता कर रहे हैं।
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गंगा नदी में जमी सिल्ट हटाने का टेंडर लेने वाली निजी फर्में जिला प्रशासन को करीब डेढ़ करोड़ की रायल्टी का अग्रिम भुगतान कर चुकी हैं। उनके पास सिल्ट हटाने के लिए 30 जून तक का ही समय है। विवाद के कारण जहां क्षेत्र के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, वहीं निजी फमों का पैसा भी फंस गया है।
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हम अपने प्रदेश की जमीन मे बह रही गंगा नदी के पास से सिल्ट हटवा रहे हैं। सीडीओ बिजनौर से वार्ता हो रही है। अगर वे चाहें तो हम संयुक्त पैमाइश के लिए भी तैयार हैं।
- ललित नारायण मिश्रा, एडीएम वित्त हरिद्वार
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