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कानून की कमजोर कड़ी से पांव पसार रहा कच्चा कारोबार
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
एक बार पकड़े जाने पर टिल राइजिंग कोर्ट यानी कोर्ट उठने तक की सजा और जुर्माना भुगतकर शराब के सौदागर फिर से लोगों की नशों में जहर घोलने के व्यापार में जुट जाते हैं। आबकारी अधिनियम 60 के अंतर्गत कानून की कमजोर कड़ी के चलते अवैध शराब का धंधा राज्य में बदस्तूर पांव पसारता रहा है। अब तो यह भयानक त्रासदी में तब्दील हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि आबकारी विभाग ने साल 2017-18 में 628 मुकदमे दर्ज किए हैं, इनमें से 391 आरोपियों को सजा हुई और बाकी आरोपी जुर्म कबूल करने के बाद जुर्माना अदा कर छूट गए।
शराब के अवैध कारोबार में पकड़े जाने पर आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें जुर्म कबूल करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना और दो से तीन साल तक सजा का प्रावधान है। यह धारा गैर जमानती नहीं है। इसलिए कई बार पुलिस की पकड़ से बाहर अपराधी जमानत पर छूट जाते हैं। अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने बताया कि यह धारा बहुत मजबूत नहीं है। गैर जमानती धारा नहीं होने के चलते अपराधियों में इसका खौफ नहीं है। उन्होंने बताया कि शराब के ज्यादातर मामलों में आरोपी अपना जुर्म कबूल कर लेते हैं। इसके बाद जुर्माने के साथ ही टीआसी की सजा के बाद इन्हें छोड़ दिया जाता है। शायद यही कारण है कि बड़ी संख्या में पकड़ा धकड़ी के बाद भी शराब का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है। आंकड़े बताते हैं कि आबकारी विभाग की ओर से साल 2016-17 में अवैध शराब के 633 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 260 अपराधियों को कोर्ट से सजा हुई। इस दौरान 11 हजार लीटर अवैध शराब पकड़ी गई। जिला आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि साल 2017-18 में 628 मुकदमों में से 391 आरोपियों को ही सजा हुई, बाकी जमानत पर छूट गए। अधिवक्ता अनित चौधरी का कहना है कि कानून को कड़ा बनाकर ही अवैध शराब के कारोबार को रोका जा सकता है।
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एक बार पकड़े जाने पर टिल राइजिंग कोर्ट यानी कोर्ट उठने तक की सजा और जुर्माना भुगतकर शराब के सौदागर फिर से लोगों की नशों में जहर घोलने के व्यापार में जुट जाते हैं। आबकारी अधिनियम 60 के अंतर्गत कानून की कमजोर कड़ी के चलते अवैध शराब का धंधा राज्य में बदस्तूर पांव पसारता रहा है। अब तो यह भयानक त्रासदी में तब्दील हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि आबकारी विभाग ने साल 2017-18 में 628 मुकदमे दर्ज किए हैं, इनमें से 391 आरोपियों को सजा हुई और बाकी आरोपी जुर्म कबूल करने के बाद जुर्माना अदा कर छूट गए।
शराब के अवैध कारोबार में पकड़े जाने पर आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें जुर्म कबूल करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना और दो से तीन साल तक सजा का प्रावधान है। यह धारा गैर जमानती नहीं है। इसलिए कई बार पुलिस की पकड़ से बाहर अपराधी जमानत पर छूट जाते हैं। अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने बताया कि यह धारा बहुत मजबूत नहीं है। गैर जमानती धारा नहीं होने के चलते अपराधियों में इसका खौफ नहीं है। उन्होंने बताया कि शराब के ज्यादातर मामलों में आरोपी अपना जुर्म कबूल कर लेते हैं। इसके बाद जुर्माने के साथ ही टीआसी की सजा के बाद इन्हें छोड़ दिया जाता है। शायद यही कारण है कि बड़ी संख्या में पकड़ा धकड़ी के बाद भी शराब का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है। आंकड़े बताते हैं कि आबकारी विभाग की ओर से साल 2016-17 में अवैध शराब के 633 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 260 अपराधियों को कोर्ट से सजा हुई। इस दौरान 11 हजार लीटर अवैध शराब पकड़ी गई। जिला आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि साल 2017-18 में 628 मुकदमों में से 391 आरोपियों को ही सजा हुई, बाकी जमानत पर छूट गए। अधिवक्ता अनित चौधरी का कहना है कि कानून को कड़ा बनाकर ही अवैध शराब के कारोबार को रोका जा सकता है।
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