{"_id":"5afc65fa4f1c1bce408b5d18","slug":"91526490618-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हां खेतों में लहलहाती फसल को देखकर भी चिंतित नजर आते हैं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हां खेतों में लहलहाती फसल को देखकर भी चिंतित नजर आते हैं किसान
Updated Wed, 16 May 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नीरज शर्मा
लक्सर।
गंगा के खादर की करीब पांच हजार बीघा जमीन की हदबंदी नहीं होने से वह यूपी और उत्तराखंड के लोगों के बीच झगड़े की वजह बनी हुई है। इस भूमि के स्वामित्व को लेकर राज्य गठन के बाद से ही खूनी रंजिशें चल रही हैं। बावजूद इसके दोनों प्रदेशों के अधिकारी मामले का निपटारा करने की ठोस पहलकदमी करते नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में स्थिति यह बनी हुई है कि फसल बोता कोई है और काट कर दूसरा ले जाता है। इससे किसानों में टकराव होता रहता है।
खादर क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि की हदबंदी नहीं होने से फसलों को तहस नहस करना, मारपीट करना, ट्यूबवेलों पर लगी पानी की मोटरों को नुकसान पहुंचाने जैसे सैकड़ों मामले हैं। इसके साथ ही खेतों में खड़ी फसल को लेकर यूपी और उत्तराखंड के किसानों के बीच कई बार खूनी खेल हो चुका है। किसान सुरेंद्र एवं ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश के किसान अपनी हदें पार कर उनकी कृषि भूमि की जुताई कर फसलें उगा लेते हैं। जब वह अपनी फसलों की जुताई करने के लिए खेतों पर पहुंचते हैं तो बिजनौर क्षेत्र के किसान उनके साथ मरने- मारने पर उतारु हो जाते हैं। बिजनौर जनपद का पुलिस प्रशासन भी यूपी के किसानों का साथ देते हैं। उत्तराखंड की पुलिस और तहसील प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। तुगलपुर के किसान नरेंद्र चौधरी, विनोद कुमार, महिपाल चौधरी व जसवीर सिंह आदि का कहना है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की ही सरकार है। इसके बावजूद समस्या के समाधान में देरी हो रही है। उनका कहना है कि राज्य गठन से पहले से ही इस भूमि पर वह कब्जा काश्त करते आए हैं।
इन गांवों की कृषि भूमि पर है विवाद
यूपी-उत्तराखंड की सीमा पर लक्सर क्षेत्र के रामपुर रायघटी की 1500 बीघा, गंगदासपुर में 600 बीघा और महराजपुर गांव में 400 बीघा भूमि पर विवाद है। इसके अलावा खानपुर क्षेत्र के बादशाहपुर गांव के जंगल में 1000 बीघा पर भूमि पर बिजनौर के रामसहायवाला गांव के ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है। वहीं शेरपुर बेला, माडाबेला व चंद्रपुरी गांव की करीब 2000 बीघा भूमि पर बिजनौर के हिम्मतपुर, बेलाव व तुगलपुर गांव के ग्रामीणों का कब्जा है।
विज्ञापन
दर्जनों बार हुआ है संघर्ष
यहां किसानों के बीच खूनी संघर्ष होता रहा है। किसानों के बीच लाठी डंडे चलना आम बात है। पूर्व में हुए संघर्ष के दौरान गोली लगने से एक किसान की मौत भी हो चुकी है। कई बार किसान गोलियों से घायल भी हुए हैं। करीब 10 वर्ष पहले भी फसल काटने को लेकर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच कई राउंड फायरिंग हुई थी। तब खनापुर क्षेत्र के दो किसान गोली लगने से घायल हो गए थे। बाद में पुलिस के पहुंचने पर दोनों ओर के किसान मौके से भाग गए थे।
उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच सीमा विवाद का मामला पहले से चला आ रहा है। बिजनौर तहसील के अधिकारियो के साथ बैठक कर भूमि की पैमाइश करने के बाद इसकी हदबंदी की जाएगी तथा विवाद का निपटारा किया जाएगा।
- कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम लक्सर
लक्सर।
गंगा के खादर की करीब पांच हजार बीघा जमीन की हदबंदी नहीं होने से वह यूपी और उत्तराखंड के लोगों के बीच झगड़े की वजह बनी हुई है। इस भूमि के स्वामित्व को लेकर राज्य गठन के बाद से ही खूनी रंजिशें चल रही हैं। बावजूद इसके दोनों प्रदेशों के अधिकारी मामले का निपटारा करने की ठोस पहलकदमी करते नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में स्थिति यह बनी हुई है कि फसल बोता कोई है और काट कर दूसरा ले जाता है। इससे किसानों में टकराव होता रहता है।
खादर क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि की हदबंदी नहीं होने से फसलों को तहस नहस करना, मारपीट करना, ट्यूबवेलों पर लगी पानी की मोटरों को नुकसान पहुंचाने जैसे सैकड़ों मामले हैं। इसके साथ ही खेतों में खड़ी फसल को लेकर यूपी और उत्तराखंड के किसानों के बीच कई बार खूनी खेल हो चुका है। किसान सुरेंद्र एवं ब्रह्मपाल सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश के किसान अपनी हदें पार कर उनकी कृषि भूमि की जुताई कर फसलें उगा लेते हैं। जब वह अपनी फसलों की जुताई करने के लिए खेतों पर पहुंचते हैं तो बिजनौर क्षेत्र के किसान उनके साथ मरने- मारने पर उतारु हो जाते हैं। बिजनौर जनपद का पुलिस प्रशासन भी यूपी के किसानों का साथ देते हैं। उत्तराखंड की पुलिस और तहसील प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। तुगलपुर के किसान नरेंद्र चौधरी, विनोद कुमार, महिपाल चौधरी व जसवीर सिंह आदि का कहना है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की ही सरकार है। इसके बावजूद समस्या के समाधान में देरी हो रही है। उनका कहना है कि राज्य गठन से पहले से ही इस भूमि पर वह कब्जा काश्त करते आए हैं।
विज्ञापन
इन गांवों की कृषि भूमि पर है विवाद
यूपी-उत्तराखंड की सीमा पर लक्सर क्षेत्र के रामपुर रायघटी की 1500 बीघा, गंगदासपुर में 600 बीघा और महराजपुर गांव में 400 बीघा भूमि पर विवाद है। इसके अलावा खानपुर क्षेत्र के बादशाहपुर गांव के जंगल में 1000 बीघा पर भूमि पर बिजनौर के रामसहायवाला गांव के ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है। वहीं शेरपुर बेला, माडाबेला व चंद्रपुरी गांव की करीब 2000 बीघा भूमि पर बिजनौर के हिम्मतपुर, बेलाव व तुगलपुर गांव के ग्रामीणों का कब्जा है।
विज्ञापन
दर्जनों बार हुआ है संघर्ष
यहां किसानों के बीच खूनी संघर्ष होता रहा है। किसानों के बीच लाठी डंडे चलना आम बात है। पूर्व में हुए संघर्ष के दौरान गोली लगने से एक किसान की मौत भी हो चुकी है। कई बार किसान गोलियों से घायल भी हुए हैं। करीब 10 वर्ष पहले भी फसल काटने को लेकर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच कई राउंड फायरिंग हुई थी। तब खनापुर क्षेत्र के दो किसान गोली लगने से घायल हो गए थे। बाद में पुलिस के पहुंचने पर दोनों ओर के किसान मौके से भाग गए थे।
उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच सीमा विवाद का मामला पहले से चला आ रहा है। बिजनौर तहसील के अधिकारियो के साथ बैठक कर भूमि की पैमाइश करने के बाद इसकी हदबंदी की जाएगी तथा विवाद का निपटारा किया जाएगा।
- कौस्तुभ मिश्र, एसडीएम लक्सर