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दूषित पानी से मिलेगी निजात सुधरेगी सेहत
Updated Sun, 25 Feb 2018 12:44 AM IST
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रुड़की। रुड़की शहर से सटे करीब दस हजार की आबादी वाले पाड़ली गूर्जर गांव के लोगों को दूषित जल और उससे होने वाली बीमारी से निजात मिलने वाली है। पानी में तमाम तरह की परेशानियां होने के कारण यहां के लोग दांत पीले और पेट संबंधी बीमारियों से ज्यादा प्रभावित हो रहे थे। सरकारी सर्वेक्षण में भी यहां पानी दूषित पाया गया था। अब जल निगम की ओर से यहां सोलर आधारित प्लांट लगाकर जनता की समस्या का समाधान किया गया है।
जिले के सबसे बड़े गांवों में शुमार पाड़ली गूर्जर की आबादी करीब दस हजार के ज्यादा है। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो यहां करीब तीन साल पहले लिए गए पानी के नमूनों में लौह तत्व और फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई। इससे बड़ी संख्या में लोगों को दांत पीले होने के साथ ही पेट तथा त्वचा आदि के रोग की शिकायत थी। इस पर गांव में पेयजल के नमूने लिए गए। जिन्हें टेस्ट कराया गया प्रयोगशाला में किए गए प्रयोगों में पाया गया कि पीने योग्य पानी में फ्लोराइड की मात्रा करीब 1.05 मिलीलीटर प्रति लीटर होनी चाहिए लेकिन यह मात्रा 1.09 से 2.0 तक पाई गई थी। इससे निजात दिलाने के लिए गांव में पांच स्थानों पर सोलर आधारित फ्लोराइड रिमूवर प्लांट लगाया गया है। यह ऐसी मशीन है जो पेयजल को शुद्ध कर आगे भेजती है। यह आरओ सोलर प्लांट बिना बिजली के चलने के कारण इस पर कनेक्शन कटने जैसे संभावना भी नहीं रहेगी। जलनिगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद मीसम ने सहायक अभियंता डीएस नेगी और ग्रामीणों के साथ शनिवार को गांव में पहुंचकर योजना का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्कूल समेत पांच सार्वजनिक स्थलों पर इन पांच यूनिटों को स्थापित किया गया है। जरुरत के हिसाब से लोग यहां से पानी ले सकेंगे। यह प्रदेश का पहला गांव बन गया है जिसमें केंद्र की पेयजल योजना के तहत यह प्लांट लगाया गया है।
कई और स्थानों पर भी होगा यह प्रयोग
जल निगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद मीीसम ने बताया कि कई अन्य गांवों में भी पेयजल की जांच कराई जा रही है। आरओ सोलर प्लांट का यह प्रयोग ऐसे अन्य गांवों में भी किया जा सकता है।
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सांसद के प्रयासों को सराहा
पाड़ली गांव के पूर्व प्रधान मोहम्मद बहरोज आलम की मानें तो वर्ष 2015 में उनके ग्राम प्रधान के कार्यकाल में पहली बार पेयजल दूषित पाए जाने की शिकायत मिली थी। तब इसकी जांच करार्ठ गई थी। बाद में सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की मदद से केंद्र की योजना के तहत यह प्लांट लगाया जा सका। गांववासी इसके लिए सांसद का नागरिक अभिनंदन भी करेंगे। ग्रामीण जुबेर अहमद, साजिद, मुर्सलीन, और तमरेूज ने बताया कि गांवों में अनेक ग्रामीण दूषित पानी के कारण बीमारी की चपेट में आ गए थे जिस कारण यह मांग तेजी से उठाई गई।
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जिले के सबसे बड़े गांवों में शुमार पाड़ली गूर्जर की आबादी करीब दस हजार के ज्यादा है। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो यहां करीब तीन साल पहले लिए गए पानी के नमूनों में लौह तत्व और फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई। इससे बड़ी संख्या में लोगों को दांत पीले होने के साथ ही पेट तथा त्वचा आदि के रोग की शिकायत थी। इस पर गांव में पेयजल के नमूने लिए गए। जिन्हें टेस्ट कराया गया प्रयोगशाला में किए गए प्रयोगों में पाया गया कि पीने योग्य पानी में फ्लोराइड की मात्रा करीब 1.05 मिलीलीटर प्रति लीटर होनी चाहिए लेकिन यह मात्रा 1.09 से 2.0 तक पाई गई थी। इससे निजात दिलाने के लिए गांव में पांच स्थानों पर सोलर आधारित फ्लोराइड रिमूवर प्लांट लगाया गया है। यह ऐसी मशीन है जो पेयजल को शुद्ध कर आगे भेजती है। यह आरओ सोलर प्लांट बिना बिजली के चलने के कारण इस पर कनेक्शन कटने जैसे संभावना भी नहीं रहेगी। जलनिगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद मीसम ने सहायक अभियंता डीएस नेगी और ग्रामीणों के साथ शनिवार को गांव में पहुंचकर योजना का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्कूल समेत पांच सार्वजनिक स्थलों पर इन पांच यूनिटों को स्थापित किया गया है। जरुरत के हिसाब से लोग यहां से पानी ले सकेंगे। यह प्रदेश का पहला गांव बन गया है जिसमें केंद्र की पेयजल योजना के तहत यह प्लांट लगाया गया है।
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कई और स्थानों पर भी होगा यह प्रयोग
जल निगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद मीीसम ने बताया कि कई अन्य गांवों में भी पेयजल की जांच कराई जा रही है। आरओ सोलर प्लांट का यह प्रयोग ऐसे अन्य गांवों में भी किया जा सकता है।
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सांसद के प्रयासों को सराहा
पाड़ली गांव के पूर्व प्रधान मोहम्मद बहरोज आलम की मानें तो वर्ष 2015 में उनके ग्राम प्रधान के कार्यकाल में पहली बार पेयजल दूषित पाए जाने की शिकायत मिली थी। तब इसकी जांच करार्ठ गई थी। बाद में सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की मदद से केंद्र की योजना के तहत यह प्लांट लगाया जा सका। गांववासी इसके लिए सांसद का नागरिक अभिनंदन भी करेंगे। ग्रामीण जुबेर अहमद, साजिद, मुर्सलीन, और तमरेूज ने बताया कि गांवों में अनेक ग्रामीण दूषित पानी के कारण बीमारी की चपेट में आ गए थे जिस कारण यह मांग तेजी से उठाई गई।