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यहां मन्नतें पूरी करने के लिए की जाती है चोरी
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:19 AM IST
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चुड़ियाला। आपके लिए यह बात चौंकाने वाली हो सकती है कि चोरी करने से भी मन की मुराद पूरी हो सकती है, लेकिन चुड़ियाला स्थित मां दुर्गा के सिद्धपीठ में आने के बाद सुनने में अजीब सी लगने वाली यह बात हकीकत है। सालों से हजारों लोग इसके गवाह बन चुके हैं जिन्होंने यहां आकर लोकड़ा (लकड़ी का टुकड़ा) चुराया और इसके बाद घर में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। संतान की चाह में दुखियारे बनकर आने वाले लोग मुराद पूरी होने के बाद अषाढ़ माह में फिर से मां के चौखट पर ढोल-नगाड़े के साथ पहुंचते हैं और चुराए लोकड़े के साथ एक अन्य लोकड़ा पुत्र के हाथों से चढ़वाते हैं। इन दिनों नवरात्र में इस मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ है।
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पौराणिक महत्व से जुड़ी है मंदिर की गाथा
-मंदिर के पुजारी पंडित अनिरुद्ध शर्मा के अनुसार माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किए जाने से क्षुब्ध माता सती ने यज्ञ में कूदकर उसे विध्वंस कर दिया था। शिव जब माता सती के मृत शरीर को ले जा रहे थे। उस समय माता सती का चूड़ामणि इस स्थान पर गिर गया था। इसके बाद यहां माता की पिंडी स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यह प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर कालांतर मे श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना है। इन दिनों मंदिर प्रांगण में मेले का भी आयोजन होता है।
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शेर भी टेकते थे पिंडी पर मत्था
- कभी छोटे परिसर वाला मंदिर अब विशाल परिसर में तबदील हो गया है। यहां कभी घनघोर जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर खुलेआम विचरण करते थे। यही नहीं शेरों की दहाड़ से पूरा क्षेत्र गुंजा करती थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज इस बात की जानकारी देते थे कि शेर रोज माता की पिंडी पर शाम को मत्था टेकने आते थे।
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ऐसे हुआ भव्य मंदिर का निर्माण
- गांव के बारूमल त्यागी, रामेश्वर त्यागी, कबूल सैनी, रामनाथ शर्मा, चतर सिंह, वेदपाल कश्यप, कांति देवी आदि बताते हैं कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल मे शिकार करने आए थे तो जंगल मे घूमते-घूमते उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। उनके पास पुत्र नहीं था तो उन्होंने पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी और पुत्र प्राप्ति के बाद वर्ष 1805 मे भव्य मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद से यह परंपरा चली आ रही है।
इनसेट
इनके पूरी हुई मुराद
- हरियाणा के गुरु ग्राम निवासी विनोद और उनकी पत्नी पूर्णिमा कई साल पहले मंदिर पहुंचे थे। पुजारी अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि उन्होंने लोकड़ा चोरी किया तो उनके यहां संतान प्राप्ति हुई। जिसका नाम उन्होंने राजा रखा। यह दंपति सालों से यहां मत्था टेकने आता हैं।
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- जयपुर (राजस्थान) के महेश और उनकी पत्नी सारिका भी करीब आठ साल पहले यहां पुत्र की प्राप्ति की इच्छा लेकर मंदिर पहुंचे थे। माता के आशीर्वाद से उनके यहां बेटा पैदा हुआ है। दंपति बेटे प्रभात के साथ यहां आते रहते हैं। उनके साथ गांव के कई अन्य लोग भी मंदिर में आते हैं।
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- सहारनपुर के जडोदा पांडा निवासी बिजेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी ममता भी पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए न जाने कहां-कहां भटक चुकी थी। दंपति करीब दस साल पहले यहां पहुंचे थे और मुराद मांगकर लौट गए थे। इनके यहां भी बेटे का जन्म हुआ था। बेटे सिद्धार्थ को लेकर परिवार ने मंदिर में अनुष्ठान आदि कराए।
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- राजकुमार निवासी बहादरपुर खादर ने बताया कि उनके यहां कोई बेटा नहीं था। चुड़ियाला में रहने वाली उनकी बहन शकुंतला देवी ने करीब 15 साल पहले मंदिर में उनके यहां बेटा होने के लिए मुराद मांगी थी। जिसके बाद उनके यहां बेटा पैदा हुआ। जिसका नाम उन्होंने रजत रखा है। इसी तरह में मंदिर में जो मुराद लेकर गया, उसकी मनोकामना पूरी हुई है।
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पौराणिक महत्व से जुड़ी है मंदिर की गाथा
-मंदिर के पुजारी पंडित अनिरुद्ध शर्मा के अनुसार माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किए जाने से क्षुब्ध माता सती ने यज्ञ में कूदकर उसे विध्वंस कर दिया था। शिव जब माता सती के मृत शरीर को ले जा रहे थे। उस समय माता सती का चूड़ामणि इस स्थान पर गिर गया था। इसके बाद यहां माता की पिंडी स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यह प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर कालांतर मे श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना है। इन दिनों मंदिर प्रांगण में मेले का भी आयोजन होता है।
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शेर भी टेकते थे पिंडी पर मत्था
- कभी छोटे परिसर वाला मंदिर अब विशाल परिसर में तबदील हो गया है। यहां कभी घनघोर जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर खुलेआम विचरण करते थे। यही नहीं शेरों की दहाड़ से पूरा क्षेत्र गुंजा करती थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज इस बात की जानकारी देते थे कि शेर रोज माता की पिंडी पर शाम को मत्था टेकने आते थे।
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ऐसे हुआ भव्य मंदिर का निर्माण
- गांव के बारूमल त्यागी, रामेश्वर त्यागी, कबूल सैनी, रामनाथ शर्मा, चतर सिंह, वेदपाल कश्यप, कांति देवी आदि बताते हैं कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल मे शिकार करने आए थे तो जंगल मे घूमते-घूमते उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। उनके पास पुत्र नहीं था तो उन्होंने पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी और पुत्र प्राप्ति के बाद वर्ष 1805 मे भव्य मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद से यह परंपरा चली आ रही है।
इनसेट
इनके पूरी हुई मुराद
- हरियाणा के गुरु ग्राम निवासी विनोद और उनकी पत्नी पूर्णिमा कई साल पहले मंदिर पहुंचे थे। पुजारी अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि उन्होंने लोकड़ा चोरी किया तो उनके यहां संतान प्राप्ति हुई। जिसका नाम उन्होंने राजा रखा। यह दंपति सालों से यहां मत्था टेकने आता हैं।
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- जयपुर (राजस्थान) के महेश और उनकी पत्नी सारिका भी करीब आठ साल पहले यहां पुत्र की प्राप्ति की इच्छा लेकर मंदिर पहुंचे थे। माता के आशीर्वाद से उनके यहां बेटा पैदा हुआ है। दंपति बेटे प्रभात के साथ यहां आते रहते हैं। उनके साथ गांव के कई अन्य लोग भी मंदिर में आते हैं।
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- सहारनपुर के जडोदा पांडा निवासी बिजेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी ममता भी पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए न जाने कहां-कहां भटक चुकी थी। दंपति करीब दस साल पहले यहां पहुंचे थे और मुराद मांगकर लौट गए थे। इनके यहां भी बेटे का जन्म हुआ था। बेटे सिद्धार्थ को लेकर परिवार ने मंदिर में अनुष्ठान आदि कराए।
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- राजकुमार निवासी बहादरपुर खादर ने बताया कि उनके यहां कोई बेटा नहीं था। चुड़ियाला में रहने वाली उनकी बहन शकुंतला देवी ने करीब 15 साल पहले मंदिर में उनके यहां बेटा होने के लिए मुराद मांगी थी। जिसके बाद उनके यहां बेटा पैदा हुआ। जिसका नाम उन्होंने रजत रखा है। इसी तरह में मंदिर में जो मुराद लेकर गया, उसकी मनोकामना पूरी हुई है।