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शुगरमिलों पर किसानों का बकाया 249 करोड़
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:29 AM IST
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रुड़की। क्षेत्र के किसानों का चारों शुगर मिलों पर गन्ने का करीब 254 करोड़ रुपये बकाया है। समय से भुगतान न करने पर यह बकाया राशि बढ़ती जा रही है। भुगतान न होने से किसान परेशान हैं। इसी परेशानी को देखते हुए 22 दिसंबर को जिलाधिकारी ने बैठक में मिल अधिकारियों को भुगतान करने को आदेशित किया था, लेकिन मिलों पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है। जबकि कि सान बकाया के लिए आए दिन गन्ना समितियों और मिलों के चक्कर काट रहे हैं।
लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 28 अक्तूबर से अपना पेराई सत्र शुरू किया है। छह नवंबर से इकबालपुर मिल और दस नवंबर को लक्सर शुगर मिल ने अपना पेराई सत्र शुरू किया है। इसके बाद से जिले की तीनों मिलों के साथ-साथ डोईवाला मिल भी क्षेत्रीय किसानों का गन्ना खरीद रही हैं। किसान अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार मिलों को गन्ना बेच रहे हैं, लेकिन मिलों की भुगतान की स्थिति बेहद धीमी है। अधिकतर मिलें भुगतान की बड़ी राशि दबाए बैठी हैं। लक्सर मिल पर किसानों का करीब 106 करोड़ रुपये बकाया है। इकबालपुर मिल पर 86 करोड़, लिब्बरहेड़ी मिल पर करीब 57 करोड़ और डोईवाला मिल पर करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। इन चारों मिलों पर कुल करीब 254 करोड़ रुपये बकाया है। जरूरतमंद किसान आए दिन भुगतान के लिए मिलों और गन्ना समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर दिन किसानों को टरकाया जा रहा है। जिसकी वजह से अधिकतर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस संबंध में किसान संदीप कुमार, जसवीर सिंह, प्रदीप तोमर, रामकुमार आदि का कहना है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिलता। जो मिलता है उसके लिए भी मिलें समय निर्धारित नहीं कर रही हैं। मिल प्रबंधन किसानों की जरूरतों को नजर अंदाज कर अपनी सुविधा के अनुसार बकाया दे रही हैं। मिलों के इसी रवैये से गन्ना किसान बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को जिलाधिकारी दीपक रावत ने रुड़की तहसील में प्रशासनिक, गन्ना विभाग, गन्ना समितियों और मिल अधिकारियों की बैठक ली थी। उन्होंने बैठक में मौजूद अधिकारियों को आदेश दिए थे कि किसानों के गन्ने का भुगतान समय से करवाएं। साथ ही मिलों की ओर से बाहरी गन्ने की खरीद की जांच के आदेश गन्ना विभाग को दिए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मिल प्रबंधन और गन्ने विभाग पर इस आदेश का असर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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गन्ना आयुक्त ने बाहरी गन्ना खरीद की अनुमति देने से किए हाथ खड़े
नोकेन की स्थिति पर लिब्बरहेड़ी और इकबालपुर मिल ने मांगी थी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। शुगर मिलों ने नो केन की स्थिति होने पर गन्ना विभाग से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसने इसकी अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार वह बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति नहीं दे सकते। ऐसे में मिलों के सामने पेराई सत्र पूरा करना की चुनौती बनी है।
बाहरी गन्ने की खरीद इस पेराई सत्र में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मिलें आए दिन बाहरी गन्ना खरीद रहीं हैं। स्थानीय किसान इसका विरोध कर रहे हैं। लिब्बरहेड़ी और इकबालपुर मिल के अधिकारियों ने नो केन की स्थिति का हवाला देते हुए गन्ना आयुक्त आनंद श्रीवास्तव से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी थी। इस पर सहायक गन्ना आयुक्त आशीष नेगी ने बताया कि बाहरी गन्ने को लेकर अभी तक अनुमति नहीं मिली है। गन्ना आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि बाहरी गन्ने की अनुमति मांगने का उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है। यदि अनुमति मांगी भी जाती है तो वह नियमानुसार नहीं दे सकते।
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लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 28 अक्तूबर से अपना पेराई सत्र शुरू किया है। छह नवंबर से इकबालपुर मिल और दस नवंबर को लक्सर शुगर मिल ने अपना पेराई सत्र शुरू किया है। इसके बाद से जिले की तीनों मिलों के साथ-साथ डोईवाला मिल भी क्षेत्रीय किसानों का गन्ना खरीद रही हैं। किसान अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार मिलों को गन्ना बेच रहे हैं, लेकिन मिलों की भुगतान की स्थिति बेहद धीमी है। अधिकतर मिलें भुगतान की बड़ी राशि दबाए बैठी हैं। लक्सर मिल पर किसानों का करीब 106 करोड़ रुपये बकाया है। इकबालपुर मिल पर 86 करोड़, लिब्बरहेड़ी मिल पर करीब 57 करोड़ और डोईवाला मिल पर करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। इन चारों मिलों पर कुल करीब 254 करोड़ रुपये बकाया है। जरूरतमंद किसान आए दिन भुगतान के लिए मिलों और गन्ना समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर दिन किसानों को टरकाया जा रहा है। जिसकी वजह से अधिकतर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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इस संबंध में किसान संदीप कुमार, जसवीर सिंह, प्रदीप तोमर, रामकुमार आदि का कहना है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिलता। जो मिलता है उसके लिए भी मिलें समय निर्धारित नहीं कर रही हैं। मिल प्रबंधन किसानों की जरूरतों को नजर अंदाज कर अपनी सुविधा के अनुसार बकाया दे रही हैं। मिलों के इसी रवैये से गन्ना किसान बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को जिलाधिकारी दीपक रावत ने रुड़की तहसील में प्रशासनिक, गन्ना विभाग, गन्ना समितियों और मिल अधिकारियों की बैठक ली थी। उन्होंने बैठक में मौजूद अधिकारियों को आदेश दिए थे कि किसानों के गन्ने का भुगतान समय से करवाएं। साथ ही मिलों की ओर से बाहरी गन्ने की खरीद की जांच के आदेश गन्ना विभाग को दिए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मिल प्रबंधन और गन्ने विभाग पर इस आदेश का असर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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गन्ना आयुक्त ने बाहरी गन्ना खरीद की अनुमति देने से किए हाथ खड़े
नोकेन की स्थिति पर लिब्बरहेड़ी और इकबालपुर मिल ने मांगी थी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। शुगर मिलों ने नो केन की स्थिति होने पर गन्ना विभाग से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसने इसकी अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार वह बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति नहीं दे सकते। ऐसे में मिलों के सामने पेराई सत्र पूरा करना की चुनौती बनी है।
बाहरी गन्ने की खरीद इस पेराई सत्र में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मिलें आए दिन बाहरी गन्ना खरीद रहीं हैं। स्थानीय किसान इसका विरोध कर रहे हैं। लिब्बरहेड़ी और इकबालपुर मिल के अधिकारियों ने नो केन की स्थिति का हवाला देते हुए गन्ना आयुक्त आनंद श्रीवास्तव से बाहरी गन्ना खरीदने की अनुमति मांगी थी। इस पर सहायक गन्ना आयुक्त आशीष नेगी ने बताया कि बाहरी गन्ने को लेकर अभी तक अनुमति नहीं मिली है। गन्ना आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि बाहरी गन्ने की अनुमति मांगने का उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है। यदि अनुमति मांगी भी जाती है तो वह नियमानुसार नहीं दे सकते।