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गेंहू पर मौसम का करम, आलू पर सितम
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:58 PM IST
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लक्सर। कई दिनों से जारी हाड़ कंपाने वाली शीत-लहरी जहां गेहूं के लिए वरदान साबित हो रही है वहीं घने कोहरे से आलू की फसल में झुलसा और सरसों में फफूंद लगने के आसार बन गए हैं। जिले के कई क्षेत्रों में फसलों में रोग का प्रकोप शुरू भी हो गया है।
काफी क्षेत्रफल में आलू के पौधों की पत्तियां जल गई हैं। कोहरे के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका है, हालांकि अभी रोग का प्रभाव नजर नहीं आ रहा है, लेकिन अगर हालात यही रहे तो फसल को नुकसान होना निश्चित है। किसान अनुज कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए सर्दी वरदान हो सकती है लेकिन कोहरे के कारण सरसों की फसल में फफूंदी लगने की आशंका है। धनौरी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी पुरुषोतम कुमार बताते हैं कि कोहरे का आलू की फसल पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण न होने के कारण कंद की बढ़वार प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि अगैती की फसल पर इसका प्रभाव कम पड़ता है लेकिन इससे पछैती फसल का उत्पादन कम हो जाता है। तापमान गिरने से पौधोें में चिलिंग इंजरी हो जाती है। आलू के खेत में नमी को बराबर बनाए रखें। संभव हो तो शाम को खेत के चारों ओर धुआं करें। खेत में मैंकोजेप का छिड़काव करें। अगर खेत में झुलसा रोग के लक्षण नजर आने लगें तो साइमोक्सेनिल और मैंकोजेप का घोल बनाकर दस दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। खेतों में हल्की सिंचाई करें व पानी न भरने दें। उन्होंने बताया कि कोहरे के चलते सरसों की फसल में माहू, अल्टरनेरिया और ब्लाइट रोग की आशंका बढ़ जाती है। इससे सरसों के पौधे की पत्तियां गिरने लगती हैं । फलियों में दाने नहीं भर पाते हैं और तेल की उत्पादकता में भी कमी आती है। उन्होंने बताया कि किसानों को खेतों में लगातार नमी को बनाए रखनी चाहिए। इसके लिए हल्की सिंचाई जरूरी है। यूरिया का उपयोग कदापि न करें। किसान डाइमेथोएट.30 ईसी या मिथाइल ओ.डेमेटान 25 ईसी को 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं।
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काफी क्षेत्रफल में आलू के पौधों की पत्तियां जल गई हैं। कोहरे के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका है, हालांकि अभी रोग का प्रभाव नजर नहीं आ रहा है, लेकिन अगर हालात यही रहे तो फसल को नुकसान होना निश्चित है। किसान अनुज कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए सर्दी वरदान हो सकती है लेकिन कोहरे के कारण सरसों की फसल में फफूंदी लगने की आशंका है। धनौरी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी पुरुषोतम कुमार बताते हैं कि कोहरे का आलू की फसल पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण न होने के कारण कंद की बढ़वार प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि अगैती की फसल पर इसका प्रभाव कम पड़ता है लेकिन इससे पछैती फसल का उत्पादन कम हो जाता है। तापमान गिरने से पौधोें में चिलिंग इंजरी हो जाती है। आलू के खेत में नमी को बराबर बनाए रखें। संभव हो तो शाम को खेत के चारों ओर धुआं करें। खेत में मैंकोजेप का छिड़काव करें। अगर खेत में झुलसा रोग के लक्षण नजर आने लगें तो साइमोक्सेनिल और मैंकोजेप का घोल बनाकर दस दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। खेतों में हल्की सिंचाई करें व पानी न भरने दें। उन्होंने बताया कि कोहरे के चलते सरसों की फसल में माहू, अल्टरनेरिया और ब्लाइट रोग की आशंका बढ़ जाती है। इससे सरसों के पौधे की पत्तियां गिरने लगती हैं । फलियों में दाने नहीं भर पाते हैं और तेल की उत्पादकता में भी कमी आती है। उन्होंने बताया कि किसानों को खेतों में लगातार नमी को बनाए रखनी चाहिए। इसके लिए हल्की सिंचाई जरूरी है। यूरिया का उपयोग कदापि न करें। किसान डाइमेथोएट.30 ईसी या मिथाइल ओ.डेमेटान 25 ईसी को 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं।
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