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मिलों पर दादागिरी, आप कब करेंगे भुगतान
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:58 PM IST
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रुड़की। पिछली प्रदेश सरकार ने शुगर मिलों को राहत देने के लिए विगत पेराई सत्र में दो रुपये प्रति क्विंटल आर्थिक अनुदान देने की घोषणा की थी लेकिन आज तक सरकार ने एक पैसा तक जारी नहीं किया है। मिल प्रबंधन आए दिए इसके लिए शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। बावजूद इसके ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पूर्व प्रदेश सरकार ने शुगर मिलों को राहत देने के लिए विगत पेराई सत्र में दो रुपये प्रति क्विंटल आर्थिक अनुदान देने की घोषणा की थी। यह आर्थिक अनुदान प्रदेश सरकार द्वारा सीधे मिलों को दिया जाना था। इस घोषणा से मिलों ने भी राहत की सांस ली थी। जिसके चलते इकबालपुर मिल को छोड़कर अन्य मिलों ने विगत सत्र का पूरा भुगतान जारी कर दिया था। दो रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रदेश सरकार पर अनुदान राशि का पांच करोड़ रुपये बैठता था, लेकिन सरकार ने अभी तक फूटी कोड़ी तक नहीं दी। इस राशि को जारी कराने के लिए मिल मालिक अधिकारियों से लेकर प्रदेश सरकार तक दौड़ धूप कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। जिला गन्ना अधिकारी आशीष नेगी ने बताया कि विगत सत्र का करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। इसे निकलवाने के लिए शुगरमिल मालिक प्रयासरत हैं।
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पूर्व प्रदेश सरकार ने शुगर मिलों को राहत देने के लिए विगत पेराई सत्र में दो रुपये प्रति क्विंटल आर्थिक अनुदान देने की घोषणा की थी। यह आर्थिक अनुदान प्रदेश सरकार द्वारा सीधे मिलों को दिया जाना था। इस घोषणा से मिलों ने भी राहत की सांस ली थी। जिसके चलते इकबालपुर मिल को छोड़कर अन्य मिलों ने विगत सत्र का पूरा भुगतान जारी कर दिया था। दो रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रदेश सरकार पर अनुदान राशि का पांच करोड़ रुपये बैठता था, लेकिन सरकार ने अभी तक फूटी कोड़ी तक नहीं दी। इस राशि को जारी कराने के लिए मिल मालिक अधिकारियों से लेकर प्रदेश सरकार तक दौड़ धूप कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। जिला गन्ना अधिकारी आशीष नेगी ने बताया कि विगत सत्र का करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। इसे निकलवाने के लिए शुगरमिल मालिक प्रयासरत हैं।
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