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भूमि का मुआवजा न मिला तो 26 जनवरी को आत्मदाह की चेतावनी
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का सात साल बाद भी मुआवजा न मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों ने जल्द मुआवजे का भुगतान को सरकार से मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से उन्हें जल्द भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया तो चार बुजुर्ग आत्मदाह को मजबूर होंगे। ग्रामीण आठ माह से मुआवजे को लेकर धरना दे रहे हैं।
झबरेड़ा थाना क्षेत्र के भिस्तीपुर में निर्माणाधीन रेलवे लाइन पर धरने पर बैठे पीड़ित किसानों का कहना है कि उनकी जमीन रेलवे ने 2011 में अधिग्रहण की थी और तब ही कब्जा भी ले लिया था। उस समय लिखित में आश्वासन दिया गया था कि जिस किसान की जमीन रेलवे के लिए अधिग्रहण की गई है उस परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। नौकरी के लालच में आकर किसानों ने अपनी जमीन दो लाख 93 हजार रुपए प्रति बीघा की दर से सरकार को देकर सरकार व शासन का सहयोग किया। अब सरकार लिखित में दी गई शर्त का अनुपालन ही कर रही है। धरने पर उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि 29 मई से धरना चल रहा है, लेकिन आज तक किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 25 जनवरी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो और बढ़ा हुआ मुआवजा या नौकरी नहीं मिलती है तो 26 जनवरी को चार बुजुर्ग जहर खाकर आत्महत्या करेंगे। बताया कि मोहम्मद इरशाद, सागवा कश्यप, नूरहसन और राजेश कुमार आत्मदाह करेंगे। धरना देने वालों में सुनील कुमार ,मोहम्मद अरशद, समुद्र मलिक, मोहम्मद इस्लाम, नेत्रपाल, जुल्फिकार, बारू सिंह, खजान सिंह, सुखपाल सिंह, मोनू कुमार, नेमपाल सिंह, सैयद अली, मोहम्मद इरफान, श्यामसिंह आदि थे।
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रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का सात साल बाद भी मुआवजा न मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों ने जल्द मुआवजे का भुगतान को सरकार से मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से उन्हें जल्द भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया तो चार बुजुर्ग आत्मदाह को मजबूर होंगे। ग्रामीण आठ माह से मुआवजे को लेकर धरना दे रहे हैं।
झबरेड़ा थाना क्षेत्र के भिस्तीपुर में निर्माणाधीन रेलवे लाइन पर धरने पर बैठे पीड़ित किसानों का कहना है कि उनकी जमीन रेलवे ने 2011 में अधिग्रहण की थी और तब ही कब्जा भी ले लिया था। उस समय लिखित में आश्वासन दिया गया था कि जिस किसान की जमीन रेलवे के लिए अधिग्रहण की गई है उस परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। नौकरी के लालच में आकर किसानों ने अपनी जमीन दो लाख 93 हजार रुपए प्रति बीघा की दर से सरकार को देकर सरकार व शासन का सहयोग किया। अब सरकार लिखित में दी गई शर्त का अनुपालन ही कर रही है। धरने पर उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि 29 मई से धरना चल रहा है, लेकिन आज तक किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 25 जनवरी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो और बढ़ा हुआ मुआवजा या नौकरी नहीं मिलती है तो 26 जनवरी को चार बुजुर्ग जहर खाकर आत्महत्या करेंगे। बताया कि मोहम्मद इरशाद, सागवा कश्यप, नूरहसन और राजेश कुमार आत्मदाह करेंगे। धरना देने वालों में सुनील कुमार ,मोहम्मद अरशद, समुद्र मलिक, मोहम्मद इस्लाम, नेत्रपाल, जुल्फिकार, बारू सिंह, खजान सिंह, सुखपाल सिंह, मोनू कुमार, नेमपाल सिंह, सैयद अली, मोहम्मद इरफान, श्यामसिंह आदि थे।
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