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ड्रेनेज सिस्टम का जीआईएस मैप देगा एनआईएच
Updated Thu, 15 Feb 2018 12:28 AM IST
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रुड़की। अब इंजीनियरों का शहर कहे जाने वाले रुड़की में ध्वस्त हो चुके ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी। एनआईएच ड्रेनेज सिस्टम के लिए जीआईएस मैपिंग आधारित प्लान तैयार करने में मदद देगा। ताकि शहर में विभिन्न कालोनियों के ढाल के हिसाब से ड्रेनेज सिस्टम विकास हो सके। प्रशासन की पहल पर संस्थान निदेशक ने इस पर सहमति जताई है। जल्द ही नगर निगम के अधिकारियों एवं संस्थान के वैैैज्ञानिक प्लान तैयार करेंगे।
गौरतलब है कि इस समय शहर में जल निकासी की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित है। कई जगहों पर नाले-नालियां घरों से निकलने वाले पानी की निकासी नहीं कर पा रहे हैं और ओवरफ्लो हो रहे हैं। वहीं कई जगहों पर ऐसी समस्या पैदा हो रही है नालों का स्लोप पानी के बहाव के विपरीत बना है। जिससे नालों में पानी ठहर रहा है और यह पानी लोगों के घरों में वापस पहुंच रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान से मदद लेने का निर्णय लिया गया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि इस बाबत संस्थान निदेशक से वार्ता हुई है। जल्द ही नगर निगम की टीम संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत योजना तैयार करेगी। वहीं नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि जेएम के आदेश पर एनआईएच के अधिकारियों के साथ जल्द ही बैठक कर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में नालों नालियों का निर्माण तकनीकी आधार पर कराने के लिए जीआईएस तकनीक से मैपिंग की जरूरत है। इसमें एनआईएच की मदद ली जाएगी।
अतिक्रमण ने घेरे शहर के नाले और नालियां
रुड़की। शहर के अधिकांश नाले- नालियां अतिक्रमण की जद में है। जल्द ही नहीं चेते तो शहर को फिर से जल भराव की समस्या से जूझना होगा। स्थिति यह है कि जहां एक और शहर में पानी की निकासी के लिए नाली और नालों की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। वहीं दूसरी ओर शहर के अधिकांश नालों पर कब्जा बना हुआ है। इन हालातों में यदि प्रशासन अभी भी नहीं चेता तो आने वाले समयमें फिर से शहर की आधे से ज्यादा आबादी जलभराव की मुसीबत झेलेगी। हैं।
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नीतिका खंडेलवाल ने करीब एक माह पूर्व जल निगम, नगर निगम और जल संस्थान के अधिकारियों की बैठक ली थी। जिसमें खासतौर से बरसातके दिनों में जलभराव से जुड़ने वाले रुड़की शहर की समस्या पर चर्चा की गई। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने तीनों विभागों के अधिकारियों से नाले और नालियों की स्थिति के बाबत रिपोर्ट मांगी थी। बैठक में यह बात भी सामने आई थी कि शहर के अधिकांश स्थानोंपर लोगों ने नालों को ऊपर से सीसी स्लैब डालकर अतिक्रमण कर लिया है। जिंससे नालियों में जमा कूड़े की सफाई नहीं हो पाती है, पानी को निकलने की कोई जगह नहीं मिलती है। जिसके कारण सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं और घरों में पानी घुस जाता है। इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि विभागों से रिपोर्ट मिली है। इस बाबत विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। जिसके लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों से भी मदद ली जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा।
आखिर कब धरातल परउतरेगी 61 करोड़ की योजना
रुड़की। शहर भर में नाले-नालियों के पानी कीनिकासी के ठोस इंतजाम करने के लिए 2013 में प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्नशहरों में सर्वे कराया गया था उस समय जल निगम की ओर से सर्वे करने के बादनाले नालियों के निर्माण, जल निकासी तथा दूषित पानी के ट्रीटमेंट केलिए 61 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई थी। यह डीपीआर शासन को भी प्रेषित करदी गई, लेकिन केंद्र में सत्ता परिवर्तन होने के बाद केंद्र सरकार की ओर सेइस योजना के बाबत बजट जारी नहीं हो सका। साथ ही साथ केंद्र सरकार की ओर सेअमृत योजना की शुरुआत कर दी गई। जिसमें रुड़की शहर को भी चुना गया। जल निगमके अधिकारियों की माने तो अमृत योजना में चयनित होने के बाद रुड़की शहरमें जल निकासी की समस्या का समाधान संबंधित योजना के अंतर्गत तय कर दियागया है। ऐसे में अब अमृत योजना के तहत ही जल निकासी की समस्या का समाधान होसकता है, लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से अमृत योजना के अंतर्गत भी शहर कीजल निकासी के बाबत कोई खाका नहीं खींचा गया है। जिससे साफ हो रहा है किशहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए विभागीय अधिकारियों की ओर से कोईसार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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गौरतलब है कि इस समय शहर में जल निकासी की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित है। कई जगहों पर नाले-नालियां घरों से निकलने वाले पानी की निकासी नहीं कर पा रहे हैं और ओवरफ्लो हो रहे हैं। वहीं कई जगहों पर ऐसी समस्या पैदा हो रही है नालों का स्लोप पानी के बहाव के विपरीत बना है। जिससे नालों में पानी ठहर रहा है और यह पानी लोगों के घरों में वापस पहुंच रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान से मदद लेने का निर्णय लिया गया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि इस बाबत संस्थान निदेशक से वार्ता हुई है। जल्द ही नगर निगम की टीम संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत योजना तैयार करेगी। वहीं नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि जेएम के आदेश पर एनआईएच के अधिकारियों के साथ जल्द ही बैठक कर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में नालों नालियों का निर्माण तकनीकी आधार पर कराने के लिए जीआईएस तकनीक से मैपिंग की जरूरत है। इसमें एनआईएच की मदद ली जाएगी।
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अतिक्रमण ने घेरे शहर के नाले और नालियां
रुड़की। शहर के अधिकांश नाले- नालियां अतिक्रमण की जद में है। जल्द ही नहीं चेते तो शहर को फिर से जल भराव की समस्या से जूझना होगा। स्थिति यह है कि जहां एक और शहर में पानी की निकासी के लिए नाली और नालों की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। वहीं दूसरी ओर शहर के अधिकांश नालों पर कब्जा बना हुआ है। इन हालातों में यदि प्रशासन अभी भी नहीं चेता तो आने वाले समयमें फिर से शहर की आधे से ज्यादा आबादी जलभराव की मुसीबत झेलेगी। हैं।
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नीतिका खंडेलवाल ने करीब एक माह पूर्व जल निगम, नगर निगम और जल संस्थान के अधिकारियों की बैठक ली थी। जिसमें खासतौर से बरसातके दिनों में जलभराव से जुड़ने वाले रुड़की शहर की समस्या पर चर्चा की गई। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने तीनों विभागों के अधिकारियों से नाले और नालियों की स्थिति के बाबत रिपोर्ट मांगी थी। बैठक में यह बात भी सामने आई थी कि शहर के अधिकांश स्थानोंपर लोगों ने नालों को ऊपर से सीसी स्लैब डालकर अतिक्रमण कर लिया है। जिंससे नालियों में जमा कूड़े की सफाई नहीं हो पाती है, पानी को निकलने की कोई जगह नहीं मिलती है। जिसके कारण सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं और घरों में पानी घुस जाता है। इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि विभागों से रिपोर्ट मिली है। इस बाबत विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। जिसके लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों से भी मदद ली जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा।
आखिर कब धरातल परउतरेगी 61 करोड़ की योजना
रुड़की। शहर भर में नाले-नालियों के पानी कीनिकासी के ठोस इंतजाम करने के लिए 2013 में प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्नशहरों में सर्वे कराया गया था उस समय जल निगम की ओर से सर्वे करने के बादनाले नालियों के निर्माण, जल निकासी तथा दूषित पानी के ट्रीटमेंट केलिए 61 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई थी। यह डीपीआर शासन को भी प्रेषित करदी गई, लेकिन केंद्र में सत्ता परिवर्तन होने के बाद केंद्र सरकार की ओर सेइस योजना के बाबत बजट जारी नहीं हो सका। साथ ही साथ केंद्र सरकार की ओर सेअमृत योजना की शुरुआत कर दी गई। जिसमें रुड़की शहर को भी चुना गया। जल निगमके अधिकारियों की माने तो अमृत योजना में चयनित होने के बाद रुड़की शहरमें जल निकासी की समस्या का समाधान संबंधित योजना के अंतर्गत तय कर दियागया है। ऐसे में अब अमृत योजना के तहत ही जल निकासी की समस्या का समाधान होसकता है, लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से अमृत योजना के अंतर्गत भी शहर कीजल निकासी के बाबत कोई खाका नहीं खींचा गया है। जिससे साफ हो रहा है किशहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए विभागीय अधिकारियों की ओर से कोईसार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।