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आरोपी प्रोफेसरों के समर्थन में छात्रों ने निकाला शांति मार्च
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
एक उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान की छात्रा के यौन उत्पीड़न और जातीय भेदभाव के आरोप में नामजद प्रोफेसरों के समर्थन में संस्थान के छात्रों और प्रोफेसरों ने शांति मार्च निकाला। उन्होंने हाथों में बैनर लेकर दोनों प्रोफेसरों को बेहद शालीन बताया। साथ ही मांग की कि पुलिस प्रशासन को बिना राजनीतिक दबाव के मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
हाल ही में संस्थान की एक छात्रा ने प्रोफेसर, डीन और निदेशक समेत छह लोगों पर यौन उत्पीड़न एवं जातिगत भेदभाव का आरोप लगाकर पुलिस को तहरीर दी थी। इसके बाद एसएसपी ने एसआईटी जांच का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद बीते बुधवार की रात को संस्थान के दो प्रोफेसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बृहस्पतिवार को कई छात्रों ने संस्थान के मुख्य भवन के बाहर आरोपी प्रोफेसरों के पक्ष में नारेबाजी की थी। इसी कड़ी में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे संस्थान के छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने शांति मार्च निकाला। इस दौरान संस्थान के सहारनपुर स्थित कैंपस के छात्र ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से हैं और संबंधित प्रोफेसर के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी प्रोफेसर के व्यवहार में भेदभाव महसूस नहीं किया है। वे सभी की मदद करते हैं। एक और छात्र ने कहा कि आरोप लगा रही छात्रा की पढ़ाई संबंधी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होती थी, इसलिए दबाव बनाने के लिए उसने इस तरह के आरोप लगाए हैं। मार्च निकालने वाली छात्राओं ने कहा कि आरोप लगा रही छात्रा छोटी-छोटी बातों पर रूखा व्यवहार करती है। कभी भी लैब में काम नहीं करती। इसलिए दबाव बनाने के लिए उसने झूठे आरोप लगाए हैं। प्रोफेसरों ने भी आरोपी प्रोफेसरों के व्यवहार को शालीन बताते हुए कहा कि आरोप झूठे हैं।
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एक उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान की छात्रा के यौन उत्पीड़न और जातीय भेदभाव के आरोप में नामजद प्रोफेसरों के समर्थन में संस्थान के छात्रों और प्रोफेसरों ने शांति मार्च निकाला। उन्होंने हाथों में बैनर लेकर दोनों प्रोफेसरों को बेहद शालीन बताया। साथ ही मांग की कि पुलिस प्रशासन को बिना राजनीतिक दबाव के मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
हाल ही में संस्थान की एक छात्रा ने प्रोफेसर, डीन और निदेशक समेत छह लोगों पर यौन उत्पीड़न एवं जातिगत भेदभाव का आरोप लगाकर पुलिस को तहरीर दी थी। इसके बाद एसएसपी ने एसआईटी जांच का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद बीते बुधवार की रात को संस्थान के दो प्रोफेसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बृहस्पतिवार को कई छात्रों ने संस्थान के मुख्य भवन के बाहर आरोपी प्रोफेसरों के पक्ष में नारेबाजी की थी। इसी कड़ी में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे संस्थान के छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने शांति मार्च निकाला। इस दौरान संस्थान के सहारनपुर स्थित कैंपस के छात्र ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से हैं और संबंधित प्रोफेसर के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी प्रोफेसर के व्यवहार में भेदभाव महसूस नहीं किया है। वे सभी की मदद करते हैं। एक और छात्र ने कहा कि आरोप लगा रही छात्रा की पढ़ाई संबंधी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होती थी, इसलिए दबाव बनाने के लिए उसने इस तरह के आरोप लगाए हैं। मार्च निकालने वाली छात्राओं ने कहा कि आरोप लगा रही छात्रा छोटी-छोटी बातों पर रूखा व्यवहार करती है। कभी भी लैब में काम नहीं करती। इसलिए दबाव बनाने के लिए उसने झूठे आरोप लगाए हैं। प्रोफेसरों ने भी आरोपी प्रोफेसरों के व्यवहार को शालीन बताते हुए कहा कि आरोप झूठे हैं।
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