फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rishikesh News ›   Wheel of GMVN running on 11 buses

11 बसों के भरोसे चल रहा जीएमवीएन का पहिया

Sun, 27 Mar 2022 11:42 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2022 11:42 PM IST
विज्ञापन
Wheel of GMVN running on 11 buses
गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) चारधाम यात्रा में पैकेज के अनुसार बुकिंग करता है। निगम के पास पर्यटक आवास गृह और कर्मचारी पर्याप्त हैं, लेकिन बसें पूरी नहीं नहीं हैं। 11 बसों से ही चारधाम की यात्रा संचालित होती है। अपने पास बसें न होने से जीएमवीएन को प्राइवेट ऑपरेटरों से किराये पर बसें लेनी पड़ती हैं। नौ साल से बस बेड़े बढ़ाने की मांग हो रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
विज्ञापन

राज्य गठन से पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश में गढ़वाल मंडल विकास निगम के पास 32 बसें और 15 टैक्सियां थीं। समय के साथ बसों और टैक्सियों की आयु पूरी हो गई। उसके बाद विभाग ने इन बसों व टैक्सियों को नीलाम कर दिया। 2013 में गढ़वाल मंडल विकास निगम यात्रा कार्यालय ऋषिकेश को 11 नई बसें मिली थीं। इससे पहले सात इनोवा कार मिली थीं। उम्मीद थी कि राज्य गठन के बाद जीएमवीएन के बेड़े में और बसें शामिल की जाएंगी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी बेड़े में एक भी बस नहीं बढ़ी। ऐसे में यदि बुकिंग 11 बसों से अधिक होती है तो जीएमवीएन को ई-टेंडरिंग के जरिए प्राइवेट बस ऑपरेटरों से बसें किराये पर लेनी पड़ती हैं। बताया जा रहा है कि बस बेड़े में करीब 18 बसों की और आवश्यकता है। गढ़वाल मंडल विकास निगम यात्रा कार्यालय ऋषिकेश की ओर से बेड़े में और बसें शामिल करने के कई प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन उसके बाद भी बसों की संख्या नहीं बढ़ी। संवाद
विज्ञापन

दो कैरा वैन हैं निगम के पास
निगम की दो बसों को कैरा वैन के रूप में विकसित किया गया है। ये दोनों कैरा वैन लैंसडौन में खड़ी हैं। पर्यटकों की ओर से इनकी बुकिंग की जाती है। इन वैन के अंदर सुविधाएं हैं। घर जैसे बना रखा है। सोफा, बेड, कीचन आदि सारी सुविधाएं हैं, जिसे पर्यटक काफी पसंद करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एलबीएस अकादमी और एफआरआई की मिलती है बुकिंग
चारधाम यात्रा के अलावा गढ़वाल मंडल विकास निगम की बसों की बुकिंग लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी मसूरी और वन अनुसंधान संस्थान देहरादून की ओर से की जाती है। बसें अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्रों को देश के अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण के लिए ले जाई जाती हैं। यदि बसों की बसों की कमी पड़ जाती है तो प्राइवेट बसें बुलानी पड़ती हैं।

बसों का बेड़ा छोटा होने के कारण हमें ई-टेंडरिंग से प्राइवेट बसें किराये पर लेनी पड़ती हैं। हमारे चालक परिचालक पर्याप्त हैं। बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए शासन में कई प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
-एसपीएस रावत, एजीएम, गढ़वाल मंडल विकास निगम ऋषिकेेश
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed