एम्स ऋषिकेश व दिल्ली के संयुक्त प्रोग्राम के तहत जनरल थोरेसिक सर्जरी कार्यशाला के दूसरे दिन 12 वर्षीय किशोरी की पहली सफल सर्जरी की गई। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. रविकांत ने कहा कि ऐसे जटिल ऑपरेशनों में एजूकेशन एवं स्किल को बांटने से ही इस क्षेत्र का विकास संभव है। चिकित्सकों ने बताया कि मुजफ्फरनगर निवासी एक 12 वर्षीय किशोरी की छाती के दायीं ओर काफी समय से बड़ी गांठ थी। इस वजह से किशोरी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।
दिल्ली एम्स के थोरेसिक सर्जन डॉ. विप्लव मिश्रा के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने गांठ का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। उन्होंने बताया कि किशोरी की छाती में बनी गांठ बुरी तरह से पूरे फेफड़े व मुख्य धमनियों से चिपकी हुई थी। इसे बड़ी सावधानी से मरीज की छाती से निकाला गया। सर्जरी के दौरान एनेस्थिसिया टीम का नेतृत्व डॉ. यशवंत सिंह पयाल और डॉ. डीके त्रिपाठी ने किया। ऑपरेशन टीम में डॉ. नरेंद्र चौधरी, डॉ. मधुर उनियाल, डॉ. अजय कुमार, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. अवनीश आदि शामिल थे।