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उत्तराखंड की लाइफलाइन एम्स में नहीं है बर्न यूनिट

Tue, 01 Mar 2022 11:33 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:33 PM IST
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There is no burn unit in Uttarakhand's lifeline AIIMS
41 एम्स ऋषिकेश - फोटो : RISHIKESH
उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के अस्पतालों से गंभीर मरीज और घायल हायर सेंटर रेफर होने के बाद उपचार के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में लाए जाते हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि एम्स जैसा उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान भी आग से झुलसे मरीजों को देहरादून रेफर कर रहा है। ऋषिकेश में एम्स निर्माण के 10 साल बीतने के बाद भी अस्पताल में बर्न यूूनिट स्थापित नहीं हो पाई है।
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एम्स ऋषिकेश आपातकालीन चिकित्सा सुविधा के मामले में उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तरप्रदेश की लाइफ लाइन माना जाता है। एम्स में अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर है। गंभीर दुर्घटना की स्थिति में घायल को सीधा एम्स में उपचार के लिए लाया जाता है। समय पर इलाज मिलने से मरीजों की जान भी बच जाती है, लेकिन गंभीर और दुर्घटनाग्रस्त रेफर मरीजों के लिए संजीवनी साबित होने वाला एम्स आग से झुलसे मरीजों के लिए रेफरल सेंटर बन गया है। यहां डीप बर्न के सभी मरीजों को देहरादून रेफर कर दिया जाता है। गौर करने वाली बात है कि वर्ष 2010 में ऋषिकेश में एम्स की स्थापना हुई थी। अस्पताल में वर्ष 2013 में ओपीडी, आईपीडी और वर्ष 2014 में ट्रामा सेंटर को शुरू किया गया था। इसके बाद 100 विशेषज्ञ चिकित्सा क्लीनिक के साथ मील का पत्थर साबित होने वाली हेली एंबुलेंस जैसी चिकित्सा सेवाएं एम्स की उपलब्धियों में शामिल रही हैं, लेकिन इन 10 सालों के उपलब्धियों के दौर में एम्स में आग से झुलसे मरीजों के लिए बर्न यूनिट नहीं बन पाई।
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एम्स के मौजूदा भवन में नहीं बन सकती यूनिट
एम्स ऋषिकेश के मौजूदा भवनों में बर्न यूनिट स्थापित नहीं हो सकती है। एम्स की सभी भवनों में सेंट्रेलाइज्ड वातानुकूलित सिस्टम है। झुलसे हुए मरीजों को बैक्टीरियल, फंगल और वायरल इंफेक्शन का अधिक खतरा रहता है। सेंट्रेलाइज्ड वातानुकूलित सिस्टम में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस के पनपने की संभावना रहती है। ऐसे में बार बार बर्न यूनिट को विसंक्रमित करना संभव नहीं है। ऐसे में बर्न यूनिट के लिए संस्था को अलग से खुले स्थान पर सेटअप तैयार करना होगा।
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एम्स में बर्न यूनिट नही है। सुपरफीशल बर्न के मरीजों को भर्ती किया जाता है। डीप बर्न के मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। एम्स के सभी भवनों में सेंट्रेलाइज्ड एसी सिस्टम है। इसके चलते भवनों में बर्न यूनिट स्थापित करना संभव नहीं है।
-हरीश मोहन थपलियाल, पीआरओ, एम्स ऋषिकेश
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