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परमार्थ निकेतन से शांतिकुंज रवाना हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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ऋषिकेश। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, भारत की प्रथम महिला सविता कोविंद और उनकी बेटी स्वाति कोविंद परमार्थ निकेतन से सुबह शांतिकुंज के लिए रवाना हुए। आश्रम से विदा होने से पहले राष्ट्रपति ने परमार्थ आश्रम परिसर में रूद्राक्ष का पौधा रोपा। वहीं कल्पवृक्ष के दर्शन भी किए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद परमार्थ निकेतन से 11:15 बजे एम्स के लिए रवाना हुए। एम्स से हैलीकाप्टर से रायवाला पहुंचे, वहां से शांतिकुंज तक सड़क से देव संस्कृति विश्व विद्यालय पहुंचे। रवाना होने से पहले स्वामी चिदानंद सरस्वती ने राष्ट्रपति से सीवेज प्रबंधन, स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पराली समस्या का समाधान, नेशनल गंगा राइट्स, दुनिया भर के विभिन्न धर्मों और आस्था आधारित संगठनों, स्कूलों और अंतर धार्मिक संगठनों के साथ युवाओं के जीवन कौशल के लिए किए जा रहे कार्यक्रमों पर चर्चा की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि स्वर्गाश्रम सचमुच स्वर्गाश्रम है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज का सवेरा ऐतिहासिक और स्वर्णिम है। जब हमारे देश के राष्ट्रपति, जिनको मैं एक संत राष्ट्रपति की तरह ही देखता हूं, वह हमारे साथ हैं। सबके लिए बड़ा ही सुखद अनुभव रहा। हम आजादी का महोत्सव मना रहे हैं। मुझे लगता है कि सच्ची आजादी जिन संस्कारों और संस्कृति ने दी, वही इस देश का सच्चा अमृत है। यह अमृत इसी धरती से निकलकर पूरे विश्व तक पहुंचा। स्वामी ने कहा कि राष्ट्रपति भारतीय संस्कृति को जीने वाले व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति का दर्शन पूरे विश्व को दिया है। वह एक साधारण परिवार में जन्मे, लेकिन असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। उनका जीवन युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा कि विद्वत्ता और संस्कार होने पर कैसे व्यक्ति जीवन की हर ऊंचाई को छू सकता है। इस पूरी यात्रा में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह भी उनके साथ रहे। उन्होंने कहा कि सचमुच उत्तराखंड की धरती दिव्य धरती है। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती द्वारा स्वलिखित पुस्तक ‘हॉलीवुड टू द हिमालयज-जर्नी ऑफ हीलिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन’ पुस्तक राष्ट्रपति को भेंट की गई। स्वामी चिदानंद मुनि ने राष्ट्रपति को अगले वर्ष मार्च 2022 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के उद्घाटन या समापन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद परमार्थ निकेतन से 11:15 बजे एम्स के लिए रवाना हुए। एम्स से हैलीकाप्टर से रायवाला पहुंचे, वहां से शांतिकुंज तक सड़क से देव संस्कृति विश्व विद्यालय पहुंचे। रवाना होने से पहले स्वामी चिदानंद सरस्वती ने राष्ट्रपति से सीवेज प्रबंधन, स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पराली समस्या का समाधान, नेशनल गंगा राइट्स, दुनिया भर के विभिन्न धर्मों और आस्था आधारित संगठनों, स्कूलों और अंतर धार्मिक संगठनों के साथ युवाओं के जीवन कौशल के लिए किए जा रहे कार्यक्रमों पर चर्चा की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि स्वर्गाश्रम सचमुच स्वर्गाश्रम है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज का सवेरा ऐतिहासिक और स्वर्णिम है। जब हमारे देश के राष्ट्रपति, जिनको मैं एक संत राष्ट्रपति की तरह ही देखता हूं, वह हमारे साथ हैं। सबके लिए बड़ा ही सुखद अनुभव रहा। हम आजादी का महोत्सव मना रहे हैं। मुझे लगता है कि सच्ची आजादी जिन संस्कारों और संस्कृति ने दी, वही इस देश का सच्चा अमृत है। यह अमृत इसी धरती से निकलकर पूरे विश्व तक पहुंचा। स्वामी ने कहा कि राष्ट्रपति भारतीय संस्कृति को जीने वाले व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति का दर्शन पूरे विश्व को दिया है। वह एक साधारण परिवार में जन्मे, लेकिन असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। उनका जीवन युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा कि विद्वत्ता और संस्कार होने पर कैसे व्यक्ति जीवन की हर ऊंचाई को छू सकता है। इस पूरी यात्रा में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह भी उनके साथ रहे। उन्होंने कहा कि सचमुच उत्तराखंड की धरती दिव्य धरती है। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती द्वारा स्वलिखित पुस्तक ‘हॉलीवुड टू द हिमालयज-जर्नी ऑफ हीलिंग एंड ट्रांसफॉर्मेशन’ पुस्तक राष्ट्रपति को भेंट की गई। स्वामी चिदानंद मुनि ने राष्ट्रपति को अगले वर्ष मार्च 2022 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के उद्घाटन या समापन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
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