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Kargil Vijay Diwas: भूमि के लिए 10 साल से चक्कर काट रहे शहीद नरपाल के परिजन
Tue, 26 Jul 2022 01:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 01:31 PM IST
सार
थानो क्षेत्र के रामनगर डांडा गांव निवासी नरपाल मनवाल कारगिल युद्ध के दौरान जून 1999 को शहीद हो गए थे। उनके शहीद होने के बाद सरकार की ओर से उन्हें पेट्रोल पंप का आवंटन किया गया था।
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kargil vijay diwas
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों की शहादत के 23 साल बाद भी उनके परिजनों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। शहीद नरपाल मनवाल के परिजन पहले आवंटित भूमि का आवंटन निरस्त कराने और नए स्थान पर जमीन आवंटन की मांग को लेकर कार्यालयों के 10 साल से चक्कर काट रहे हैं।
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थानो क्षेत्र के रामनगर डांडा गांव निवासी नरपाल मनवाल कारगिल युद्ध के दौरान जून 1999 को शहीद हो गए थे। उनके शहीद होने के बाद सरकार की ओर से उन्हें पेट्रोल पंप का आवंटन किया गया था। इसके साथ ही छिद्दरवाला के साहब नगर में पांच बीघा जमीन भी दी गई थी। शहीद नरपाल के भाई सत्यपाल मनवाल बताते हैं कि उन्हें जो जमीन आवंटित की गई थी, वह 2013 की आपदा में भू-कटाव के कारण बह गई थी। इसके बाद से वह जिलाधिकारी कार्यालय और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहे हैं। करीब 10 साल तक चक्कर काटने के बाद अब जिला प्रशासन की ओर से ऋषिकेश तहसील के रिकार्ड से उस भूमि का आवंटन निरस्त कर दूसरी जगह जमीन दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि वह जिला प्रशासन से डोईवाला तहसील के थानो और रामनगर डांडा क्षेत्र में भूमि आवंटन की मांग की है। कब तक भूमि का आवंटन होता है कुछ कहा नहीं जा सकता।
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पेट्रोल पंप दिया, भूमि देने से मुकर गए
उत्तरकाशी जिले के डुंडा तहसील के पट्टी बिचली के सरप गांव निवासी सैनिक दिनेश चंद कुमाईं कारगिल युद्ध के दौरान 29 जून 1999 को शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद केंद्र सरकार की ओर से उन्हें तपोवन (ऋषिकेश) में पेट्रोल पंप का आवंटन तो कर दिया, लेकिन भूमि नहीं दी गई।
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शहीद दिनेश कुमाईं के साले दलवीर चंद रमोला ने बताया कि पेट्रोल पंप के आवंटन के दौरान जिला प्रशासन उत्तरकाशी की ओर से उन्हें मैदानी जिले में पांच बीघा भूमि का आवंटन करने को कहा गया था। भूमि के आवंटन को लेकर उनकी ओर से जरूरी औपचारिकता पूूरी कर कागजात डुंडा तहसील में जमा किए गए थे, लेकिन उसके बाद भी उन्हें भूमि नहीं मिली। उन्होंने बताया अभी तक भूमि के आवंटन को लेकर को वह कई बार डुंडा तहसील में शिकायत दर्ज करा चुके हैं लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।