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मिला जीवनदान: जांच में पता चली ऐसी खतरनाक बीमारी फिर भी जौलीग्रांट में पहली बार की गई सर्जरी, मिली सफलता
Fri, 27 Oct 2023 01:25 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 27 Oct 2023 01:25 PM IST
सार
जांच में पता चला कि पीड़ित के शरीर की सबसे बड़ी नस आओरटा पेट के निचले हिस्से में गुब्बारे की तरह फूल गई है। जिस कारण मरीज के पेट के अंदर रक्तस्राव हो रहा था। खतरे को देखते हुए मरीज को एन्डोवैस्कुलर विधि से सर्जरी का विकल्प दिया गया। जो जौलीग्रांट में पहली बार की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक व्यक्ति की सर्जरी कर उसे जीवनदान दिया है। हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति की एक साल पहले एंजियोप्लास्टी भी हुई थी। रमेश शर्मा निवासी ऊधमसिंहनगर पेट में दर्द की शिकायत लेकर हिमालयन अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. चंद्रमोहन बेलवाल से मिले।
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जांच में पता चला कि उनकी शरीर की सबसे बड़ी नस आओरटा पेट के निचले हिस्से में गुब्बारे की तरह फूल गई है। जिस कारण मरीज के पेट के अंदर रक्तस्राव हो रहा था। इससे पैरों की तरफ जाने वाले रक्त का प्रवाह भी प्रभावित हो रहा था।
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पैरों की नसे भी हुई बंद
सीटी स्कैन करवाने पर पता चला कि उनकी पैरों की नसे भी बंद हो गई हैं। इस बीमारी को एब्डोमिनल आओरटिक एन्यूरिज्म विद कंटेन्ड रप्चर कहा जाता है। कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. चंद्रमोहन बेलवाल, डॉ. अनुराग रावत ने कहा कि इसका इलाज शल्य चिकित्सा है। लेकिन इसके खतरे को देखते हुए मरीज को एन्डोवैस्कुलर विधि से सर्जरी का विकल्प दिया गया। जो जौलीग्रांट में पहली बार की गई है।
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छह घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में आओरटा और पैरों की नसों को स्टेंट ग्राफ्ट सिस्टम की सहायता से खोला गया। मरीज को एक हफ्ते तक चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में रखा गया। मरीज के स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों की टीम में डॉ. कुनाल गुरुरानी, कार्डियक सर्जरी विभाग से डॉ. भावना सिंह, एनेस्थिसिया से डॉ. कीर्ति शामिल रहे।