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खुले आसमान के नीचे जिंदगी जीने को बेबस पीड़ित
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खुले में जीवन यापन करते चंद्रभागा नदी से बेघर हुए लोग।
- फोटो : RISHIKESH
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चंद्रभागा नदी किनारे झुग्गी झोपड़ियां टूटने के बाद बेघर हुए लोगों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हुआ पड़ा है। करीब दो हजार की आबादी बेबसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। खुले आसमान के नीचे बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं लिए एक-एक दिन काटना भारी पड़ रहा है। औपचारिकता के लिए स्थानीय प्रशासन ने एक दिन खाने के पैकेट बांटकर इतिश्री कर ली है। अब बेघर लोग भगवान भरोसे समस्याओं से बोझिल जिंदगी गुजार रहे हैं।
ठंड का लगातार बढ़ता प्रकोप चंद्रभागा किनारे रहने वाले बेघर लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। यहां हालात दिन प्रतिदिन बदत्तर होते जा रहे हैं। यहां पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को पांच दिन बीत चुके हैं, मगर प्रशासन की ओर से अब तक इन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम नहीं किया गया है। हालात यह है कि यहां रहने वाले एक लड़के सन्नी का इलाज शहर के निजी अस्पताल में चल रहा है और अन्य कई लोगों को जुकाम, खांसी सहित अन्य रोगों ने घेर लिया है। एक तिरपाल के सहारे ही पूरी ठंड भरी रात काटने को यहां के लोग मजबूर हैं। बारिश, आंधी-तूफान के डर से इन बेघर लोगों के माथे पर सिकन अब भी कायम है। बीते बृहस्पतिवार को आई हल्की बारिश के कारण यहां अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तेज आंधी और तूफान के थपेड़ों में बेघर लोगों को पूरी रात जागकर काटनी पड़ी थी।
- परिवार को ऐसे खुले में छोड़कर काम पर नहीं जा पा रहा हूं। जेब में पड़े रुपये भी खत्म हो चुके हैं। ऐसे में खाने और रहने की समस्या पैदा हो गई। साथ ही लगातार ठंड बढ़ती जा रही है, मगर प्रशासन ने अब तक यहां की कोई सुध नहीं ली है।
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- हरेंद्र साहनी
- कहीं किराए पर कमरा लेने भी जाएं तो बहुत महंगा है। साथ ही बच्चों को देखकर कोई कमरा किराए पर देने को तैयार नहीं है। मजबूरन खुले आसमान के नीचे पूरे परिवार को रात काटनी पड़ रही है। आखिर हम लोग जाएं भी तो कहां जाएं।
- ललित कुमार
- एक तिरपाल के भरोसे ही रात काटनी पड़ती है। पत्नी को बुखार और जुकाम भी हो गया है। इलाज कराने के लिए जेब में पैसे भी नहीं बचे हैं। प्रशासन का बेघर हुए लोगों के प्रति रवैया मानवीयता से परे है। यहां एक-एक दिन काटना मुश्किल हुआ पड़ा है।
- सुमन राम
- तबियत खराब हो गई है। बुखार आ रहा है। कुछ दिनों से हल्का बुखार महसूस हो रहा था। साथ ही खुले आसमान के नीचे ठंड भरी रात गुजारना काफी पीड़ादायक है। बेघर होने के बाद खाने-पीने का संकट भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
- दिनेश साहनी
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ठंड का लगातार बढ़ता प्रकोप चंद्रभागा किनारे रहने वाले बेघर लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। यहां हालात दिन प्रतिदिन बदत्तर होते जा रहे हैं। यहां पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को पांच दिन बीत चुके हैं, मगर प्रशासन की ओर से अब तक इन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम नहीं किया गया है। हालात यह है कि यहां रहने वाले एक लड़के सन्नी का इलाज शहर के निजी अस्पताल में चल रहा है और अन्य कई लोगों को जुकाम, खांसी सहित अन्य रोगों ने घेर लिया है। एक तिरपाल के सहारे ही पूरी ठंड भरी रात काटने को यहां के लोग मजबूर हैं। बारिश, आंधी-तूफान के डर से इन बेघर लोगों के माथे पर सिकन अब भी कायम है। बीते बृहस्पतिवार को आई हल्की बारिश के कारण यहां अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तेज आंधी और तूफान के थपेड़ों में बेघर लोगों को पूरी रात जागकर काटनी पड़ी थी।
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- परिवार को ऐसे खुले में छोड़कर काम पर नहीं जा पा रहा हूं। जेब में पड़े रुपये भी खत्म हो चुके हैं। ऐसे में खाने और रहने की समस्या पैदा हो गई। साथ ही लगातार ठंड बढ़ती जा रही है, मगर प्रशासन ने अब तक यहां की कोई सुध नहीं ली है।
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- हरेंद्र साहनी
- कहीं किराए पर कमरा लेने भी जाएं तो बहुत महंगा है। साथ ही बच्चों को देखकर कोई कमरा किराए पर देने को तैयार नहीं है। मजबूरन खुले आसमान के नीचे पूरे परिवार को रात काटनी पड़ रही है। आखिर हम लोग जाएं भी तो कहां जाएं।
- ललित कुमार
- एक तिरपाल के भरोसे ही रात काटनी पड़ती है। पत्नी को बुखार और जुकाम भी हो गया है। इलाज कराने के लिए जेब में पैसे भी नहीं बचे हैं। प्रशासन का बेघर हुए लोगों के प्रति रवैया मानवीयता से परे है। यहां एक-एक दिन काटना मुश्किल हुआ पड़ा है।
- सुमन राम
- तबियत खराब हो गई है। बुखार आ रहा है। कुछ दिनों से हल्का बुखार महसूस हो रहा था। साथ ही खुले आसमान के नीचे ठंड भरी रात गुजारना काफी पीड़ादायक है। बेघर होने के बाद खाने-पीने का संकट भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
- दिनेश साहनी