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फेफड़ों की जांच के लिए एम्स में शुरू हुई स्पेशल क्लीनिक
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ऋषिकेश। अगर आप धूम्रपान करते हैं और लंबे समय से खांसी और थकान की शिकायत से जूझ रहे है तो इसे बिल्कुल भी नजर अंदाज न करें। ये दोनों फेफेड़ों के कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार विश्वभर में कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे अधिक मामले फेफड़ों के कैंसर के होते हैं। संदिग्ध लक्षणों वालें मरीज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की प्रत्येक शुक्रवार को स्पेशल लंग क्लीनिक में अपनी जांच करा सकते हैं।
एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने शुक्रवार को संस्थान में स्पेशल लंग क्लीनिक का शुभारंभ किया। प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि फेफड़े का कैंसर एक गंभीर बीमारी है। लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण अब कैंसर से छुटकारा पाना संभव है। लक्षणों के आधार पर समय पर इलाज शुरू कर दिए जाने से कैंसर की गंभीर स्थिति से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश में लंग कैंसर के लिए स्पेशल क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इसके समुचित इलाज के लिए एम्स में सभी तरह की आधुनिक मेडिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध हैं।
पल्मोनरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मयंक मिश्रा ने बताया कि बीड़ी-सिगरेट का सेवन करना फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। वहीं पैसिव स्मोकिंग या परोक्ष धूम्रपान भी कैंसर का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि फेफड़े के कैंसर में फेफड़ों के किसी भाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित और असामान्य वृद्धि होने लगती है। कई बार फेफड़े के कैंसर का शुरूआती दौर में पता नहीं चलता और यह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है।
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फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
- लंबे समय से खांसी-बलगम की शिकायत
- खांसी में खून आना
- सांस फूलना
- सीने में दर्द
- वजन का कम होना
- चेहरे या गले में सूजन
- आवाज बदल जाना
- भूख कम लगना
- लगातार थकान महसूस होना
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एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने शुक्रवार को संस्थान में स्पेशल लंग क्लीनिक का शुभारंभ किया। प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि फेफड़े का कैंसर एक गंभीर बीमारी है। लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण अब कैंसर से छुटकारा पाना संभव है। लक्षणों के आधार पर समय पर इलाज शुरू कर दिए जाने से कैंसर की गंभीर स्थिति से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश में लंग कैंसर के लिए स्पेशल क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इसके समुचित इलाज के लिए एम्स में सभी तरह की आधुनिक मेडिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध हैं।
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पल्मोनरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मयंक मिश्रा ने बताया कि बीड़ी-सिगरेट का सेवन करना फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। वहीं पैसिव स्मोकिंग या परोक्ष धूम्रपान भी कैंसर का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि फेफड़े के कैंसर में फेफड़ों के किसी भाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित और असामान्य वृद्धि होने लगती है। कई बार फेफड़े के कैंसर का शुरूआती दौर में पता नहीं चलता और यह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है।
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फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
- लंबे समय से खांसी-बलगम की शिकायत
- खांसी में खून आना
- सांस फूलना
- सीने में दर्द
- वजन का कम होना
- चेहरे या गले में सूजन
- आवाज बदल जाना
- भूख कम लगना
- लगातार थकान महसूस होना