{"_id":"60f096b18ebc3ecad861b841","slug":"plastic-medicine-day-celebrated-in-aiims-rishikesh-news-drn384575838","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स में मनाया गया प्लास्टिक चिकित्सा दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स में मनाया गया प्लास्टिक चिकित्सा दिवस
विज्ञापन
ेऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में बृहस्पतिवार को प्लास्टिक चिकित्सा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में एम्स के विशेषज्ञों ने प्लास्टिक सर्जरी के विभिन्न पहलुओं और अस्पताल में उपलब्ध प्लास्टिक सर्जरी की आधुनिकतम तकनीकों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देहरादून के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. राकेश कालरा ने बताया कि भारत में सबसे पहले प्लास्टिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत महर्षि सुश्रुत ने की थी। उन्होंने संस्थान के एमबीबीएस के विद्यार्थियों को प्लास्टिक चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों की जानकारी दी। एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि संस्थान के बर्न और प्लास्टिक चिकित्सा विभागों के विशेषज्ञ मरीजों को लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक चिकित्सा से किसी भी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को हुई शारीरिक क्षति को समय पर इलाज मिलने पर कम या ठीक किया जा सकता है। एम्स के डीन प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने अस्पताल में उपलब्ध प्लास्टिक शल्य चिकित्सा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल मागो ने अस्पताल में की जा रही माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव क्लेफ्ट सर्जरी, हाथ की सर्जरी, ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी, एस्थेटिक सर्जरी, एस्थेटिक फेशियल सर्जरी और फेशियल नर्व पैरालिसिस रिकंस्ट्रक्शन क्रैनियोफेशियल सर्जरी के विषय में बताया। कार्यक्रम में डॉ. बलरामजी ओमर, प्लास्टिक चिकित्सा विभाग की डॉ. देवरति चटोपाध्याय, डॉ. मधुवरी वाथुल्या, डॉ. सत्याश्री के अलावा नर्सिंग स्टाफ और एमबीबीएस के विद्यार्थी मौजूद थे।
विज्ञापन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देहरादून के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. राकेश कालरा ने बताया कि भारत में सबसे पहले प्लास्टिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत महर्षि सुश्रुत ने की थी। उन्होंने संस्थान के एमबीबीएस के विद्यार्थियों को प्लास्टिक चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों की जानकारी दी। एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि संस्थान के बर्न और प्लास्टिक चिकित्सा विभागों के विशेषज्ञ मरीजों को लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक चिकित्सा से किसी भी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को हुई शारीरिक क्षति को समय पर इलाज मिलने पर कम या ठीक किया जा सकता है। एम्स के डीन प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने अस्पताल में उपलब्ध प्लास्टिक शल्य चिकित्सा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल मागो ने अस्पताल में की जा रही माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव क्लेफ्ट सर्जरी, हाथ की सर्जरी, ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी, एस्थेटिक सर्जरी, एस्थेटिक फेशियल सर्जरी और फेशियल नर्व पैरालिसिस रिकंस्ट्रक्शन क्रैनियोफेशियल सर्जरी के विषय में बताया। कार्यक्रम में डॉ. बलरामजी ओमर, प्लास्टिक चिकित्सा विभाग की डॉ. देवरति चटोपाध्याय, डॉ. मधुवरी वाथुल्या, डॉ. सत्याश्री के अलावा नर्सिंग स्टाफ और एमबीबीएस के विद्यार्थी मौजूद थे।
विज्ञापन