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गंदी बसों में सफर करने को मजबूर हैं यात्री
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रोडवेज डिपो प्रशासन बसों के रखरखाव और धुलाई सही तरीके से नहीं कर पा रहा है। स्थित यह है कि गंदी सीटों, गंदे शीशे यात्रियों का सफर किरकिरा कर रहे हैं। बसों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर हर रोज यात्रियों और कंडक्टरों में झड़प हो रही है। बावजूद इसके रोडवेज अधिकारी मामले का संज्ञान लेने को तैयार नहीं है।
रोडवेज ऋषिकेश डिपो में 65 बसें हैं। बसों की धुलाई करने के लिए रोडवेज मुख्यालय की ओर से एक एजेंसी को ठेका दिया गया है। बसों की धुलाई की निगरानी डिपो के फोरमैन करते हैं। लेकिन धुलने वाली बसों की नियमित जांच न करने से गंदी बसें रूट पर भेजी जा रही हैं। एजेंसी की ओर से धुलाई के नाम पर केवल पानी मारकर बसों की बाहर ही बाहर सफाई की जाती है, अंदर की सफाई के नाम पर केवल झाड़ू लगाई जाती है।
बसों के शीशे की कभी भी धुलाई नहीं होती। यह गंदगी यात्रियों के कपड़े खराब करती है। बस अंदर लगे जादू-टोने, कैंसर, रसौली वाले स्टीकर भी नहीं हटाए जाते। वहीं बसों की फटी सीटों की मरम्मत नहीं की जाती। कई बसों के सीट के हेड कवर फट चुके हैं, लेकिन वह बदले नहीं जा रहे हैं।
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बसों की धुलाई करने वाले मजदूरों ने बताया कि उन्हें बसों की धुलाई करने के लिए सर्फ नहीं दिया जाता। यह जिन बसों की धुलाई नहीं हो पा रही है वह बसें दिल्ली और चंडीगढ़ के रूट पर चलती हैं। दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले सचिन ने बताया ऋषिकेश डिपो की जितनी बसें दिल्ली मार्ग पर चलती हैं सारी गंदी रहती हैं। संवाद
यदि बसों की नियमित धुलाई नहीं हो रही है तो संबंधित फोरमैन का जवाब तलब किया जाएगा। बसों की सीट के हैडकवर भी बनवाए जाएंगे। जल्द व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
-प्रवीण कुमार भारती, एजीएम रोडवेज ऋषिकेश
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रोडवेज ऋषिकेश डिपो में 65 बसें हैं। बसों की धुलाई करने के लिए रोडवेज मुख्यालय की ओर से एक एजेंसी को ठेका दिया गया है। बसों की धुलाई की निगरानी डिपो के फोरमैन करते हैं। लेकिन धुलने वाली बसों की नियमित जांच न करने से गंदी बसें रूट पर भेजी जा रही हैं। एजेंसी की ओर से धुलाई के नाम पर केवल पानी मारकर बसों की बाहर ही बाहर सफाई की जाती है, अंदर की सफाई के नाम पर केवल झाड़ू लगाई जाती है।
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बसों के शीशे की कभी भी धुलाई नहीं होती। यह गंदगी यात्रियों के कपड़े खराब करती है। बस अंदर लगे जादू-टोने, कैंसर, रसौली वाले स्टीकर भी नहीं हटाए जाते। वहीं बसों की फटी सीटों की मरम्मत नहीं की जाती। कई बसों के सीट के हेड कवर फट चुके हैं, लेकिन वह बदले नहीं जा रहे हैं।
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बसों की धुलाई करने वाले मजदूरों ने बताया कि उन्हें बसों की धुलाई करने के लिए सर्फ नहीं दिया जाता। यह जिन बसों की धुलाई नहीं हो पा रही है वह बसें दिल्ली और चंडीगढ़ के रूट पर चलती हैं। दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले सचिन ने बताया ऋषिकेश डिपो की जितनी बसें दिल्ली मार्ग पर चलती हैं सारी गंदी रहती हैं। संवाद
यदि बसों की नियमित धुलाई नहीं हो रही है तो संबंधित फोरमैन का जवाब तलब किया जाएगा। बसों की सीट के हैडकवर भी बनवाए जाएंगे। जल्द व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
-प्रवीण कुमार भारती, एजीएम रोडवेज ऋषिकेश