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Rishikesh News: भविष्य में शोधार्थी के पेटेंट का खर्चा वहन करेगा विवि
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Iपं. ललित मोहन शर्मा ऋषिकेश परिसर में कार्यशाला आयोजित, शोधार्थियों को दी जानकारी
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Iकार्यशाला में विवि परिसर के 120 प्रतिभागी हुए शामिलI
पंडित ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर में कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, रिसर्च पब्लिकेशन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और पेटेंट विषय पर विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में 120 प्रतिभागी शामिल हुए।
बुधवार को विवि कुलपति प्रो. एनके जोशी, निदेशक प्रो. एमएस रावत, प्रो. गुलशन कुमार धींगरा ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा कि विवि का मुख्य उद्देश्य 2025 में राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद, नैक के अंतर्गत लाना है। इसके लिए विवि के सभी सदस्यों को मिलकर काम करना होगा। भविष्य में यदि कोई शोधार्थी अपना कोई पेटेंट करता है तो उसका खर्चा विवि वहन करेगा। प्राध्यापक की ओर से पेटेंट करने पर 50 प्रतिशत विवि वहन करेगा।
ईआरपी सॉफ्टवेयर के जरिए विवि में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड क्रमबद्ध रखेगा। निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला विवि परिसर के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। नवाचार एवं नवीन प्रवृत्तियां पर शोधार्थियों को जानकारी देते हुए कहा कि नव प्रवर्तन चक्र में अभी हम छठी लहर में हैं l हमें सोचने समझने की क्षमता का विकास करना चाहिए। दूसरे सत्र में विशेषज्ञ ने बौद्धिक संपदा अधिकार और पेटेंट को करने के तरीके पर व्याख्यान दिया l कहा कोई भी व्यक्ति अपने अनुसार एक नया आविष्कार कर सकते हैं और भारत इस समय विश्व में बौद्धिक संपदा अधिकार में 40 वें स्थान पर हैं।
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Iकार्यशाला में विवि परिसर के 120 प्रतिभागी हुए शामिलI
पंडित ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर में कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, रिसर्च पब्लिकेशन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और पेटेंट विषय पर विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में 120 प्रतिभागी शामिल हुए।
बुधवार को विवि कुलपति प्रो. एनके जोशी, निदेशक प्रो. एमएस रावत, प्रो. गुलशन कुमार धींगरा ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा कि विवि का मुख्य उद्देश्य 2025 में राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद, नैक के अंतर्गत लाना है। इसके लिए विवि के सभी सदस्यों को मिलकर काम करना होगा। भविष्य में यदि कोई शोधार्थी अपना कोई पेटेंट करता है तो उसका खर्चा विवि वहन करेगा। प्राध्यापक की ओर से पेटेंट करने पर 50 प्रतिशत विवि वहन करेगा।
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ईआरपी सॉफ्टवेयर के जरिए विवि में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड क्रमबद्ध रखेगा। निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला विवि परिसर के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। नवाचार एवं नवीन प्रवृत्तियां पर शोधार्थियों को जानकारी देते हुए कहा कि नव प्रवर्तन चक्र में अभी हम छठी लहर में हैं l हमें सोचने समझने की क्षमता का विकास करना चाहिए। दूसरे सत्र में विशेषज्ञ ने बौद्धिक संपदा अधिकार और पेटेंट को करने के तरीके पर व्याख्यान दिया l कहा कोई भी व्यक्ति अपने अनुसार एक नया आविष्कार कर सकते हैं और भारत इस समय विश्व में बौद्धिक संपदा अधिकार में 40 वें स्थान पर हैं।
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