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गंगा घाट पर जरुरतमंदों के लिए खुली लाइब्रेरी
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चलत मुसाफिर और बस्तापैक एडवेंचर के संयुक्त तत्वाधान में तपोवन घाट पर स्ट्रीट लाइब्रेरी खोली गई। पद्मश्री योगी एरन ने इसका शुभारंभ किया। घाट पर आए पर्यटकों ने लाइब्रेरी का लाभ उठाया।
योगी एरन ने टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें ऐसे ही युवाओं की जरूरत है जो सोसाइटी के बारे में सोचें। चलत मुसाफिर और बस्तापैक संस्था के सदस्यों की ये मुहिम कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। ऐसी मुहिम से लोगों को पढ़ने की इच्छा जागेगी, जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते हैं।
बस्तापैक एडवेंचर के सहसंस्थापक गिरिजांश ने बताया कि ये तो बस शुरुआत है, हम उत्तराखंड के रिमोट एरिया तक किताबें पहुंचाना चाह रहे हैं। गांवों-गलियों तक अलग-अलग किस्म की किताबें पहुंचे, ये हमारा उद्देश्य है।
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संस्था की ओर से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ पद्मभूषण अनिल जोशी ने किया। संस्था ने आसपास लोगों से अपील करते हुए कहा कि आपके जो भी प्रियजन जो अब शारीरिक तौर पर इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आप उनकी स्मृतियों को सहेज कर रखना चाहते हैं, उनके नाम का एक पौधा बस्तापैक कैंपसाइट पर आकर लगाएं। हमारी टीम उनके नाम का एक प्लेट लगाएगी ताकि पौधा बढ़ने के साथ-साथ उसकी पहचान आपके प्रियजन के नाम से रहे। अनिल जोशी ने कहा कि पहाड़ों पर टूरिज्म पर बिजनेस तो बहुत लोग करते हैं पर हमें एक रिसपॉन्सिबल टूरिज्म इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। हमें प्रकृति की ओर लौटना चाहिए, जो ज्यादातर लोग करना भूल जाते हैं। चलत मुसाफ़िर और बस्ता पैक की टीम इसे बखूबी आगे बढ़ा रही है। जो प्रशंसनीय है। इस मौके पर सह संस्थापक मोनिका मरांडी, प्रज्ञा श्रीवास्तव, प्रदीप भट्ट, काजल मेहरा आदि शामिल थे।
मनोज राणा
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योगी एरन ने टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें ऐसे ही युवाओं की जरूरत है जो सोसाइटी के बारे में सोचें। चलत मुसाफिर और बस्तापैक संस्था के सदस्यों की ये मुहिम कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। ऐसी मुहिम से लोगों को पढ़ने की इच्छा जागेगी, जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते हैं।
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बस्तापैक एडवेंचर के सहसंस्थापक गिरिजांश ने बताया कि ये तो बस शुरुआत है, हम उत्तराखंड के रिमोट एरिया तक किताबें पहुंचाना चाह रहे हैं। गांवों-गलियों तक अलग-अलग किस्म की किताबें पहुंचे, ये हमारा उद्देश्य है।
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संस्था की ओर से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ पद्मभूषण अनिल जोशी ने किया। संस्था ने आसपास लोगों से अपील करते हुए कहा कि आपके जो भी प्रियजन जो अब शारीरिक तौर पर इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आप उनकी स्मृतियों को सहेज कर रखना चाहते हैं, उनके नाम का एक पौधा बस्तापैक कैंपसाइट पर आकर लगाएं। हमारी टीम उनके नाम का एक प्लेट लगाएगी ताकि पौधा बढ़ने के साथ-साथ उसकी पहचान आपके प्रियजन के नाम से रहे। अनिल जोशी ने कहा कि पहाड़ों पर टूरिज्म पर बिजनेस तो बहुत लोग करते हैं पर हमें एक रिसपॉन्सिबल टूरिज्म इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है। हमें प्रकृति की ओर लौटना चाहिए, जो ज्यादातर लोग करना भूल जाते हैं। चलत मुसाफ़िर और बस्ता पैक की टीम इसे बखूबी आगे बढ़ा रही है। जो प्रशंसनीय है। इस मौके पर सह संस्थापक मोनिका मरांडी, प्रज्ञा श्रीवास्तव, प्रदीप भट्ट, काजल मेहरा आदि शामिल थे।
मनोज राणा