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नेशनल जियोग्राफी चैनल पर दिखेगी गंगा तैरो पानी डाक्यूमेंट्री
naveen nautiyal
Updated Sat, 13 Aug 2016 01:22 AM IST
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शेखर रावत
- फोटो : photo file
हर व्यक्ति में कुछ विशेेष गुण और प्रतिभाएं होती हैं, इसलिए व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने के लिए अपने गुणों की पहचान करनी चाहिए। भारतीय उद्योगपति रतन टाटा की यह मशहूर पंक्तियां तीर्थनगरी के शेखर रावत पर सटीक बैठती है। बता दें कि शेखर की गंगोत्री पर नॉन फिक्शन डाक्यूमेंट्री के लिए क्लिक किए गए फोटोग्राफ्स को नेशनल जियोग्राफी चैनल की मैगजीन नेशनल जियोग्रेफिक ट्रेवलर ने अपने 50 साल पूरे होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वहीं, चैनल पर उनकी बनाई गई डाक्यूमेंट्री गंगा तैरो पानी जल्द देखने को मिलेगी।
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12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद शेखर के पिता ने उन्हें बीबीए करने को कहा, लेकिन शेखर फोटोग्राफी के क्षेत्र में कुछ अलग कर दिखाना चाहते थे।
हालांकि उन्होंने पिता की इच्छा का ख्याल रखते हुए बीबीए की पढ़ाई भी की। इस बीच उन्होंने अपनी फोटोग्राफी भी जारी रखी। शेखर के पिता बताते हैं कि खुद के जेब खर्च से बचाए गए पैसों से उसने एक कैमरा खरीदा। धीरे-धीरे उसने फोटोग्राफी से संबंधित क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और जीत हासिल की। साल 2013 में शेखर ने ऋषिकेश फोटोग्राफी चैंपियनशीप जीती।
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इसके बाद उन्होने उत्तराखंड फोटोग्राफी फेस्टिवल में प्रथम स्थान पाकर खिताब अपने नाम किया। इसके बाद शेखर ने कई नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में अवॉर्ड प्राप्त किए। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने फोटोग्राफी को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया लिया।
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शेखर ने गोमुख पर आधारित गंगा तैरो पानी डाक्यूमेंट्री बनाई। इस दौरान उन्होंने गोमुख के कई स्थानों की फोटोग्राफी भी की। जिसे उन्होंने योर शॉट वेब साइट पर अपलोड किया। इसके बाद नेशनल जियोग्राफी चैनल की मैगजीन नेशनल जियोग्रेफिक ट्रेवलर के 50 साल पूरे होने पर उनकी फोटो को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
31 बार प्रयास के बाद मिली सफलता
शेखर बताते हैं कि उक्त मैगजीन में अपनी फोटो प्रकाशित करने के लिए उन्होंने 31 बार प्रयास किए, तब कहीं जाकर सफलता मिली। बताया कि मैगजीन अधिकारियों ने कहा कि आज तक कभी उत्तराखंड के किसी व्यक्ति की फोटो नहीं लगी। कहा चैनल अधिकारियों ने ई-मेल कर बताया कि जल्द ही गोमुख पर आधारित डाक्यूमेंट्री गंगा तैरो पानी को नेशनल जियोग्राफी चैनल में दिखाई जाएगी।
इच्छा थी कि बेटा नाम रोशन करे, उसने कर दिखाया
तीर्थनगरी के शेखर रावत के माता-पिता खुद का छोटा सा बिजनेस करते हैं। 12वीं की पढ़ाई के बाद पिता की इच्छा हुई कि बेटा पढ़-लिखकर हमारा नाम रोशन करेगा। लिहाजा, उन्होंने वर्ष 2013 में आईएमएस में बीबीए में एड़मिशन करवाया। लेकिन शेखर का मन बढ़ती उम्र के साथ फोटोग्राफी की ओर बढ़ता चला।
गरीबों के लिए मुफ्त स्कूल खोलेंगे
शेखर कहते हैं कि कुछ पैसा कमाने के बाद वह गरीब बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल खोलेंगे। जिसमें गढ़वाल के बच्चों को शिक्षा के साथ फोटोग्राफी भी सिखाई जाएगी।